मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद
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अब्राहम मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की बुनियादी शारीरिक आवश्यकताएं (जैसे भोजन, पानी) और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं पूरी हो चुकी हैं, तो पदानुक्रम के अगले चरण में वह मुख्य रूप से किस मनोवैज्ञानिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए प्रेरित होता है?
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Detailed Explanation
अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) के पदानुक्रम सिद्धांत के अनुसार, आवश्यकताएं एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित होती हैं। सबसे पहले शारीरिक आवश्यकताएं (Physiological Needs) आती हैं, उसके बाद सुरक्षा आवश्यकताएं (Safety Needs) पूरी होती हैं। इन दोनों के संतुष्ट होने के बाद व्यक्ति तीसरे स्तर पर प्रवेश करता है, जिसे संबद्धता, प्रेम और अपनेपन की आवश्यकताएं (Belongingness and Love Needs) कहा जाता है, जिसमें मित्र, परिवार और समूह के साथ संबंध बनाने की प्रेरणा शामिल होती है। अधिक जानकारी के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ।
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अब्राहम मास्लो के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के…
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Related Questions
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'अभिप्रेरणा' (Motivation) के संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) की सर्वोच्च अवस्था 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) को प्राप्त करने से ठीक पहले व्यक्ति द्वारा अपनी किन आवश्यकताओं को संतुष्ट करना अनिवार्य माना जाता है?
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation) अर्थात् 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर की आवश्यकता—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसके तहत व्यक्ति अपनीिक क्षमताओं, प्रतिभाओं, और आंतरिक संभावनाओं का पूर्ण विकास और अधिकतम उपयोग करते हुए अपने जीवन के सर्वोच्च मानवीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सृजनात्मक विकास, स्वायत्तता और आंतरिक अभिप्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अभिप्रेरणा का 'मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम' (Maslow's Hierarchy of Needs) सिद्धांत में सबसे उच्च स्तर की आवश्यकता कौन सी है?
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अब्राहम मास्लो के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद अपने मित्रों और परिवार के साथ अपनेपन, प्रेम और स्वीकृति की अनुभूति तलाशने लगता है, तो मास्लो के इस मॉडल के तहत यह आवश्यकता पदानुक्रम के किस विशिष्ट स्तर का प्रतिनिधित्व करती है, और यह किस प्रकार की प्रेरणा (Motivation) के अंतर्गत आती है?
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अब्राहम मास्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की शारीरिक (जैविक) आवश्यकताएँ और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएँ पूरी हो चुकी हैं, तो पदानुक्रम में इसके ठीक बाद उभरने वाली और व्यक्ति को प्रेरित करने वाली प्राथमिक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता निम्नलिखित में से कौन सी होगी?
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अब्राहम मास्लो के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) के अनुसार, जब व्यक्ति अपनी शारीरिक (Physiological) और सुरक्षा संबंधी (Safety) आवश्यकताओं को संतुष्ट कर लेता है, तो वह पदानुक्रम के उच्च स्तरों की ओर बढ़ता है। इस संदर्भ में, 'संबंध और प्रेम की आवश्यकता' (Belongingness and Love Needs) तथा 'आत्म-सम्मान की आवश्यकता' (Esteem Needs) के बीच का सबसे सूक्ष्म और महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक अंतर निम्नलिखित में से कौन सा है?
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अब्राहम मैस्लो द्वारा प्रतिपादित आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की शारीरिक (Physiological) और सुरक्षा (Safety) से जुड़ी बुनियादी आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं, तो उसके बाद वह पदानुक्रम के अगले किस उच्च स्तर की आवश्यकता को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है, जो उसकी सामाजिक और अपनेपन की इच्छाओं से संबंधित है?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण के संदर्भ में, राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद और ज्योतिराव फुले के कार्यों और उनके संगठनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और जातिगत कठोरताओं का पुरजोर विरोध किया, किंतु उन्होंने पाश्चात्य उदारवादी शिक्षा, विज्ञान और प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए आधुनिकीकरण पर विशेष बल दिया।
2. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांडों का प्रचार करना था, तथा उन्होंने वेदांत दर्शन को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाने के लिए कभी भी सामाजिक सेवा या मानवतावादी कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व और सामाजिक असमानता के विरुद्ध शूद्रों व अतिशूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' के माध्यम से जाति व्यवस्था की कड़ी आलोचना की।
4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने 1856 में 'हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया, जिससे समाज में विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी वैधता प्राप्त हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
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