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History of India
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किस मराठा सरदार ने 1794 ई. में अपनी मृत्यु तक उत्तर भारत में मराठा प्रभाव को बनाए रखा और मुग़ल सम्राट को संरक्षण दिया?

Detailed Explanation

महादजी सिंधिया ने उत्तर भारत में मराठा शक्ति को सुदृढ़ किया था।
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास तथा उनकी मान्यताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के मध्य मार्ग (मझिम प्रतिपदा) के विपरीत, जैन धर्म ने शरीर को कष्ट देने और अत्यधिक कायाक्लेश (तपस्या) पर विशेष बल दिया, क्योंकि महावीर स्वामी का मानना था कि कर्मों के विनाश और संचित कर्मों से मुक्ति के लिए घोर तपस्या ही एकमात्र साधन है। 2. बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों ही वेदों की प्रमाणिकता और वैदिक यज्ञों की कर्मकांडीय व्यवस्था को अस्वीकार करते हैं, किंतु आत्मा के अस्तित्व के प्रश्न पर दोनों में मौलिक मतभेद है क्योंकि बौद्ध धर्म 'अनित्यवादी' होने के कारण आत्मा (पुद्गल या जीव) के शाश्वत अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता, जबकि जैन धर्म प्रत्येक जीव में 'जीव' (आत्मा) की अनंतता और उसकी पवित्रता को स्वीकार करता है। 3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए महाव्रतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह) के कठोर पालन पर जोर दिया गया है, जबकि बौद्ध धर्म ने अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से निर्माण प्राप्ति का उपदेश दिया है, जिसमें से प्रथम तीन मार्ग नैतिक आचरण (शीश) से संबंधित हैं। 4. बौद्ध धर्म की प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में महाकस्सप की अध्यक्षता में अजातशत्रु के शासनकाल में हुई थी, जबकि जैन धर्म की प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप जैन धर्म श्वेतांबर और दिगंबर दो शाखाओं में विभाजित हो गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी संस्थागत परंपराओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के विपरीत, जैन धर्म ने आत्मा (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार किया है और इसके अनुसार प्रत्येक वस्तु, यहाँ तक कि पत्थरों, पानी और पौधों में भी जीव का वास होता है, जबकि बुद्ध ने 'अनात्मवाद' (Anatta) का प्रतिपादन करते हुए किसी भी स्थायी शाश्वत आत्मा के अस्तित्व से इनकार किया था। 2. महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित जैन धर्म के 'पंच महाव्रतों' में पार्श्वनाथ द्वारा जोड़े गए चार व्रतों (सत्य, अहिंसा, अस्तेय और अपरिग्रह) में पाँचवें व्रत के रूप में 'ब्रह्मचर्य' को स्वयं महावीर ने जोड़ा था। 3. बौद्ध संघ की सदस्यता ग्रहण करने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, और संघ में प्रवेश पाने के लिए किसी भी व्यक्ति को राजा या अपने ऋणदाताओं की अनुमति लेना अनिवार्य नहीं था। 4. जैन संघ में उपासकों के लिए त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) का मार्ग अनिवार्य माना गया है, और बौद्ध धर्म की तरह ही जैन धर्म ने भी वेदों की प्रामाणिकता तथा वर्ण व्यवस्था के जन्मगत विभाजन को पूरी तरह से स्वीकार किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालने वाले नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब (जिन्हें पेशवा बाजीराव द्वितीय का दत्तक पुत्र माना जाता था) ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया, और ब्रिटिश पेंशन बंद किए जाने तथा डलहौजी की नीतियों के विरुद्ध अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा खोला। 2. तात्या टोपे, जो नाना साहब के अत्यंत विश्वस्त और कुशल सैन्य कमांडर थे, ने कानपुर की पराजय के बाद ग्वालियर जाकर सिंधिया सेना को अपने पक्ष में किया और बाद में मध्य भारत में रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध छापामार युद्ध का सफल नेतृत्व किया। 3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और वकील थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर ब्रिटिश संसद के समक्ष पेशवा की रुकी हुई पेंशन और अधिकारों के समर्थन में कानूनी पैरवी की थी, तथा बाद में कानपुर में विद्रोह की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। 4. कानपुर में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश जनरल नील (General James Neil) और बाद में सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोह का दमन किया, जिसके तहत तात्या टोपे को युद्ध के मैदान में ही अंग्रेजों द्वारा मार गिराया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मौर्योत्तर काल तथा गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों ने सीसे (Lead) और प्रोटीन के सिक्कों का मोठ्या पैमाने पर प्रचलन किया, तथा उनके अभिलेखों में भूमि अनुदान (Brahmanas and Buddhist monks) देने की प्रथा का सबसे पहला पुरातात्विक साक्ष्य मिलता है। 2. गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त के 'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ लेख), जिसकी रचना उसके संधि विग्रहिक हरिसेंण ने की थी, में आर्यावर्त के नौ और दक्षिण भारत के बारह राजाओं को पराजित करने का उल्लेख मिलता है। 3. गुप्तकाल में सुदूर दक्षिण के साथ व्यापारिक गतिविधियों के क्षीण होने के बावजूद, रोम के साथ व्यापार में अत्यधिक वृद्धि हुई और गुप्त शासकों ने रोमन सम्राटों की तर्ज पर सबसे शुद्ध और भारी मात्रा में स्वर्ण सिक्के ('दिनार') जारी किए। 4. फाह्यान (Fa-Hien), जो चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था, ने अपने विवरण में मध्य देश (गंगा घाटी) की समृद्धि, शाकाहार की प्रधानता तथा दंड विधान की कठोरता (फांसी और अंग-भंग) का विस्तार से उल्लेख किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगलकालीन वास्तुकला और उसके विशिष्ट लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हुमायूं का मकबरा भारत में पहली बार चारबाग शैली का पूर्ण प्रयोग और सफेद संगमरमर से निर्मित विशाल दोहरे गुंबद (Double Dome) वाला पहला मकबरा था, जिसका निर्माण उसकी विधवा हाजी बेगम की देखरेख में फारसी वास्तुकार मिर्जा गियास द्वारा किया गया था। 2. शाहजहां के शासनकाल को मुगल वास्तुकला का 'स्वर्णकाल' कहा जाता है, जिसके दौरान लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर शुद्ध सफेद संगमरमर का अत्यधिक प्रयोग शुरू हुआ, तथा वास्तुकला में 'पित्रा दूरा' (Pietra Dura - संगमरमर पर मूल्यवान रत्नों की जड़ाई कला) का उत्कृष्ट प्रदर्शन ताजमहल और आगरा के दीवान-ए-आम में देखने को मिलता है। 3. जहांगीर के काल में वास्तुकला में मकबरों के निर्माण से अधिक सुंदर उद्यानों और कलात्मक अलंकरणों को प्राथमिकता मिली, जिसका सबसे सुंदर उदाहरण लाहौर का शालीमार बाग और नूरजहां द्वारा अपने पिता इत्माद-उद-दौला का संगमरमर से निर्मित मकबरा है, जो पूरी तरह पित्रा दूरा शैली से सुसज्जित है। 4. औरंगजेब के शासनकाल में विलासितापूर्ण वास्तुकला को राजकीय प्रोत्साहन मिलना बंद हो गया, किंतु उसकी अपनी पत्नी राबिया-उद-दौरानी (दिलरस बानो बेगम) की स्मृति में औरंगाबाद में निर्मित 'बीबी का मकबरा' (जिसे 'दक्खिन का ताज' भी कहा जाता है) ताजमहल की नकल के रूप में संगमरमर और प्लास्टर दोनों के मिश्रण से बनवाया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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