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History of India
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औरंगजेब ने किस वर्ष बीजापुर (1686) और गोलकुंडा (1687) को मुगल साम्राज्य में मिलाया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
औरंगजेब ने क्रमशः 1686 और 1687 में इन राज्यों को जीता था।
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1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का नया पद सृजित किया गया, जिसे सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) दी गई।
2. महारानी विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) के माध्यम से भारतीय रियासतों के विलय की नीति (व्यपगत का सिद्धांत) को आधिकारिक रूप से त्याग दिया गया तथा भविष्य में राज्यों के विस्तार की नीति न अपनाने का आश्वासन दिया गया।
3. घोषणा पत्र में यह स्पष्ट रूप से घोषित किया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों के पारंपरिक रीति-रिवाजों, धार्मिक विश्वासों और प्राचीन सामाजिक परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, तथा सार्वजनिक सेवाओं में नस्ल, जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना योग्यता के आधार पर नियुक्ति दी जाएगी।
4. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारत में सैन्य बल का पुनर्गठन करते हुए यूरोपीय सैनिकों का अनुपात भारतीय सैनिकों की तुलना में काफी कम कर दिया गया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के किसी भी बड़े सैन्य विद्रोह को आसानी से रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल में कन्नौज की सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग का सम्मान करना था, किंतु इस सभा के दौरान बौद्ध और जैन भिक्षुओं के बीच हुए तीव्र वैचारिक मतभेदों के कारण अंततः हिंसा भड़क उठी थी और समकालीन साक्ष्यों के अनुसार हर्षवर्धन की हत्या का एक असफल प्रयास भी किया गया था।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित कर 'परमेश्वर' और 'दक्षिणपथेश्वर' की उपाधि धारण की थी, तथा इसका प्रत्यक्ष विवरण हमें कांचीपुरम के पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल शिलालेख (Aihole Inscription) में मिलता है जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविर्किर्ति ने की थी।
3. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल) ने बादामी पर आक्रमण कर पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और उसकी राजधानी बादामी पर अधिकार कर लिया, जिसके उपलक्ष್ಯ में उसने 'वातापिकोंड' (वातापि का विजेता) की उपाधि धारण की थी तथा महाबलीपुरम में रथ मंदिरों का निर्माण आरंभ करवाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के दार्शनिक सिद्धांतों और उनके प्रचारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार ब्रह्म और जगत में कोई भिन्नता नहीं है और जगत ब्रह्म का वास्तविक (मायारहित) रूपांतरण है, तथा उन्होंने कृष्ण की बाल रूप में 'पुष्टिमार्ग' के माध्यम से उपासना पर बल दिया।
2. सूफी मत के 'चिशती सिलसिला' के प्रसिद्ध संत निजामुद्दीन औलिया ने राज्य की राजनीति से पूर्णतः दूर रहने की नीति अपनाई और दिल्ली के सुल्तानों द्वारा दिए गए सभी राजकीय उपहारों एवं जागीर प्रस्तावों को सहर्ष स्वीकार कर लिया था।
3. पंद्रहवीं शताब्दी के संत कबीर ने किसी भी पारंपरिक संगठित धर्म या बाहरी कर्मकांड को स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल देते हुए हिंदू और इस्लाम दोनों धर्मों की कट्टरता तथा बाह्य आडंबरों का तीव्र खंडन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक-धार्मिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का विलय किया गया, जिससे पारंपरिक शासकों और उनके आश्रितों में गहरी असुरक्षा और आक्रोश की भावना उत्पन्न हुई।
2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (विशेषकर मुक्त व्यापार और एकतरफा शुल्क व्यवस्था) के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों का तीव्र पतन हुआ, जिससे बड़ी संख्या में कारीगर और दस्तकार बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने के लिए बाध्य हो गए।
3. वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के तहत पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार के अधिकार को हिंदू धर्म त्यागने या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्तियों के लिए भी सुरक्षित कर दिया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीय समाज ने धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने के षड्यंत्र के रूप में देखा।
4. सेना के भीतर लागू 'सामान्य सेवा उपनियम अधिनियम' (General Service Enlistment Act, 1856) के तहत भारतीय सिपाहियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समुद्र पार (काला पानी) जाकर भी सेवा देनी होगी, जिससे तत्कालीन सैनिकों की रूढ़िवादी धार्मिक मान्यताओं और जातियों की पवित्रता को ठेस पहुँची।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश शासनकाल में भारत में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस व्यवस्था को सर्वप्रथम मद्रास प्रेसीडेंसी के बारामहल जिले में कर्नल रीड और थॉमस मुनरो द्वारा प्रायोगिक तौर पर लागू किया गया था।
2. इस प्रणाली के अंतर्गत सरकार और प्रत्येक पंजीकृत किसान (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता होता था, जिससे बिचौलियों या जमींदारों की भूमिका समाप्त हो गई थी।
3. रयतवारी क्षेत्रों में भू-राजस्व की दरें अत्यंत न्यून और स्थाई थीं, जिन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा किसी भी परिस्थिति में कभी बढ़ाया नहीं जा सकता था।
4. इस व्यवस्था के तहत किसानों को अपनी भूमि को बेचने, गिरवी रखने या हस्तांतरित करने का पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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