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History of India
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खिलजी वंश का वह सुल्तान कौन था जिसने स्वयं को "खलीफा" घोषित कर दिया था?

Detailed Explanation

मुबारक खिलजी ने खलीफा घोषित किया था।
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वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक क्षेत्र में डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी के साथ-साथ अवध का विलय भी कुशासन (Misgovernance) के आधार पर 1856 में कर लिया गया था, जिससे अवध के सैनिकों और नवाब के आश्रितों में తీవ్ర असंतोष उत्पन्न हुआ। 2. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के अंतर्गत लॉर्ड विलियम बेंटिंक द्वारा 1829 में सती प्रथा का निषेध और 1856 में 'हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' का पारित होना रूढ़िवादी भारतीय समाज द्वारा उनकी धार्मिक मान्यताओं में सीधा हस्तक्षेप माना गया। 3. 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act, 1850) के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी हिन्दुओं ने ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाला षड्यंत्र समझा। 4. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की मुक्त व्यापार नीति और भू-राजस्व व्यवस्थाओं (जैसे स्थायी बंदोबस्त और रयतवारी) के कारण पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योगों का पतन हुआ तथा किसानों पर भारी कर का बोझ पड़ा, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली तथा ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1615 में भारत आए ब्रिटिश राजदूत सर थॉमस रो ने मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार से सूरत के अतिरिक्त आगरा, अहमदाबाद और ब्रोच (भड़ौच) जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्रों में भी अंग्रेजों को कारखाने स्थापित करने के लिए शाही फरमान प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी। 2. पुर्तगाली गवर्नर नीनो दा कुन्हा ने वर्ष 1530 में पुर्तगाली भारत की राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया था, और इसी के साथ पुर्तगालियों ने हुगली और बंगाल के अन्य क्षेत्रों में अपने व्यापारिक प्रभाव का विस्तार करना शुरू किया था। 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में अपनी प्रारंभिक व्यापारिक गतिविधियों को सुरक्षित रखने के लिए वर्ष 1622 में फारसी सेना के साथ मिलकर फारस की खाड़ी के सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होरमुज बंदरगाह' को पुर्तगालियों से छीनने में सफलता मिली थी। 4. फ्राँसोवा कैरॉन ने वर्ष 1668 में मुगल बादशाह औरंगजेब से अधिकार पत्र प्राप्त कर मसूलीपट्टम में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले कारखाने की स्थापना की थी, जिसे बाद में सूरत में भी अपनी दूसरी व्यावसायिक बस्ती स्थापित करने का अवसर मिला। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के प्रारंभिक आंदोलनों के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकटिया' प्रणाली थोपी गई थी, जिसके अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के कुल क्षेत्रफल के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी। 2. चंपारण सत्याग्रह के दौरान सरकार द्वारा गठित जाँच समिति के सदस्यों में महात्मा गांधी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, जिसने इस कुप्रथा को समाप्त करने की आधिकारिक संस्तुति दी थी। 3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान जब फसल का उत्पादन सामान्य वर्ष के एक-चौथाई (25%) से भी कम रह गया था, तब राजस्व संहिता के नियमानुसार किसानों का लगान पूरी तरह माफ किया जाना चाहिए था, किंतु ब्रिटिश प्रशासन ने इसे मानने से इनकार कर दिया था। 4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान वल्लभभाई पटेल, इंदुलाल याग्निक और महादेव देसाई जैसे नेताओं ने गांधीजी का खुलकर समर्थन किया था, और इसी आंदोलन की सफलता से प्रभावित होकर वल्लभभाई पटेल ने वकालत का पेशा हमेशा के लिए छोड़ दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल शासन में "काजी": मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रणाली और उसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मनसबदारी व्यवस्था को औपचारिक रूप से मुगल सम्राट अकबर द्वारा अपने शासनकाल के 11वें वर्ष में शुरू किया गया था, जिसमें 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और पद की स्थिति को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था। 2. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'सिंहमहस्पा' (दो-अस्पा और सिंह-अस्पा) जैसी नई उप-प्रणालियों का समावेश किया गया, जिसके तहत मनसबदारों को बिना अपने 'जात' पद को बढ़ाए अतिरिक्त घुड़सवार सैनिकों की टुकड़ी रखने की अनुमति दी जाती थी। 3. जहांगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में एक नया परिवर्तन करते हुए 'दु-अस्पा सिह-अस्पा' प्रणाली की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत कुछ चयनित मनसबदारों को 'जात' पद में बिना किसी वृद्धि के अपने 'सवार' पदों की संख्या को दोगुना करने का अधिकार दिया गया था। 4. औरंगजेब के शासनकाल के उत्तरार्ध में जागीरों की भारी कमी ('बे-जागीरी') और मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण उत्पन्न प्रशासनिक संकट को 'मशरूत' (सशर्त पद) प्रणाली द्वारा हल करने का प्रयास किया गया, जिसमें अधिकारियों को उनके मूल वेतन से कम पर नियुक्त किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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