BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
8 views

गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल की आर्थिक एवं मुद्रा प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्योत्तर काल के विपरीत, गुप्त काल में सोने के सिक्कों (दीनार) की ढलाई बड़े पैमाने पर की गई, किंतु गुप्त साम्राज्य के उत्तरवर्ती चरणों (विशेषकर स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद) में जारी किए जाने वाले स्वर्ण सिक्कों में सोने की शुद्धता में निरंतर गिरावट और तांबे के सम्मिश्रण में वृद्धि देखी गई।
  2. 2. सातवाहन वंश (मौर्योत्तर काल) के दौरान तांबे और कांसे के सिक्कों के साथ-साथ सीसे (Lead) और प्रोटीन के सिक्कों का प्रचलन बड़े पैमाने पर था, जो इस काल में दक्कन क्षेत्र में धातु विज्ञान और खनिज उपलब्धता के उच्च विकास को दर्शाता है।
  3. 3. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में 'घटीयंत्र' (Persian wheel / Water-wheel) जैसी सिंचाई तकनीकों का उल्लेख अमरसिंह द्वारा रचित 'अमरकोश' और वाराहमिहिर की 'बृहत्संहिता' में मिलता है, जिसने कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  4. 4. गुप्त प्रशासन द्वारा व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए श्रेणियों (Guilds/श्रेणी) के पंजीकरण और उनके आंतरिक न्यायिक अधिकारों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था, जिससे व्यापारियों की स्वायत्तता नष्ट हो गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। गुप्त साम्राज्य में स्वर्ण सिक्कों (दीनार) का प्रचलन प्रचुर मात्रा में हुआ, लेकिन हूण आक्रमणों और आर्थिक दबावों के कारण बाद के शासकों के सिक्कों में सोने की शुद्धता घटने लगी। सातवाहन काल में सीसे और प्रोटीन के सिक्के बहुतायत में चलते थे। गुप्त काल में सिंचाई हेतु 'घटीयंत्र' का प्रयोग व्यापक रूप से होने लगा था जिसका उल्लेख साहित्यिक स्रोतों में मिलता है। इसके विपरीत, कथन 4 गलत है क्योंकि गुप्त काल में व्यापारिक श्रेणियों (Guilds) को काफी स्वायत्तता प्राप्त थी और वे अपने आंतरिक मामलों के साथ-साथ बैंकिंग कार्य भी करती थीं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

मौर्योत्तर काल तथा गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों ने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि (अग्रहार) देने की प्रथा को बड़े पैमाने पर आरंभ किया, जिससे सामंती प्रवृत्तियों और भूमि अनुदान की संस्कृति को प्रोत्साहन मिला। 2. गुप्त काल में भूमि अनुदान प्राप्त करने वाले अग्रहारिकों को प्रशासनिक अधिकार और स्थानीय न्याय करने की शक्ति भी प्राप्त हो गई थी, जिससे केंद्रीय नियंत्रण कमजोर होने लगा और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। 3. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्के, जिन्हें 'दीनार' कहा जाता था, कलात्मक सुंदरता और शुद्धता में कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अत्यधिक श्रेष्ठ और भारी थे, और इनका उपयोग दैनिक सामान्य लेन-देन के लिए बहुतायत में किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? मौर्योत्तर काल तथा गुप्त साम्राज्य के दौरान व्यापार, शहरीकरण और आर्थिक संरचना में आए परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले अत्यधिक लाभदायक समुद्री व्यापार के कारण भारत में बड़ी संख्या में रोमन सोने के सिक्के (दीनार/औरियन) आए, किंतु तीसरी शताब्दी ईस्वी के पश्चात रोमन व्यापार के पतन के कारण उत्तर भारत में नगरीय केंद्रों (Urban Centers) का ह्रास होने लगा। 2. गुप्त काल में कुषाण काल की तुलना में सोने के सिक्कों की संख्या तो सर्वाधिक मिलती है, किंतु गुप्त शासकों के उत्तरवर्ती काल में इन सिक्कों में सोने की शुद्धता (Purity) में निरंतर गिरावट आई और तांबे व चांदी के सिक्कों का अनुपात कम हो गया, जो गुप्त अर्थव्यवस्था के संकट का प्रमाण है। 3. गुप्तकाल में प्रशासनिक और धार्मिक अनुदानों (ब्रह्मदेय और अग्रहार) के रूप में भूमि दिए जाने की प्रथा ने सामंती व्यवस्था (Feudalism) की नींव को मजबूत किया, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर मुद्रा का चलन कम हुआ और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? अलाउद्दीन ने "खम्स" (लूट का माल) के वितरण के पुराने नियम को बदलकर क्या कर दिया था? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुई घटनाओं और विद्रोही गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिन्हें पटना के कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया गया था। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर सीधे बाबू कुंवर सिंह की सेना में शामिल होने के लिए शाहबाद पहुँचे। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्रों में विद्रोही सिपाहियों के असंतोष और स्थानीय जमींदारों की सक्रियता के कारण ब्रिटिश प्रशासन पूरी तरह पस्त हो गया था, जिसके परिणामस्वरूप कमिश्नर टेलर ने इन दोनों जिलों से सभी यूरोपीय अधिकारियों को तुरंत वापस बुलाकर मार्शल लॉ लागू कर दिया था। 4. शाहबाद (आरा) क्षेत्र में विद्रोह का आरंभ बाबू कुंवर सिंह के प्रत्यक्ष नेतृत्व में हुआ था, जिन्होंने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के पहुँचने से पहले ही ब्रिटिश खजाने को लूटकर आरा शहर पर पूरी तरह अधिकार कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रसार तथा उनके दार्शनिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के विपरीत, दक्षिण भारत में वैष्णव संतों (आलवारों) और शैव संतों (नयनारों) ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी, जिसमें रामानुजाचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन करते हुए ईश्वर और जीव के बीच तादात्म्य के साथ-साथ भेद को भी स्वीकार किया। 2. सूफी सिलसिले मुख्य रूप से दो प्रमुख धाराओं—'बा-शरा' (इस्लामी शरीयत के बंधनों से बंधे हुए) और 'बे-शरा' (शरीयत के कठोर नियमों से स्वतंत्र या मस्त कलंदर)—में विभाजित थे, जिनमें भारत में चिश्ती और सुहरावर्दी सिलसिले 'बा-शरा' परंपरा के अंतर्गत आते थे। 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने जातिगत भेदभाव को दरकिनार करते हुए अपने शिष्यों में रैदास (चमार), कबीर (जुलाहा), सेना (नाई) और पीपा (राजपूत शासक) जैसे समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को शामिल किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.