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History of India
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ब्रिटिश शासनकाल में भारत में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस व्यवस्था को सर्वप्रथम मद्रास प्रेसीडेंसी के बारामहल जिले में कर्नल रीड और थॉमस मुनरो द्वारा प्रायोगिक तौर पर लागू किया गया था।
  2. 2. इस प्रणाली के अंतर्गत सरकार और प्रत्येक पंजीकृत किसान (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता होता था, जिससे बिचौलियों या जमींदारों की भूमिका समाप्त हो गई थी।
  3. 3. रयतवारी क्षेत्रों में भू-राजस्व की दरें अत्यंत न्यून और स्थाई थीं, जिन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा किसी भी परिस्थिति में कभी बढ़ाया नहीं जा सकता था।
  4. 4. इस व्यवस्था के तहत किसानों को अपनी भूमि को बेचने, गिरवी रखने या हस्तांतरित करने का पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

रयतवारी व्यवस्था के अंतर्गत ब्रिटिश भारत के कुल भू-क्षेत्र का लगभग 51 प्रतिशत भाग (मुख्य रूप से मद्रास, बंबई, असम और कूर्ग के कुछ हिस्से) आता था। इस प्रणाली की शुरुआत सबसे पहले मद्रास के बारामहल जिले में कर्नल एलेक्जेंडर रीड और थॉमस मुनरो द्वारा की गई थी। इस व्यवस्था में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, तथा किसानों को मालिकाना हक देकर भूमि को बेचने, बंधक रखने या हस्तांतरित करने की छूट दी गई थी, जिससे बिचौलियों (जमींदारों) का सफाया हो गया। हालांकि, कथन 3 गलत है क्योंकि रयतवारी व्यवस्था में भू-राजस्व की दरें बहुत अधिक थीं और वे स्थाई नहीं थीं; सरकार हर 20 से 30 वर्ष बाद सर्वेक्षण के पश्चात लगान की दरों में वृद्धि कर देती थी, जिससे किसान अत्यधिक उच्च कर और महाजनों के ऋणजाल में फंस गए थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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