विकास के सिद्धांत (Principles)
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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के अंतर्गत 'विकास की दिशा का सिद्धांत' (Principle of Directional Trend)—विशेष रूप से 'मस्तकोधोमुखी' (Cephalocaudal) और 'निकट-दूर' (Proximodistal) प्रवृत्तियों—तथा 'विकास की एकरूपता' और 'एकीकरण के सिद्धांत' (Principle of Integration) का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, यदि कोई बालक अपने शरीर के अंगों पर नियंत्रण स्थापित करने से पहले संपूर्ण शरीर की अनियंत्रित गतियां करता है और तत्पश्चात विशिष्ट अंगों व मांसपेशियों का एकीकृत उपयोग सीखता है, तो बाल विकास के इन मौलिक सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बाल विकास के सिद्धांतों के अंतर्गत 'विकास की दिशा का सिद्धांत' अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके दो प्रमुख आयाम हैं: पहला 'मस्तकोधोमुखी' (Cephalocaudal Sequence), जिसके अनुसार विकास सिर से शुरू होकर पैरों की दिशा में बढ़ता है (यानी सिर का विकास पहले होता है), और दूसरा 'निकट-दूर' (Proximodistal Sequence), जिसके अनुसार विकास शरीर के केंद्रीय भाग ( रीढ़ की हड्डी या धड़) से शुरू होकर बाहरी अंगों या सुदूर छोरों (हाथों और उंगलियों) की ओर अग्रसर होता है। इसके साथ ही, 'एकीकरण का सिद्धांत' यह बताता है कि बालक पहले संपूर्ण अंगों का और फिर अंगों के भागों का उपयोग करना सीखता है तथा बाद में उन सबको एकीकृत करता है। इस विषय की विस्तृत वैज्ञानिक अवधारणा के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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