BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Child Development
9 views

लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Pre-conventional Level) के दोनों चरणों—अर्थात 'सजा और आज्ञाकारिता अभिविन्यास' (Stage 1) और 'सापेक्षवादी या आत्म-रुचि अभिविन्यास' (Stage 2)—की तात्विक और संज्ञानात्मक-मनोवैज्ञानिक गतिकी का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इन दोनों चरणों के मध्य निहित मूलभूत अंतर और उनके नैतिक तर्कों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Pre-conventional Level) लगभग 9 वर्ष से कम आयु के बच्चों में पाया जाता है। इस स्तर के पहले चरण ('सजा और आज्ञाकारिता अभिविन्यास') में बच्चा नियमों का पालन केवल इसलिए करता है ताकि उसे दंड न मिले, यानी वह बाहरी सत्ता के नियंत्रण में होता है। इसके विपरीत, दूसरे चरण ('सापेक्षवादी या आत्म-रुचि अभिविन्यास') में बालक अपने व्यक्तिगत हितों, आवश्यकताओं को पूरा करने तथा 'यदि तुम मेरा भला करोगे, तो मैं तुम्हारा भला करूँगा' (Quid Pro Quo / Tit-for-Tat) की भावना से नैतिक निर्णय लेता है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Share:

Related Questions

अधिगम के मनोविज्ञान में, जब किसी जटिल कौशल या नए ज्ञान को सीखते समय 'अधिगम का पठार' (Plateau of Learning) उत्पन्न होता है, तो इसके वास्तविक मनोवैज्ञानिक कारणों—जैसे कि प्रेरणा में कमी, थकान, पुरानी आदतों का हस्तक्षेप या अनुचित शिक्षण विधि—और इस पठार को तोड़ने के उपायों का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? बाल विकास के अध्ययन के दौरान जब हम 'अभिवृद्धि' (Growth) और 'विकास' (Development) के संप्रत्ययों का सूक्ष्म तार्किक विश्लेषण करते हैं, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों के मध्य के अंतर्संबंध, प्रकृति और उनके आयामी स्वरूप को सर्वाधिक वैज्ञानिक और सटीक रूप से रेखांकित करता है? समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के शिक्षण-अधिगम को सुगम बनाने के लिए 'विशिष्ट शिक्षाशास्त्र' (Pedagogy) और 'विभेदीकृत अनुदेशन' (Differentiated Instruction) के तात्विक एवं व्यावहारिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, यदि एक शिक्षक कक्षा में बौद्धिक, शारीरिक और संवेदी रूप से भिन्न शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न पाठ्यचर्यात्मक रणनीतियों और बहु-संवेदी उपागमों (Multi-sensory Approaches) का उपयोग करता है, तो समावेशी शिक्षा के इस आधुनिक वैज्ञानिक प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? शिक्षण की 'परियोजना विधि' (Project Method) में छात्र को क्या भूमिका दी जाती है? यथार्थ : गिनने की क्षमता-फर्स्ट फॉरवर्ड को कहा जाता है।
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.