History of India
Asked 2 months ago · Viewed 23 times
मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय अधिकारियों (तीर्थों) और न्याय प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च स्तर के मंत्रियों और अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनकी कुल संख्या अर्थशास्त्र के अनुसार अठारह थी, जिसमें 'समाहर्ता' का मुख्य कार्य पूरे साम्राज्य में करों का निर्धारण और आय-व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा तैयार करना था।
- 2. मेगस्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित किया जाता था, जिनमें से प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे जो शिल्पकारों के निरीक्षण, विदेशियों की देखभाल और जन्म-मृत्यु का पंजीकरण जैसे कार्य करते थे।
- 3. मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में दीवानी न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' और फौजदारी न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, जहाँ 'कंटकशोधन' अदालतों का मुख्य उद्देश्य समाज के असामाजिक तत्वों और अपराधियों से नागरिकों की रक्षा करना था।
- 4. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति केवल धार्मिक प्रचार-प्रसार तक सीमित थी, और उन्हें साम्राज्य के विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों या न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मौर्य प्रशासन अत्यधिक केंद्रीयकृत और सुव्यवस्थित था, जिसके बारे में कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' और अशोक के शिलालेखों से विस्तृत जानकारी मिलती है। अर्थशास्त्र के अनुसार सर्वोच्च अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था जिनकी संख्या 18 थी। 'समाहर्ता' राजस्व संग्रह और आय-व्यय के विवरण का प्रमुख अधिकारी था, जबकि 'सन्निधातृ' राजकीय कोशागार का अध्यक्ष होता था। मेगस्थनीज के विवरण के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) द्वारा चलाया जाता था। न्यायिक व्यवस्था में दीवानी मामलों के लिए 'धर्मस्थीय' और फौजदारी मामलों के लिए 'कंटकशोधन' न्यायालय थे। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि अशोक द्वारा नियुक्त 'धम्म महामात्रों' को न केवल धार्मिक और नैतिक प्रचार का कार्य सौंपा गया था, बल्कि उन्हें कैदियों की रिहाई, उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देने तथा सामाजिक कल्याण जैसे प्रशासनिक व न्याय से जुड़े अधिकार भी प्राप्त थे। विस्तृत अध्ययन के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ.
अगला प्रश्न →
मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार…
← पिछला प्रश्न
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) के दौरान घटित विभिन्न…
Related Questions
→
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' की राजनीतिक संरचना, उनकी भौगोलिक अवस्थिति और मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्थान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की स्पष्ट सूची मिलती है, जिसमें वज्जी और मल्ला जैसे महाजनपद गणतंत्रात्मक व्यवस्था (संघ) के अंतर्गत आते थे, जबकि अधिकांश अन्य महाजनपद राजतंत्रात्मक शासन प्रणाली से संचालित होते थे।
2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित थी, तथा इसके समीपवर्ती चंपारण क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क उपलब्ध होने के कारण मगध ने अन्य महाजनपदों की तुलना में सैन्य और आर्थिक बढ़त हासिल की।
3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंधों और अवंती के शासक प्रद्योत के साथ मैत्रीपूर्ण नीतियों के माध्यम से मगध की स्थिति को सुदृढ़ किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु ने दीर्घकालिक संघर्ष के बाद वज्जी संघ को पराजित कर उसे मगध में मिला लिया था।
4. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक के शासनकाल में वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था, जिसमें बौद्ध संघ के भीतर गंभीर मतभेदों के कारण स्थविर और महासंघिक संप्रदाय का स्थायी विभाजन हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और गदर पार्टी के क्रांतिकारी स्वरूप तथा उनके वैचारिक एवं संगठनात्मक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) किया गया, जिसके घोषणापत्र 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' का प्रारूप भगवती चरण बोहरा ने तैयार किया था।
2. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'ग़दर पार्टी' का प्रारंभिक नाम 'पैसेफिक कोस्ट हिंद एसोसिएशन' था, तथा इसके द्वारा प्रकाशित 'ग़दर' अखबार के पहले अंक से ही यह क्रांतिकारी दल पूरी तरह मार्क्सवादी और साम्यवादी विचारधारा पर आधारित था।
3. दिसंबर 1928 में लाहौर में जॉन सॉंडर्स की हत्या का मुख्य उद्देश्य लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेना था, जिसमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद ने भी प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया था।
4. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर पार्टी के नेताओं ने 'ग़दर षड्यंत्र' के तहत ब्रिटिश सेना में कार्यरत भारतीय सैनिकों को बगावत करने के लिए प्रेरित किया था, किंतु मुखबिरी और सुरक्षा उपायों के कारण यह योजना समय से पूर्व ही विफल हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद (प्रयागराज) में ब्रिटिश सत्ता द्वारा विद्रोह के दमन और इसके प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह की बागडोर संभालने वाले 'मौलवी अहमदुल्लाह शाह' को अंग्रेजों ने जीवित या मृत पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, जिन्हें अंततः पुवायाँ के राजा के साथ हुए विश्वासघात के बाद ब्रिटिश सेना द्वारा मार दिया गया था।
2. रोहिलखंड क्षेत्र के बरेली में खान बहादुर खान ने 1857 के विद्रोह का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था, किंतु जनरल कैंपबेल के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा बरेली पर पुनः अधिकार करने के पश्चात खान बहादुर खान को नेपाल भागने पर विवश होना पड़ा और वे कभी पकड़े नहीं गए।
3. इलाहाबाद में लियाकत अली ने विद्रोह का नेतृत्व करते हुए शानदार प्रतिरोध किया, लेकिन कर्नल नील की क्रूर सैन्य कार्रवाई के बाद इस विद्रोह का पूरी तरह दमन कर दिया गया तथा लियाकत अली को गिरफ्तार कर आजीवन काले पानी (अंडमान) की सजा दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की कला, वास्तुकला और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम 'महामल्ल' के शासनकाल में करवाया गया था, जबकि पल्लव वंश के ही राजसिंह (नरसिंहवर्मन द्वितीय) ने कांचीपुरम के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था।
2. वातापी (बादामी) के चालुक्य वंश के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत और जीवंत ऐतिहासिक विवरण महाकवि रविचर्ति द्वारा रचित ऐहोल शिलालेख (प्रशस्ति) में प्राप्त होता है।
3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, जिसका विस्तृत उल्लेख उत्तरमेरूर अभिलेखों में मिलता है, के अंतर्गत ग्राम सभाओं के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (घड़े की पर्ची) नामक अनूठी लोकतांत्रिक लॉटरी प्रणाली का प्रयोग किया जाता था।
4. हर्ष के कन्नौज धर्मसभा के दौरान महायान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए चीनी यात्री ह्वेनसांग को सभा का अध्यक्ष बनाया गया था, किंतु ह्वेनसांग की इस सर्वोच्च धार्मिक स्थिति से ईर्ष्यावश हीनयानियों और ब्राह्मणों ने सभा के पंडाल में आग लगाने का असफल षड्यंत्र रचा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
→
महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.