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History of India
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औरंगजेब के समय में किस हिंदू राजा ने "शिवाजी महाराज" और मुगलों के बीच "पुरंदर की संधि" करवाई थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मिर्जा राजा जय सिंह ने ही मुगलों की ओर से संधि का नेतृत्व किया था।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सैन्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए सैनिकों को नकद वेतन देने की प्रथा शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों के हुलिया दर्ज करने की प्रणाली को सख्ती से लागू किया, साथ ही मूल्य नियंत्रण (Market Control) के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि सुधारों के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की, किंतु दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि और उसकी तुगलककालीन राजधानी परिवर्तन तथा सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के प्रयोग के गलत समय पर क्रियान्वयन के कारण उसकी योजनाएं विफल हो गईं।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में राजस्व प्रणाली को सरल बनाने के लिए 24 प्रकार के कष्टप्रद करों (अवाब) को समाप्त कर दिया और केवल शरीयत द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, जकात, जिजिया और खुम्स—को ही वैध रखा, साथ ही सिंचाई की सुविधा के लिए यमुना और सतलुज नदियों से कई नहरों का निर्माण करवाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह के पास अखिल भारतीय स्तर पर स्वीकृत, दूरदर्शी और सुसंगठित केंद्रीय नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेता अपने स्थानीय हितों और सीमाओं से बंधे रहे तथा ब्रिटिश सत्ता के विकल्प के रूप में कोई सुसंगत प्रशासनिक ढांचा प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे।
2. नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई जैसे विद्रोही नेताओं के पास अदम्य साहस था, परंतु आधुनिक सैन्य विज्ञान, तोपखाने, सुदृढ़ संचार साधनों और अनुशासित यूरोपीय सैन्य रणनीति के मुकाबले उनकी रणनीतिक सीमाएं स्पष्ट रूप से उजागर हुईं।
3. मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र को विद्रोह का प्रतीकात्मक प्रमुख घोषित किया जाना तात्कालिक रूप से जनता को एकजुट करने में सहायक रहा, परंतु उनकी वृद्धावस्था, अनिच्छा और विद्रोही सैनिकों के मध्य आपसी समन्वय के अभाव के कारण यह नेतृत्व निर्णायक साबित नहीं हो सका।
4. शिक्षित मध्यम वर्ग, बड़े जमींदारों (ताल्लुकदारों को छोड़कर) और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा से प्रभावित बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह का सक्रिय रूप से समर्थन किया तथा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध इसे एक अखिल भारतीय आधुनिक जन-क्रांति में बदल दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक आधार और उनके संस्थापकों/सुधारकों के दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का खंडन करते हुए उपनिषदों के अद्वैतवादी वेदांत पर आधारित एकेश्वरवाद की स्थापना करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए पाश्चात्य संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का पूर्णतः बहिष्कार किया तथा वेदों की अचूकता और infallibility को अस्वीकार कर दिया।
3. वर्ष 1875 मेंMadam Blavatsky और कर्नल ओल्काट द्वारा स्थापित 'थियोसोफिकल सोसाइटी' ने प्राचीन हिंदू धर्म, दर्शन, पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया और बाद में एनी बेसेंट के नेतृत्व में इसने भारत में तीव्र गति पकड़ी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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ब्रिटिश शासनकाल में भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवॉलिस द्वारा 1793 में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया गया, लेकिन 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) के अंतर्गत यदि कोई जमींदार निश्चित तिथि को सूर्यास्त से पहले भू-राजस्व जमा नहीं करता था, तो उसकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
2. थॉमस मुनरो द्वारा दक्षिण भारत में लागू 'रयतवारी व्यवस्था' के अंतर्गत सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, तथा लगान का निर्धारण भूमि की उर्वरता के आधार पर किया जाता था, किंतु यह कर स्थाई और अपरिवर्तनीय था जिसे कभी बढ़ाया नहीं जा सकता था।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत व पंजाब में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के तहत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या 'महाल' (गाँवों के समूह) के स्तर पर किया जाता था, और राजस्व भुगतान के लिए ग्राम का मुखिया या लंबरदार उत्तरदायी होता था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के परिणामस्वरूप पारंपरिक कृषि का वाणिज्यीकरण हुआ, जिससे नकदी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा मिला, लेकिन साथ ही अत्यधिक लगान और ऋणग्रस्तता के कारण भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर विगठन और कृषक वर्ग महाजनों के शिकंजे में फंसता चला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगरीय योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगर सामान्यतः दो भागों में विभाजित थे — पश्चिमी भाग जो ऊँचा होता था (जिसे 'दुर्ग' या 'सिटाडेल' कहा जाता था और जहाँ संभवतः शासक वर्ग या विशिष्ट लोग निवास करते थे) तथा पूर्वी भाग जो बड़ा और निचला शहर था (जहाँ सामान्य जनता निवास करती थी), किंतु धौलाविरा इसका एक अपवाद है जो त्रि-स्तरीय (तीन भागों) विभाजित था।
2. सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों (Seals) पर सर्वाधिक अंकन एकशृंगी पशु (Unicorn) का मिलता है, और इसके अतिरिक्त पशुपति शिव (आद्य-शिव) का अंकन मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक प्रसिद्ध मुहर पर मिलता है, जिसके चारों ओर बाघ, हाथी, गेंडा और भैंसा तथा पैरों के पास दो हिरण विराजमान हैं।
3. लोथल और सुतकागडोर हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह (Tidal Ports) थे, जहाँ से मेसोपोटामिया और फारस की खाड़ी के साथ समुद्री व्यापार संचालित होता था, और लोथल से प्राप्त 'गोदीबाड़ा' (Dockyard) विश्व का ज्ञात सबसे प्राचीन कृत्रिम बंदरगाह साक्ष्य माना जाता है।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे के अत्यधिक उन्नत ज्ञान से भली-भांति परिचित थे और उन्होंने अपने नगरों की सुरक्षा दीवारों एवं शस्त्रों के निर्माण में लोहे के हथियारों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया था, जिसके कारण इस सभ्यता को 'लौह युगीन सभ्यता' कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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