समावेशी शिक्षा
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मूल दर्शन और 'निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009)' के प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में, गंभीर और बहु-दिव्यांगता (Multiple Disabilities) वाले बच्चों को सामान्य कक्षा-कक्ष में शामिल करने के लिए शिक्षकों द्वारा अपनाई जाने वाली 'विभेदित शिक्षण' (Differentiated Instruction) और 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) की रणनीतियों का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन पद्धतियों के वास्तविक और वैज्ञानिक उद्देश्य को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य किसी भी बालक को उसकी शारीरिक, मानसिक या सामाजिक अक्षमता के आधार पर बहिष्कृत न करना बल्कि सामान्य विद्यालयों की संरचना और शिक्षण विधियों में इस प्रकार परिवर्तन करना है कि वे प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL) और विभेदित शिक्षण इसी दर्शन पर आधारित हैं। इस संबंध में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत, 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (Children with Special Needs) के शिक्षण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए 'विशिष्ट शिक्षा' (Special Education), 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) और 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के बीच के तात्विक और संरचनात्मक अंतरों का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों प्रणालियों के विकास और उनके व्यावहारिक स्वरूप को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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