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History of India
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नाना साहेब (बालाजी बाजीराव) ने अपनी राजधानी कहाँ स्थानांतरित की थी?

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बालाजी बाजीराव ने राजधानी पुणे स्थानांतरित कर दी थी।
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तालिकोटा युद्ध के बाद राम राय के भाई तिरुमल ने किस नए राजवंश की स्थापना की थी? वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसके मूल्यांकन के संदर्भ में विभिन्न इतिहासकारों एवं विचारकों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इतिहासकार एस.एन. सेन ने अपनी अधिकृत सरकारी इतिहास पुस्तक 'एटीन फिफ्टी सेवन' (1857) में यह स्पष्ट निष्कर्ष निकाला था कि 'यह विद्रोह अपनी शुरुआत में धर्म के संघर्ष के रूप में शुरू हुआ था और इसका अंत स्वतंत्रता संग्राम के रूप में हुआ।' 2. प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने 1857 के विद्रोह को 'एक पूर्णतः देशभक्तिपूर्ण और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम' की संज्ञा दी थी, जिसमें भारतीय जनता और सैनिकों ने मिलकर विदेशी शासन को हमेशा के लिए उखाड़ फेंकने का संगठित प्रयास किया था। 3. बेंजामिन डिजरायली (Benjamin Disraeli) ने ब्रिटिश संसद में यह स्वीकार किया था कि 1857 की घटना केवल एक साधारण सैनिक विद्रोह (Sepoy Mutiny) मात्र नहीं थी, बल्कि यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? दक्षिण भारत के राजवंशों और हर्षवर्द्धन के काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासनकाल में 'मत्तविलासं प्रहसन' नामक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक की रचना की थी, और आरंभ में जैन धर्म के अनुयायी होने के बाद संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर उन्होंने शैव धर्म अपना लिया था। 2. चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय की ऐहोल प्रशस्ति के अनुसार, उसने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन को पराजित किया था, जिससे हर्ष का दक्षिण भारत की ओर विस्तार का सपना अधूरा रह गया। इस प्रशस्ति की रचना जैन कवि रवि कीर्ति ने की थी। 3. चोल प्रशासन के संदर्भ में, 'वरियम' (Variyam) उन वार्षिक समितियों को कहा जाता था जो सिंचाई, उद्यान, स्वर्ण और न्याय जैसे विभिन्न प्रशासनिक विभागों का संचालन करती थीं, और इन समितियों के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (Kudavolai) नामक पर्ची-डालकर चुनाव की अनूठी पद्धति का पालन किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू की गई 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया था, जिससे भारतीय शासक वर्ग और उनके आश्रितों में गहरा राजनीतिक असंतोष व्याप्त हो गया। 2. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा यह प्रावधान किया गया कि हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने उनके धर्म और संस्कृति पर सीधा प्रहार माना। 3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (विशेषकर मुक्त व्यापार और औद्योगिक क्रांति के प्रभाव) के परिणामस्वरूप भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों का भारी पतन हुआ, जिससे कारीगर और शिल्पकार बेरोजगार हो गए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया। 4. 1856 में लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत भारतीय सैनिकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समुद्र पार बर्मा या अन्य विदेशी क्षेत्रों में भी सेवा देनी होगी, जिसे उस समय के धार्मिक विश्वासों के अनुसार जातिभ्रष्ट होने का कारण माना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत हुए स्वदेशी आंदोलन के वैचारिक आयाम, प्रसार एवं उसकी विभिन्न प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय के विरोध में 16 अक्टूबर 1905 को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जिस दौरान रवींद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर 'राखी बांधी' और बंगाल की अटूट एकता का संदेश देने के लिए 'आमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया, जो आगे चलकर बांग्लादेश का राष्ट्रगान बना। 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आंध्र प्रदेश के डेल्टा क्षेत्रों में इस आंदोलन को 'वंदे मातरम् आंदोलन' के नाम से जाना गया, जहाँ विशाखापत्तनम और मसूलीपट्टनम में इसका नेतृत्व स्थानीय बुद्धिजीवियों द्वारा किया गया, जबकि मद्रास प्रेसीडेंसी में चिदंबरम पिल्लै ने तूतीकोरिन में स्वदेशी नेविगेशन कंपनी की स्थापना कर ब्रिटिश जहाजरानी को खुली चुनौती दी। 3. स्वदेशी आंदोलन की सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतिक्रिया के तहत बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा की तर्ज पर कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना वर्ष 1906 में की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक और तकनीकी शिक्षा को ब्रिटिश नियंत्रण से मुक्त कर स्वदेशी प्रणाली के तहत संचालित करना था, किंतु इसके पहले अध्यक्ष के रूप में गोपाल कृष्ण गोखले को चुना गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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