BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
7 views

महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके प्रारंभिक सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकठिया पद्धति' थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी।
  2. 2. खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल पूरी तरह बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली जारी रखने पर, गांधीजी ने किसानों को 'नो-रेंट' (लगान न दें) अभियान चलाने की सलाह दी थी।
  3. 3. वर्ष 1920 में प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान पहली बार देश भर में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई, जिसे रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 'निष्ठा की बर्बादी' (Waste of time/clothes) करार देते हुए इसकी तीखी आलोचना की थी।
  4. 4. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसा से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने बारदोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी, जिससे कई युवा नेताओं ने गहरी नाराजगी व्यक्त की थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। महात्मा गांधी के शुरुआती आंदोलनों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा तय की थी। चंपारण में तीनकठिया प्रथा के विरुद्ध संघर्ष उनकी पहली बड़ी राजनीतिक जीत थी। इसके विस्तृत ऐतिहासिक घटनाक्रम को समझने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। खेड़ा सत्याग्रह में किसानों की दयनीय स्थिति पर कर मुक्ति की मांग उठी, जबकि असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर टैगोर और गांधीजी के वैचारिक मतभेद भी सामने आए थे।
Share:

Related Questions

19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद और उपनिषदों की शिक्षाओं पर विशेष बल देते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद तथा सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर विरोध किया, परंतु उन्होंने पाश्चात्य आधुनिक शिक्षा और विज्ञान के प्रसार का विरोध करते हुए केवल पारंपरिक संस्कृत शिक्षा का समर्थन किया था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को 'अपौरुषेय' तथा ज्ञान का अचूक भंडार मानते हुए जन्मजात जाति व्यवस्था और बहुदेववाद को अस्वीकार किया। 3. वर्ष 1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' (जिसके प्रमुख नेताओं में आत्माराम पांडुरंग और महादेव गोविंद रानाडे शामिल थे) का मुख्य उद्देश्य धार्मिक सुधारों के साथ-साथ अंतरजातीय विवाह, स्त्री शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों को आगे बढ़ाना था। 4. स्वामी विवेकानंद द्वारा 1897 में स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने केवल धार्मिक और दार्शनिक पुनरुत्थान पर ध्यान केंद्रित किया, और इसने मानव सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानते हुए आधुनिक सामाजिक सेवा, शिक्षा प्रसार और राहत कार्यों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के प्रवेश और पुर्तगाली-ब्रिटिश संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहांगीर के दरबार में आने वाला प्रथम अंग्रेज दूत विलियम हॉकिंस था, जो 'हेक्टर' जहाज लेकर 1608 में सूरत पहुँचा था, किंतु पुर्तगालियों के तीव्र विरोध और शाही दरबार में उनके प्रभाव के कारण जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की अनुमति तुरंत प्रदान नहीं की थी। 2. वर्ष 1612 में स्वाली के युद्ध (Battle of Swally) में ब्रिटिश कमांडर थॉमस बेस्ट ने पुर्तगाली नौसेना को पराजित किया, जिससे प्रभावित होकर जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में अपनी पहली स्थायी फैक्ट्री खोलने का शाही फरमान जारी कर दिया। 3. पुर्तगालियों ने भारत में अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए 'कार्टाज' (Cartaz) प्रणाली लागू की थी, जिसके तहत अरब सागर और हिंद महासागर से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय और एशियाई जहाज को पुर्तगाली गवर्नरों से लाइसेंस लेना अनिवार्य था, और अक्साइज शुल्क के रूप में भारी कर चुकाना पड़ता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? दीवान-ए-खास में कौन जाता था? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही सैनिकों द्वारा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने और इस संघर्ष में उनकी भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 11 मई 1857 को मेरठ से पहुँचे विद्रोही सिपाहियों ने लाल किले में प्रवेश कर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस विद्रोह का औपचारिक और सर्वोच्च प्रतीक तथा 'शहिंशाह-ए-हिंदुस्तान' स्वीकार कर लिया था। 2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने इस पद को स्वीकार करने में प्रारंभिक हिचकिचाहट दिखाई थी, किंतु सम्राट के रूप में उन्होंने विद्रोही सैनिकों के वित्त पोषण, प्रशासनिक समन्वय और युद्ध की दीर्घकालिक सैन्य रणनीतियों का अत्यंत दृढ़ता से कुशल नेतृत्व किया था। 3. दिल्ली में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सैन्य कमांडर जॉन निकलसन के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने कड़ा संघर्ष किया, और सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया गया था। 4. अंग्रेजों द्वारा हुमायूं के मकबरे के पास ही बहादुर शाह जफर के दो बेटों (मिर्जा मुगल और मिर्जा खिजर सुल्तान) तथा पोते की निर्ममतापूर्वक हत्या कर उनके सिर काटकर सम्राट के सामने प्रेषित किए गए थे, और बाद में जफर को देश से निर्वासित कर रंगून भेज दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल काल में "वाकिया-नवीस":
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.