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History of India
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक आधार और उनके संस्थापकों/सुधारकों के दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का खंडन करते हुए उपनिषदों के अद्वैतवादी वेदांत पर आधारित एकेश्वरवाद की स्थापना करना था।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए पाश्चात्य संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का पूर्णतः बहिष्कार किया तथा वेदों की अचूकता और infallibility को अस्वीकार कर दिया।
  3. 3. वर्ष 1875 मेंMadam Blavatsky और कर्नल ओल्काट द्वारा स्थापित 'थियोसोफिकल सोसाइटी' ने प्राचीन हिंदू धर्म, दर्शन, पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया और बाद में एनी बेसेंट के नेतृत्व में इसने भारत में तीव्र गति पकड़ी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि राजा राममोहन राय ने 1815 में आत्मीय सभा और 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य उपनिषदों पर आधारित एकेश्वरवाद का प्रचार करना और मूर्तिपूजा व सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध करना था। कथन 2 गलत है क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक माना, किंतु उन्होंने आधुनिक विज्ञान और पाश्चात्य शिक्षा का पूर्ण बहिष्कार नहीं किया था, बल्कि वे उसके सकारात्मक पहलुओं के समर्थक थे। कथन 3 सही है क्योंकि थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना 1875 में अमेरिका में हुई थी और इसने भारतीय प्राचीन दर्शन, पुनर्जन्म तथा कर्म के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया, जिसे बाद में एनी बेसेंट ने भारत में लोकप्रिय बनाया। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के विद्रोह के विभिन्न कारणों (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति ने सातारा, नागपुर, झाँसी और अवध जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया, जिससे भारतीय शासकों और वहाँ की जनता में गहरा असंतोष फैल गया था। 2. आर्थिक कारणों में ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और उद्योगों के विनाशात्मक प्रभावों ने पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप किसानों और पारंपरिक शिल्पकारों का एक बड़ा वर्ग अंग्रेजों के विरुद्ध हो गया। 3. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू धर्म त्यागने या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्तियों को उनके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के पुराने प्रावधान को समाप्त कर दिया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों में यह आशंका उत्पन्न हो गई कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है। 4. ब्रिटिश सेना के भीतर मौजूद नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को मिलने वाले कम वेतन और पदोन्नति के अवसरों के अभाव ने भी इस विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार करने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक की भूमिका निभाई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बाबर ने भारत पर पहला आक्रमण कब किया? प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के प्रारंभिक कारणों तथा उसके शासकों की नीतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी, और मगध के शासक बिम्बिसार ने अंग को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था जिससे मगध को उत्तर भारत के नदी मार्गों और समुद्री व्यापार का प्रत्यक्ष लाभ मिला। 2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पांच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक और सैन्य रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, तथा बाद में उदयन ने अपनी रणनीतिक सुविधा के लिए राजधानी को पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया जो गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर स्थित था। 3. महापद्म नंद ने नंद वंश की स्थापना की और उसे 'एकराट' की उपाधि धारण करते हुए उत्तर भारत का पहला ऐतिहासिक सम्राट माना जाता है, जिसने क्षत्रियों का विनाश करने वाला (सर्वक्षत्रान्तक) कहा गया है और कलันक को जीतकर मगध में मिलाया था। 4. अजातशत्रु के शासनकाल में वैशाली के वज्जि संघ को पराजित करने के लिए उसके मंत्री वर्षाकार (Vassakara) ने कूटनीति का सफल प्रयोग किया था, और इसी काल में राजगृह के सप्तपर्णी गुफा में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों द्वारा दिए गए कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर.सी. मजूमदार 2. "यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था।" — विनायक दामोदर सावरकर 3. "यह धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध एक धर्मयुद्ध (Religious War) था।" — टी.आर. होम्स 4. "यह राष्ट्रीय विद्रोह था, जो सिपाही विद्रोह के रूप में शुरू हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ।" — बेंजामिन डिजरायली उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? इब्राहिम लोदी के शासनकाल में अफगान सरदारों के असंतोष का मुख्य कारण क्या था?
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