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समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब कैसा होता है?

Detailed Explanation

समतल दर्पण हमेशा आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
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मानव शरीर में वृहत् पोषक तत्वों (Macronutrients) और सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) के उपापचय तथा जैव-रासायनिक कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन C) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोलेजन (Collagen) प्रोटीन के हाइड्रॉक्सीलेशन के लिए एक आवश्यक सह-एंजाइम के रूप में कार्य करता है, और इसकी कमी से संयोजी ऊतकों की कमजोरी तथा स्कर्वी रोग उत्पन्न होता है। 2. ट्रिप्टोफैन एक आवश्यक अमीनो अम्ल है, जिससे मानव शरीर में 'नियासिन' (विटामिन B3) और 'सेरोटोनिन' न्यूरोट्रांसमीटर का जैव-संश्леषण होता है, तथा इसकी पूर्ण कमी से 'पेलॅग्रा' (Pellagra) रोग हो सकता है। 3. वसा-विलेय विटामिन 'टोकॉफेरॉल' (विटामिन E) एक शक्तिशाली अंतःकोशिकी एंटीऑक्सीडेंट है जो कोशिका झिल्ली में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स को पेरोक्सीडेशन से बचाता है, और इसकी कमी से पुरुषों में बंध्यापन तथा महिलाओं में गर्भपात की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। 4. कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान 'थायमिन' (विटामिन B1) अपने सक्रिय सह-एंजाइम रूप यानी थायमिन पाइरोफॉस्फेट के रूप में पादप और जंतु कोशिकाओं में पाइरुवेट के एसिटाइल-कोएंजाइम-A में ऑक्सीडेटिव डीकार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित नहीं करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? किण्वन? कौन सी गैस ओजोन परत को सर्वाधिक नुकसान पहुँचाती है? विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी धात्विक चालक का प्रतिरोध उसके ताप में वृद्धि के साथ बढ़ता है, क्योंकि ताप बढ़ने पर मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत विश्रांतिक काल (Relaxation time) घट जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों की आयनों के साथ संघट्टों की आवृत्ति बढ़ जाती है। 2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जो केवल बन्द परिपथों पर लागू होता है और इसके अनुसार किसी बन्द पाथ में कुल विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग उस पाथ के विभिन्न भागों में उत्पन्न विभवांतरों के बीजीय योग के बराबर होता है। 4. यदि एकसमान अनुप्रस्थ काट वाले तांबे के तार को खींचकर उसकी लंबाई को दोगुना कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध चार गुना हो जाता है और उसकी विशिष्ट प्रतिरोधकता (Resistivity) भी दोगुनी हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, 'बीटा-क्षय' (Beta decay) और 'इलेक्ट्रॉन कैप्चर' (Electron capture) प्रक्रियाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बीटा-ऋणात्मक ($eta^-$) क्षय के दौरान, नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटीन्यूट्रिनो में परिवर्तित हो जाता है, जिससे परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है। 2. इलेक्ट्रॉन कैप्चर की प्रक्रिया में, नाभिक के निकट की कक्षा (आमतौर पर K-शेल) का एक आंतरिक इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे एक प्रोटॉन न्यूट्रॉन में बदल जाता है और एक न्यूट्रिनो उत्सर्जित होता है। 3. बीटा-धनात्मक ($eta^+$) क्षय और इलेक्ट्रॉन कैप्चर दोनों ही प्रक्रियाओं में मूल परमाणु का द्रव्यमान संख्या (Mass number) परिवर्तित हो जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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