BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
11 views

शाहजहाँ द्वारा निर्मित "मयूरासन" को 1739 ई. में कौन लूटकर ले गया था?

Detailed Explanation

नादिर शाह 1739 में दिल्ली पर आक्रमण के दौरान मयूरासन लूट ले गया था।
Share:

Related Questions

अकबर का शासन किस नाम से जाना गया? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के तुलनात्मक विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और बनारस में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' के अंतर्गत भू-राजस्व की दर को स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया था, जिससे कुल राजस्व का लगभग 89% हिस्सा ईस्ट इंडिया कंपनी को और 11% हिस्सा जमींदारों के पास प्रशासनिक व्यय व लाभ के रूप में रहता था। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी में विस्तृत रूप से लागू 'रयतवारी व्यवस्था' में भूमि का मालिकाना हक सीधे किसान (रयत) को दिया गया, किंतु अत्यधिक ऊँची राजस्व दरों और अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय भी कर में कोई विशेष छूट न मिलने के कारण किसानों को महाजनों (Sahukars) के पास अपनी भूमि गिरवी रखनी पड़ी। 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू 'महालवारी व्यवस्था' (जिसका प्रतिपादन मुख्य रूप से मैकेंजी द्वारा किया गया था) के अंतर्गत राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत कृषक स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या 'महाल' के आधार पर किया जाता था, और इसके संग्रहण की कानूनी जिम्मेदारी सामूहिक रूप से गांव के मुखिया (लंबरदार) या कृषक समुदाय को सौंपी जाती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1776 ई. में कलकत्ता काउंसिल और मराठों के बीच कौन सी संधि हुई जिसने "सूरत की संधि" को रद्द कर दिया था? महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके प्रारंभिक सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकठिया पद्धति' थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी। 2. खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल पूरी तरह बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली जारी रखने पर, गांधीजी ने किसानों को 'नो-रेंट' (लगान न दें) अभियान चलाने की सलाह दी थी। 3. वर्ष 1920 में प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान पहली बार देश भर में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई, जिसे रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 'निष्ठा की बर्बादी' (Waste of time/clothes) करार देते हुए इसकी तीखी आलोचना की थी। 4. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसा से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने बारदोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी, जिससे कई युवा नेताओं ने गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बैस मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक आक्रोश उत्पन्न किया। 2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खुले तौर पर विरोध में बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई। 3. बैरकपुर छावनी की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने संपूर्ण भारतीय सेना से एनफील्ड राइफल का प्रयोग हमेशा के लिए वापस ले लिया और सभी सैनिकों से लिखित रूप में माफी मांगकर स्थिति को शांत किया। 4. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के कुछ दिनों बाद ही रेजिमेंट के अन्य सिपाहियों ने भी उनका पूर्ण समर्थन करते हुए बैरकपुर के पूरे शस्त्रागार पर अधिकार कर लिया और अंग्रेजों को बंगाल से खदेड़ दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.