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History of India
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जहाँगीर के समय किस अंग्रेज व्यापारी ने सूरत में व्यापारिक कोठी स्थापित करने की अनुमति मांगी थी?

Detailed Explanation

विलियम हॉकिन्स ने जहाँगीर के दरबार में अनुमति मांगी थी।
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं—स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement), रयतवारी (Ryotwari) और महालवारी (Mahalwari)—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे पारंपरिक रूप से भूमि पर पारंपरिक अधिकार रखने वाले कृषकों को मात्र 'किरायेदार' (Tenant) बनाकर छोड़ दिया गया। 2. रयतवारी व्यवस्था मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में लागू की गई थी, जिसमें सरकार और कृषक (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था और राजस्व निर्धारण भूमि की उर्वरता के आधार पर लगभग 30 वर्षों के लिए निश्चित किया जाता था। 3. महालवारी व्यवस्था का प्रतिपादन मुख्य रूप से हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा किया गया था, जिसके तहत राजस्व वसूली के लिए पूरे गाँव या ग्राम समूह (महाल) को इकाई माना गया और इस व्यवस्था में मालगुजारी चुकाने की व्यक्तिगत एवं सामूहिक दोनों प्रकार की जिम्मेदारी होती थी। 4. इन तीनों प्रणालियों में बंगाल के स्थाई बंदोबस्त ने ग्रामीण ऋणग्रस्तता और पारंपरिक कृषि संरचना को सबसे कम प्रभावित किया, क्योंकि इसमें लगान की दर हमेशा के लिए निश्चित कर दी गई थी जिससे अकाल के समय भी किसानों को राहत मिलती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास में 'गदर पार्टी' और 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के वैचारिक और संगठनात्मक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सोहन सिंह भाकना और लाला हरदयाल द्वारा वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' ने अपने मुखपत्र 'गदर' के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का आह्वान किया था, जिसके पहले अंक का प्रकाशन उर्दू में हुआ था। 2. गदर पार्टी के संस्थापकों ने सैन फ्रांसिस्को में 'युगांतर आश्रम' को अपने क्रांतिकारी प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाया था, जहाँ से अमरीका और कनाडा के प्रवासी भारतीयों को भारत में ब्रिटिश शासन उखाड़ फेंकने के लिए प्रेरित किया जाता था। 3. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में पुनर्गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के घोषणापत्र 'द रिवोल्यूशनरी' का प्रारूप भगवती चरण बोहरा द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें समाजवाद को क्रांतिकारी आंदोलन का मुख्य लक्ष्य घोषित किया गया था। 4. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने का मुख्य उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था, बल्कि बहरी हो चुकी ब्रिटिश सरकार का ध्यान जनहित के असेंबली में लाए जा रहे दमनकारी विधेयकों (जैसे जन सुरक्षा बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल) की ओर आकर्षित करना था, और उन्होंने अपनी गिरफ्तारी का विरोध करते हुए अदालत में माफीनामा दाखिल किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष एवं राजनीतिक रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के शुरुआती नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी) का यह अटूट विश्वास था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है और वे अपनी मांगों के समर्थन के लिए 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' की संवैधानिक पद्धति में विश्वास रखते थे। 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के उपरांत गरमपंथी नेताओं (लाल, बाल और पाल) ने इस आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित न रखकर इसे संपूर्ण देश में 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' के व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में प्रसारित करने की मांग की, जबकि नरमपंथी इस आंदोलन को केवल बंगाल तक और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक ही सीमित रखना चाहते थे। 3. कलकत्ता अधिवेशन (1906) में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने के कारण कांग्रेस के बड़े विभाजन को अस्थायी रूप से टाल दिया गया, जहाँ पहली बार कांग्रेस के मंच से 'स्वराज' (Swaraj) को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया। 4. सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस के दोनों दलों के बीच अध्यक्ष पद के चयन को लेकर हुए तीव्र गतिरोध के कारण कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हो गया, जिसमें गरमपंथियों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाने का पुरजोर समर्थन किया जबकि नरमपंथियों ने लाला लाजपत राय को अध्यक्ष पद सौंपने की मांग की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण (1920 के दशक के उत्तरार्ध) में गठित 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) और उसके प्रमुख नेताओं—भगत सिंह तथा चन्द्रशेखर आज़ाद—के वैचारिक व संगठनात्मक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में हुई गुप्त बैठक में HSRA की स्थापना की गई थी, जिसमें भगवती चरण बोहरा द्वारा तैयार किए गए घोषणा पत्र 'द फिलॉसफी ऑफ बम' (The Philosophy of Bomb) को संगठन का आधिकारिक वैचारिक दस्तावेज बनाया गया था। 2. HSRA ने अपने शुरुआती क्रांतिकारी लक्ष्यों में पारंपरिक अराजकतावाद (Anarchism) और व्यक्तिगत आतंक के स्थान पर मार्क्सवादी-समाजवादी विचारधारा को अपनाया, जिसके तहत भगत सिंह ने यह स्पष्ट किया कि क्रांति का अर्थ केवल कत्ल या हिंसा नहीं, बल्कि व्यवस्था का आमूल-चूल परिवर्तन है। 3. सांडर्स हत्याकांड (1928) और असेंबली बम कांड (1929) के उपरांत पुलिस मुठभेड़ में चन्द्रशेखर आज़ाद की शहादत के बाद HSRA का केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह समाप्त हो गया और यह संगठन छोटे-छोटे क्षेत्रीय गुटों में विभाजित होकर राजनीतिक रूप से पूरी तरह निष्क्रिय हो गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास में महाजनपद काल और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में सोलह महाजनपदों की जो सूचियाँ मिलती हैं, उनमें कंबोज और गांधार ऐसे महाजनपद थे जो उत्तर-पथ के अंतर्गत आते थे तथा वहाँ उत्तरापथ व्यापार मार्ग का नियंत्रण होने के कारण उनका विशेष आर्थिक और सामरिक महत्व था। 2. मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष में इसकी भौगोलिक स्थिति का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था; इसकी प्रारंभिक राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) पाँच पहाड़ियों से घिरी एक प्राकृतिक रूप से सुरक्षित घाटी थी, जबकि बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा, सोन और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के जलमार्गों के माध्यम से संपूर्ण मध्य गंगा घाटी पर सामरिक नियंत्रण स्थापित करने में सक्षम हो गया। 3. हर्यंक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपनी साम्राज्यवादी और विस्तारवादी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति के साथ-साथ अवध के राजा चंड प्रद्योत के साथ आक्रामक सैन्य संघर्ष की नीति अपनाई और अंततः अवध को पूर्ण रूप से मगध में मिला लिया था। 4. महापद्मनंद, जिसे पुराणों में 'सर्वक्षत्र्रान्तक' (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकक्षत्र' कहा गया है, ने नंद वंश की नींव रखते हुए न केवल कलिंग और अस्मक जैसे क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की, बल्कि क्षत्रियों की राजनीतिक शक्ति का पूर्ण दमन कर मगध को एक विशाल साम्राज्य में परिवर्तित कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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