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Child Development
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'संवेदी-गामक अवस्था' (Sensorimotor Stage) की तात्विक गतिकी का गहन विश्लेषण करने पर, इस अवस्था के अंतिम चरण (लगभग 18 से 24 महीने की आयु) में 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) की पूर्ण प्राप्ति के साथ-साथ बालकों में किस अन्य महत्वपूर्ण मानसिक योग्यता का विकास होता है, जिसके माध्यम से वे किसी वस्तु या घटना की अनुपस्थिति में भी उसके मानसिक प्रतीकों या आंतरिक छवियों का उपयोग करके समस्याओं का समाधान खोजना शुरू कर देते हैं?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'संवेदी-गामक अवस्था' (जन्म से 2 वर्ष) का अंतिम चरण वह समय होता है जब बालक 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) की पूरी समझ विकसित कर लेता है और साथ ही 'मानसिक प्रतिनिधित्व' (Mental Representation) या प्रतीकात्मक विचार की क्षमता अर्जित करता है। इसके तहत बच्चा बाहरी वस्तुओं और घटनाओं के आंतरिक मानसिक प्रतीक बनाना शुरू कर देता है, जिससे प्रत्यक्ष अनुभव के बिना भी वह मानसिक रूप से समस्याओं के समाधान की कल्पना कर सकता है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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