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History of India
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का विस्तृत विवरण दिया है, जिसके अनुसार नगर का शासन तीस सदस्यों की एक परिषद द्वारा संचालित किया जाता था जिसे छह उप-समितियों में विभाजित किया गया था।
- 2. सम्राट अशोक के धम्म की नीति केवल बौद्ध धर्म के धार्मिक सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार तक सीमित थी, और उसने अपने अभिलेखों में कभी भी अन्य संप्रदायों या ब्राह्मणों और श्रमणों के प्रति सहिष्णुता का उपदेश नहीं दिया।
- 3. मौर्यकालीन केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में राजा की सहायता के लिए मंत्रिपरिषद होती थी, जिसके सदस्यों को 'तीर्थ' कहा जाता था और अर्थशास्त्र के अनुसार इनकी कुल संख्या अठारह थी।
- 4. अशोक के शासनकाल में आयोजित 'तृतीय बौद्ध संगीति' का मुख्य उद्देश्य बौद्ध संघ में आए मतभेदों को दूर करना और बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों को संकलित कर 'अभिधम्म पिटक' का संकलन करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन 30 सदस्यों की एक सभा द्वारा चलाया जाता था जो 6 समितियों में बंटी थी। कथन 2 गलत है क्योंकि अशोक का धम्म कोई नया धर्म नहीं था बल्कि एक नैतिक संहिता थी, और उसके 12वें शिलालेख में सभी संप्रदायों (ब्राह्मणों और श्रमणों सहित) के प्रति सहनशीलता और आदर का स्पष्ट उपदेश दिया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार सर्वोच्च मंत्रियों या अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था जिनकी संख्या 18 थी। कथन 4 सही है क्योंकि अशोक के संरक्षण में पाटलिपुत्र में आयोजित तृतीय बौद्ध संगीति के दौरान ही बौद्ध धर्म के तीसरे पिटक 'अभिधम्म पिटक' का संकलन किया गया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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महात्मा गांधी के भारत आने के उपरांत उनके शुरुआती सत्याग्रहों — चंपारण (1917), खेड़ा (1918) और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई कुख्यात 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के कुल भूभाग के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना बाध्यकारी था।
2. खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा पूरा भू-राजस्व वसूलने के निर्णय के विरुद्ध गांधीजी ने किसानों को कर अदायगी रोकने का आह्वान किया था, और इसी आंदोलन के दौरान इंदुलाल याग्निक और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे स्थानीय नेताओं का गांधीजी को मुख्य सहयोग प्राप्त हुआ था।
3. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में पहली बार गांधीजी ने मजदूरों के प्लेग बोनस को पूरी तरह समाप्त करने के विरोध में भूख हड़ताल (Hunger Strike) को अपने एक प्रभावी हथियार के रूप में प्रयोग किया था, जिसके परिणामस्वरूप ट्रिब्यूनल के निर्णय से मिल मालिकों को 50 प्रतिशत बोनस देना पड़ा।
4. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से प्रभावित होकर ही रबीन्द्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, तथा इस आंदोलन की जांच के लिए गठित सरकारी समिति 'चंपारण अग्रियन कमेटी' में गांधीजी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) तथा सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित स्वतंत्रता संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 8 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद गांधीजी ने 'करो या मरो' का नारा दिया, और 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर अहमदनगर फोर्ट तथा अन्य जेलों में नजरबंद कर दिया गया।
2. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंसक और अहीसक माध्यमों से समानांतर सरकारों का गठन किया गया, जिनमें सतारा (महाराष्ट्र) की 'प्रति सरकार' सबसे लंबे समय तक (1945 तक) प्रभावी रही, जिसका नेतृत्व वाई.बी. चव्हाण और नाना पाटिल जैसे नेताओं ने किया था।
3. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में ब्रिटिश नजरबंदी को चकमा देकर कलकत्ता से गुप्त रूप से पलायन किया ('ग्रेट एस्केप') तथा पेशावर एवं काबुल के रास्ते बर्लिन पहुँचे, जहाँ उन्होंने जर्मन सहयोग से 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और भारतीय युद्धबंदियों को संगठित करके 'इंडियन लीजन' का गठन किया।
4. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा आजाद हिंद फौज (INA) की कमान सौंपे जाने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में 'अस्थाई स्वतंत्र भारत सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) के गठन की घोषणा की, जिसे जापान, जर्मनी और इटली सहित कुल नौ धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) ने औपचारिक मान्यता प्रदान की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल स्थापत्य का स्वर्ण युग:
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खिलजी वंश का वह सुल्तान कौन था जिसने स्वयं को "खलीफा" घोषित कर दिया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के सैन्य अभियानों और उनके संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ ने झाँसी की किलेबंदी को घेर लिया, जिसके दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों का मुकाबला किया और कालपी की ओर प्रस्थान किया।
2. कालपी के पतन के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया और वहाँ के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहिब को पेशवा घोषित किया गया।
3. ग्वालियर के निकट कोटा-की-सराय के युद्ध में 18 जून 1858 को ब्रिटिश सेना से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे बच निकलने में सफल रहे और बाद में उन्हें एक जमींदार के विश्वासघात के कारण पकड़कर फाँसी दे दी गई।
4. तात्या टोपे ने झाँसी के पतन के पश्चात मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का सफल नेतृत्व किया था और उन्हें कभी भी ब्रिटिश सेना या उनके सहयोगियों द्वारा पकड़ा नहीं जा सका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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