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Child Development
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अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) के नैदानिक वर्गीकरण का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, जब किसी शिक्षार्थी को गणितीय गणनाओं, संख्याओं के स्थानिक संगठन, गणितीय प्रतीकों (चिन्हों) को पहचानने तथा मौखिक समस्याओं को समीकरणों में बदलने में गंभीर और सतत कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जबकि उसकी सामान्य बुद्धि लब्धि (IQ) और पठन-लेखन क्षमता पूरी तरह सामान्य होती है, तो यह विशिष्ट तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक विकार निम्नलिखित में से किस श्रेणी के अंतर्गत आता है और इसके मुख्य नैदानिक लक्षण क्या हैं?

Detailed Explanation

डिसकैल्कुलिया (Dyscalculia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता है जो व्यक्ति की गणितीय गणनाओं को सीखने और करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इस विकार से ग्रसित बालकों को संख्याबोध (Number Sense), अंकों के मान, गणितीय सूत्रों को याद रखने और तार्किक समस्याओं को हल करने में अत्यधिक कठिनाई होती है। इसके बारे में अधिक विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के संदर्भ में, जॉन डीवी के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत, जॉन डेवी की प्रायोगिक प्रयोगशाला शालाओं, तथा बाल-केंद्रित शिक्षा के तात्विक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, कक्षा-कक्ष की शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है? सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास के सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों की तात्विक और गत्यात्मक संरचना का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई बाल्यावस्था के उत्तरार्ध में लगभग 6 से 12 वर्ष की आयु के दौरान अपनी ऊर्जा या कामेच्छा (Libido) को दमित करके बौद्धिक, सामाजिक और शारीरिक गतिविधियों—जैसे कि खेलकूद, विद्यालयी शिक्षा और समलैंगिक सहपाठियों के साथ मित्रता—में संलग्न करता है, तथा इस कालखंड में लैंगिक ऊर्जा का कोई नया मुखर उद्दीपन नहीं होता है, तो फ्रायड के इस मनोविश्लेषण ढांचे के अनुसार बालक के विकास की यह विशिष्ट अवस्था किस रूप में पहचानी जाती है? समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मूल दर्शन और 'निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009)' के प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में, गंभीर और बहु-दिव्यांगता (Multiple Disabilities) वाले बच्चों को सामान्य कक्षा-कक्ष में शामिल करने के लिए शिक्षकों द्वारा अपनाई जाने वाली 'विभेदित शिक्षण' (Differentiated Instruction) और 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) की रणनीतियों का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन पद्धतियों के वास्तविक और वैज्ञानिक उद्देश्य को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? शिक्षण में 'निदानात्मक परीक्षण' (Diagnostic Test) का उद्देश्य क्या है? शिक्षण विधियों के व्यावहारिक अनुप्रयोग और कक्षा-कक्ष की तात्कालिक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान के लिए अपनाई जाने वाली 'समस्या-समाधान विधि' (Problem-Solving Method) तथा जॉन डीवी द्वारा प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के चरणों का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस विधि के तात्विक और वैज्ञानिक स्वरूप को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
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