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History of India
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मराठों ने किस मुगल सम्राट के साथ 1752 ई. में रक्षात्मक संधि की थी, जिसके बदले उन्हें चौथ का अधिकार मिला?

Detailed Explanation

यह संधि अहमद शाह मुगल सम्राट के साथ हुई थी।
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→ कृष्णदेव राय ने "आमुक्तमाल्यद" नामक ग्रंथ की रचना किस भाषा में की थी? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान उत्तर भारत के प्रमुख केंद्रों — फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद — में विद्रोह के संचालन और इसके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें उनके अदम्य साहस और प्रचार शैली के कारण 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता था, और ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल ने इस क्षेत्र में अत्यधिक संघर्ष के बाद विद्रोह को कुचला था। 2. रोहिलखंड क्षेत्र के अंतर्गत बरेली में विद्रोह की बागडोर खान बहादुर खान ने संभाली थी, जिन्होंने रुहेला सरदारों का समर्थन प्राप्त कर अपनी स्वतंत्र सरकार बनाई थी, तथा बाद में ब्रिटिश सेनापति कॉलिन कैंपबेल ने कड़े संघर्ष के बाद बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया था। 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, और इस क्षेत्र में हुए विद्रोह तथा जन-आक्रोश का दमन ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील (James Neill) द्वारा अत्यधिक निर्दयता और क्रूरता के साथ किया गया था। 4. इलाहाबाद में ब्रिटिश सत्ता पुनः स्थापित होने के पश्चात मौलवी लियाकत अली को अंग्रेजों द्वारा तुरंत गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी, जिससे इस क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम का पूरी तरह से अंत हो गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक मूल्यांकन के संदर्भ में, विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध कथनों पर विचार कीजिए: 1. वी. डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस महान विद्रोह को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की संज्ञा दी है। 2. डॉ. आर. सी. मजूमदार का यह प्रसिद्ध मत था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।'- 3. सर जॉन लॉरेन्स और सी. ई. आर. सी. सी. रीस के अनुसार यह विद्रोह मूल रूप से केवल 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय मुक्ति न होकर सैनिकों का पेशेवर असंतोष था। 4. टी. आर. होम्स का यह कथन था कि यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → 1750 ई. में हुई किस संधि के बाद पेशवा मराठा साम्राज्य का वास्तविक और वंशानुगत शासक बन गया? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतें का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय शासक वर्ग और शाही परिवारों में गहरी असुरक्षा और आक्रोश पैदा हुआ। 2. ब्रिटिश सरकार द्वारा 1856 में 'धार्मिक असुविधा अधिनियम' (Religious Disabilities Act) पारित किया गया, जिसने हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्तियों को उनके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित कर दिया, जिससे पारंपरिक भारतीय समाज में भारी धार्मिक असंतोष फैला। 3. ब्रिटिश प्रशासनिक नीतियों और भू-राजस्व प्रणालियों के कारण पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्प उद्योग तबाह हो गए, जिससे ग्रामीण कर्जदारी बढ़ी और किसानों तथा कारीगरों का यह आक्रोश 1857 के विद्रोह में सैनिकों के रूप में प्रकट हुआ। 4. सेना के भीतर लागू किए जाने वाले नियमों, जैसे वर्ष 1856 का 'सामान्य सेवा उपनयन अधिनियम' (General Service Enlistment Act) जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार ब्रिटिश सीमाओं से बाहर भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया, ने उच्च जातीय हिंदू सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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