त्वरित लिंक्स
History of India
11 views
प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का अंत 1782 ई. में किस प्रसिद्ध संधि के साथ हुआ था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1782 में सालबाई की संधि हुई थी।
Related Questions
→
मुगल प्रशासन में मीर बख्शी:
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश देशी शासक और सामंत राष्ट्रीय दृष्टिकोण से रहित होकर केवल अपने व्यक्तिगत हितों, छीनी गई जागीरें और पेंशन की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे थे, जिससे उनमें एक अखिल भारतीय राजनीतिक एजेंडे का पूर्ण अभाव था।
2. नाना साहब, बेगम हजरत महल और खान बहादुर खान जैसे नेताओं ने अंग्रेजों के विरुद्ध अनुकरणीय वीरता का परिचय दिया, किंतु उनके पास आधुनिक सैन्य तकनीक, केंद्रीकृत योजना और लंबी अवधि के युद्ध को चलाने के लिए पर्याप्त वित्तीय व संसाधन प्रबंधन की भारी कमी थी।
3. मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर को औपचारिक रूप से विद्रोह का सर्वोच्च कमांडर घोषित किया गया था, किंतु उनकी वृद्धावस्था, दिशाहीनता और दरबार के भीतर आपसी अंतर्कलह के कारण विद्रोहियों को कोई प्रभावी और अनुशासित केंद्रीय सैन्य नेतृत्व प्राप्त नहीं हो सका।
4. विद्रोहियों के बीच तीव्र वैचारिक और सांप्रदायिक मतभेदों के कारण हिंदू और मुस्लिम सैनिकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध मिलकर लड़ने से पूरी तरह इंकार कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप शुरुआती दौर में ही संपूर्ण विद्रोह बिना किसी ब्रिटिश सैन्य कार्रवाई के स्वतः ही समाप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य और उत्तरार्ध में उभरे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दार्शनिक दृष्टिकोण, सांगठनिक संरचना तथा उनके सुधारवादी एजेंडे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद का समर्थन करने के साथ-साथ मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध किया, किंतु ब्रह्म समाज के भीतर आदि ब्रह्म समाज और साधारण ब्रह्म समाज के रूप में विभाजन का मुख्य कारण केशव चंद्र सेन की अल्पवयस्क पुत्री का कूचबिहार के राजा के साथ बाल विवाह होना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय तथा अज्ञानता से मुक्त मानते हुए मध्यकालीन पौराणिक ग्रंथों और मूर्तिपूजा को पूरी तरह से खारिज कर दिया, लेकिन समाज के भीतर शुद्धि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केवल गैर-भारतीयों को हिंदू धर्म में दीक्षित करना था।
3. प्रार्थना समाज की स्थापना महादेव गोविंद रानाडे, आत्माराम पांडुरंग और आर. जी. भंडारकर द्वारा बंबई में की गई थी, जिसका मुख्य ध्यान धार्मिक आडंबरों के स्थान पर सामाजिक सुधारों जैसे कि अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित था।
4. स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य केवल प्राचीन वेदांत दर्शन का प्रचार करना और संन्यासी जीवन को बढ़ावा देना था, जबकि यह संगठन ब्रिटिश काल के दौरान किसी भी प्रकार के सामाजिक कल्याण, राहत कार्यों या धर्मार्थ गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया गया, तथा भारत के गवर्नर-जनरल को 'वाइरॉय' (Viceroy) की अतिरिक्त उपाधि दी गई, जिसके तहत लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वाइसराय बने।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियाسतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और उनके विलय की नीति (Doctrine of Lapse) को समाप्त किया जाता है।
3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता और बिना किसी नस्लीय या धार्मिक भेदभाव के लोक सेवाओं में भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च पदों पर नियुक्त करने का स्पष्ट वचन दिया गया था, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने शत-प्रतिशत ईमानदारी से तुरंत लागू भी कर दिया था।
4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों के आधार पर यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया तथा बंगाल की सेना में जातियों और क्षेत्रों के संतुलन के तहत 'फूट डालो और राज करो' की नीति को संस्थागत रूप दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'सोलह महाजनपदों' (Sixteen Mahajanapadas) और उनके भौगोलिक तथा राजनीतिक स्वरूप के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें अंग, मगध, वज्जि और मल्ल प्रमुख थे।
2. वज्जि महाजनपद आठ जातियों का एक संघ (Confederacy) था, जिसकी राजधानी वैशाली थी और यह प्राचीन विश्व के शुरुआती गणतंत्रात्मक (Republican) शासन प्रणालियों में से एक माना जाता है।
3. दक्षिण भारत में स्थित 'अश्मक' (Assaka) एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर स्थित था, और इसकी राजधानी पोतन या पोटली थी।
4. मगध साम्राज्य के शुरुआती उत्थान में बिम्बिसार द्वारा अपनाई गई वैवाहिक संधियों और अवंती के राजा प्रद्योत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों की कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि मगध ने केवल सैन्य शक्ति के बल पर अन्य जनपदों को जीता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.