नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के अंतिम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) का गहन विश्लेषण करने पर, इस स्तर की तात्विक और दार्शनिक विशेषता के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले छठे और अंतिम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा अभिविन्यास' में व्यक्ति अमूर्त और सार्वभौमिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है। इस स्तर पर कानून और सामाजिक नियम तभी वैध माने जाते हैं जब वे न्याय और मानवाधिकारों पर आधारित हों; यदि कोई कानून मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है, तो व्यक्ति अपनी अंतरात्मा के उच्च नैतिक सिद्धांतों के आधार पर उसका विरोध करना अपना कर्तव्य समझता है। इस सिद्धांत के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional Level) के अंतिम चरण यानी 'विवेक और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) का गहन विश्लेषण करने पर, इस अवस्था की तात्विक और मनोवैज्ञानिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'रूढ़िगगत स्तर' (Conventional Morality) के द्वितीय चरण यानी 'अधिकार और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का अभिमुखीकरण' (Authority and Social Order Maintaining Orientation) का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई किशोर या वयस्क इस मान्यता से प्रेरित होकर कार्य करता है कि सामाजिक नियमों, कानूनों और कर्तव्यों का पालन करना समाज में सुव्यवस्थित व्यवस्था बनाए रखने और अराजकता को रोकने के लिए परम आवश्यक है, और कानून का उल्लंघन करना हर परिस्थिति में अनैतिक है; तो कोहलबर्ग के इस नैतिक विकास के प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगगत स्तर' (Post-conventional Morality) के अंतिम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिमुखीकरण' (Universal Ethical Principle Orientation) का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई परिपक्व व्यक्ति किसी सामाजिक कानून, संस्थागत नियम या वैधानिक आदेश का इस आधार पर सचेत रूप से उल्लंघन करता है कि वह नियम मानवाधिकारों, व्यक्तिगत अंतःकरण की स्वतंत्र गरिमा, न्याय और सार्वभौमिक समानता के बुनियादी सिद्धांतों के विरुद्ध है, तो कोहलबर्ग के इस सर्वोच्च नैतिक प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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