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History of India
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के प्रशासनिक, कलात्मक और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकात्मथ रथ मंदिरों (रथ मंदिरों) का निर्माण कार्य शुरू हुआ था।
  2. 2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण ऐहोल शिलालेख में मिलता है, जिसकी रचना रवि कीर्ति ने संस्कृत भाषा और कर्नाटक लिपि में की थी।
  3. 3. चोल सम्राट राजराजा प्रथम ने श्रीलंका (ईप्सित) पर आक्रमण कर उसके उत्तरी भाग को अपने साम्राज्य में मिला लिया था और वहाँ के राजा को पराजित कर अनुराधापुर शहर को अपनी राजधानी बनाया था तथा राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था।
  4. 4. वर्धन वंश के राजा हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) भारत आया था, जिसने कन्नौज में आयोजित भव्य धार्मिक महासम्मेलन और प्रयाग के महाकुंभ (मोक्ष परिषद) का अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' में सजीव वर्णन किया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को परास्त कर 'वातापिकोंड' की उपाधि ली और महाबलीपुरम में रथ मंदिरों का निर्माण कराया। कथन 2 सही है; पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को हराया था और इसका उल्लेख रवि कीर्ति रचित विकिपीडिया संदर्भ (ऐहोल अभिलेख) में मिलता है। कथन 3 गलत है क्योंकि राजराजा प्रथम ने श्रीलंका के उत्तरी भाग पर अधिकार जरूर किया था, किंतु उसने पोलारूवा (Jananathamangalam) को अपनी प्रशासनिक राजधानी बनाया था, न कि अनुराधापुर को। कथन 4 बिल्कुल सही है, हर्षवर्धन के काल में ह्वेनसांग आया था और उसने 'सी-यू-की' में कन्नौज और प्रयाग सभाओं का वर्णन किया है। अत: विकल्प (a) सही है।
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