विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Children with Special Needs) के प्रभावी समावेशन के लिए 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के निम्नलिखित में से किस सिद्धांत के अंतर्गत शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) और पाठ्यचर्या में ऐसे बहुविध वैकल्पिक उपाय प्रदान किए जाते हैं जो संवेदी अक्षमता वाले बालकों (जैसे दृष्टिबाधित या श्रवणबाधित) के लिए सूचना प्राप्ति को सुगम बनाते हैं?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा में 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (UDL) के तीन मुख्य सिद्धांतों में से 'प्रतिनिधित्व के बहुविध साधन' (Multiple Means of Representation) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ज्ञान और सूचना विभिन्न माध्यमों से प्रस्तुत की जाए ताकि विभिन्न प्रकार की विशिष्ट आवश्यकताओं (जैसे दृश्य, श्रवण या पठन अक्षमता) वाले बच्चे अपनी अनूठी अधिगम शैलियों और क्षमताओं के अनुसार सूचना को आसानी से समझ सकें। इस संदर्भ में विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार समावेशी कक्षाएं प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान करते हुए अधिगम वातावरण का निर्माण करती हैं।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मूल दर्शन के अंतर्गत, जब एक शिक्षक अपनी कक्षा में 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' (Autism Spectrum Disorder - ASD) से पीड़ित छात्र को शामिल करता है, तो उस छात्र की विशिष्ट सामाजिक-संज्ञानात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी कक्षा-कक्षीय रणनीति सबसे अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक मानी जाएगी?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) और 'सार्वभौमिक अभिकल्प फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तात्विक और प्रायोगिक स्वरूप का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों अवधारणाओं के मध्य के अंतर्संबंध तथा कक्षा-कक्षीय क्रियान्वयन को सर्वाधिक सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Children with Special Needs - CWSN) के संदर्भ में 'विशेष शिक्षा' (Special Education), 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) और 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के दार्शनिक, विधिक और संरचनात्मक विकास का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय प्रणाली ऐसी व्यवस्था का निर्माण करती है जहाँ सामान्य विद्यालयों के कछिकक्षीय वातावरण, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों और भौतिक अवसंरचना में इस प्रकार का मूलभूत रूपांतरण किया जाता है कि विभिन्न प्रकार की अक्षमताओं (शारीरिक, मानसिक, संवेदी या सामाजिक) से ग्रसित बच्चे और सामान्य बच्चे बिना किसी अलगाव के एक ही छत के नीचे सह-अधिगम करते हैं, तो इस आधुनिक समावेशी प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, जब एक विशिष्ट आवश्यकता वाला बच्चा (जैसे कि श्रवण बाधित या दृष्टि बाधित शिक्षार्थी) सामान्य कक्षा-कक्ष में अन्य बालकों के साथ अधिगम प्राप्त करता है, तो 'भेदभाव रहित वातावरण' और 'सुलभता' (Accessibility) सुनिश्चित करने के लिए 'अनुकूलित पाठ्यचर्या' (Adapted Curriculum) और 'सहायक तकनीक' (Assistive Technology) का उपयोग किया जाता है। इस परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन समावेशी शिक्षा के मूल तात्विक और दार्शनिक दृष्टिकोण को सर्वाधिक सटीक रूप से अभिव्यक्त करता है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, निशक्तजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act 2016) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Children with Special Needs) की श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों के लिए 'बेंचमार्क विकलांगता' (Benchmark Disability) का निर्धारण करने हेतु न्यूनतम कितने प्रतिशत विकलांगता (Disability) का होना अनिवार्य कानूनी रूप से निर्धारित किया गया है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत, जब कक्षा में दृष्टिबाधित (Visually Impaired) छात्रों के समावेशन के लिए स्पर्शनीय मानचित्र (Tactile Maps), ब्रेल लिपि (Braille), और श्रव्य सामग्रियां (Audio Materials) का उपयोग किया जाता है, तो यह शिक्षण अधिगम प्रक्रिया निम्नलिखित में से किस मुख्य शैक्षिक और मनोवैज्ञानिक अवधारणा का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है?
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बिहार सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में चलाई जा रही प्रमुख योजनाओं तथा उनके क्रियान्वयन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर स्नातक की डिग्री प्राप्त करने तक कुल 50,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता विभिन्न चरणों में दी जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकना, बाल विवाह पर अंकुश लगाना और उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना है।
2. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए शुरू की गई 'मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना' (CMDHS) के तहत सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटल रखरखाव और ऑनलाइन परामर्श सुनिश्चित किया जा सके।
3. शिक्षा विभाग द्वारा संचालित 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र 4 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर, और महिलाओं, दिव्यांगों तथा ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए केवल 1 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
4. राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए 'बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा योजना' के तहत 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' के साथ समन्वय करके योग्य परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में चलाई जा रही प्रमुख योजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर स्नातक की डिग्री प्राप्त करने तक कुल 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता विभिन्न चरणों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से प्रदान की जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य बाल विवाह रोकना और उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना है।
2. स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए शुरू की गई 'मुख्यमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य योजना' के तहत राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों को डिजिटल रूप से जोड़ने और मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सुव्यवस्थित ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करने का प्रावधान किया गया है।
3. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र 4% साधारण ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% ही निर्धारित की गई है।
4. वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने वाली 'मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना' के अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी वृद्धों को बिना किसी आय सीमा के 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की मासिक पेंशन सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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