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History of India
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तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-1818) का तात्कालिक कारण क्या था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पिंडारियों के दमन के बहाने मराठा शक्ति को समाप्त करना मुख्य कारण था।
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) प्रणाली को लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया और कुल लगaन का 10/11 भाग ब्रिटिश सरकार को तथा 1/1 भाग जमींदारों को अपने प्रशासनिक व्यय के लिए रखने की अनुमति दी गई।
2. रयतवारी व्यवस्था मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसिडेंसी में लागू की गई थी, जहाँ किसानों (रयतों) को भूमि का मालिक माना गया और सरकार के साथ उनका सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, जिसमें लगान की दरें पूरी तरह स्थाई थीं और कभी संशोधित नहीं की जाती थीं।
3. महालवारी व्यवस्था को उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसमें भू-राजस्व निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसानों के स्थान पर पूरे गाँव (महाल) को इकाई माना गया और सामूहिक रूप से गाँव के मुखिया या लंबरदार को राजस्व चुकाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारत का पारंपरिक कृषि ढांचा छिन्न-भिन्न हो गया, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक कर का बोझ बढ़ा, और कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण होने के बावजूद किसानों की क्रय शक्ति में भारी गिरावट आई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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किस सुल्तान ने दासों की देखभाल के लिए एक अलग विभाग "दीवान-ए-बंदगान" की स्थापना की थी?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपद' और उनके भौगोलिक विस्तार तथा राजधानियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अंग - राजधानी: चंपा (वर्तमान मुंगेर और भागलपुर क्षेत्र)
2. वत्स - राजधानी: कौशाम्बी (वर्तमान इलाहाबाद के समीप)
3. मल्ल - राजधानी: कुशीनगर एवं पावा (वर्तमान देवरिया और गोरखपुर क्षेत्र)
4. अस्मक - राजधानी: पोटली या पोतन (गोदावरी नदी के तट पर स्थित एकमात्र महाजनपद)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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खिलजी वंश का वह सुल्तान कौन था जिसने स्वयं को "खलीफा" घोषित कर दिया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे द्वारा संचालित सैन्य अभियानों तथा उनके अंतिम संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झाँसी की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ किले की रक्षा की और तात्या टोपे के नेतृत्व में बेतवा नदी के तट पर पहुँची विद्रोही सेना द्वारा अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी गई, किंतु तात्या टोपे की पराजय के पश्चात रानी को झाँसी छोड़नी पड़ी।
2. झाँसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में एक संयुक्त मोर्चा बनाया, और कालपी के युद्ध में पराजित होने के बाद वे ग्वालियर की ओर बढ़े, जहाँ ग्वालियर के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया ने अंग्रेजों का पक्ष लिया, किंतु ग्वालियर के सैनिकों ने विद्रोहियों का साथ दिया जिससे ग्वालियर पर विद्रोहियों का अधिकार हो गया।
3. ग्वालियर पर अधिकार करने के पश्चात तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने नाना साहब को पेशवा घोषित कर दिया तथा ग्वालियर के किले को अपना सैन्य केंद्र बनाया, जहाँ 18 जून 1858 को सर ह्यूरोज की सेना के साथ हुए निर्णायक युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. ग्वालियर के पतन के उपरांत तात्या टोपे ने मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में प्रवेश कर छापामार (गुरिल्ला) युद्ध की नीति अपनाई, और अंततः नरवर के एक स्थानीय जागीरदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर शिवपुरी में उन्हें फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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