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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता के सुदृढ़ीकरण के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मुगल सम्राट जहांगीर ने वर्ष 1615 में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में भारत आए सर थॉमस रो को सूरत में एक स्थायी कारखाना स्थापित करने की शाही अनुमति प्रदान की थी, और इसके साथ ही अंग्रेजों को संपूर्ण मुगल साम्राज्य में बिना किसी कर के आंतरिक व्यापार करने का विशेष अधिकार भी मिल गया था।
- 2. वर्ष 1698 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूतासुती, कलकत्ता और गोविंदपुर नामक तीन गाँवों की जमींदारियों को खरीदकर फोर्ट विलियम के किलेबंदी की नींव रखी, जिसका प्रथम प्रेसिडेंट चार्ल्स आयर को बनाया गया था।
- 3. बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खान ने अपनी राजधानी को ढाका से स्थानांतरित कर मुर्शिदाबाद बनाया और अंग्रेजों द्वारा व्यापारिक विशेषाधिकारों (दस्तक) के दुरुपयोग पर कड़ा नियंत्रण लगाने का प्रयास किया, जिससे कंपनी और नवाब के बीच निरंतर तनाव बना रहा।
- 4. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा ब्रिटिश कंपनी को जारी किए गए ऐतिहासिक 'फरमान' के तहत कंपनी को बंगाल, हैदराबाद और अवध में बिना कर चुकाए व्यापार करने की असीमित छूट मिल गई, जिसे इतिहासकारों द्वारा 'मैग्नाकार्टा' कहा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि सर थॉमस रो को सूरत में कारखाना स्थापित करने की अनुमति तो मिली थी, किंतु संपूर्ण मुगल साम्राज्य में कर-मुक्त व्यापार का अधिकार नहीं मिला था; उन्हें केवल चुनिंदा छूटें प्राप्त हुई थीं। कथन 4 गलत है क्योंकि फारुकसियर के 1717 के फरमान के तहत कर-मुक्त व्यापार की अनुमति केवल बंगाल, हैदराबाद और गुजरात (सूरत) में थी, अवध में नहीं। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। बंगाल में ब्रिटिश सत्ता के विस्तार के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया गया, तथा भारत के गवर्नर-जनरल को 'वाइरॉय' (Viceroy) की अतिरिक्त उपाधि दी गई, जिसके तहत लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वाइसराय बने।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियाسतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और उनके विलय की नीति (Doctrine of Lapse) को समाप्त किया जाता है।
3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता और बिना किसी नस्लीय या धार्मिक भेदभाव के लोक सेवाओं में भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च पदों पर नियुक्त करने का स्पष्ट वचन दिया गया था, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने शत-प्रतिशत ईमानदारी से तुरंत लागू भी कर दिया था।
4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों के आधार पर यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया तथा बंगाल की सेना में जातियों और क्षेत्रों के संतुलन के तहत 'फूट डालो और राज करो' की नीति को संस्थागत रूप दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के प्रशासनिक, कलात्मक और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना था, जिसकी अध्यक्षता चीनी यात्री ह्वेनसांग ने की थी, तथा इस अवसर पर प्रयाग के संगम तट पर प्रत्येक पाँचवें वर्ष 'महामोक्ष परिषद' का आयोजन किया जाता था।
2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण पल्लव वंश के महेंद्रवर्मन प्रथम के 'कुर्मन अभिलेख' में प्राप्त होता है।
3. पल्लव कालीन वास्तुकला में महाबलीपुरम (मामलपुरम) के रथ मंदिरों का निर्माण नरसिंहवर्मन प्रथम (महमल्ल) के शासनकाल में हुआ था, जो एक ही विशाल ग्रेनाइट चट्टान को काटकर (Monolithic Rock-cut) बनाए गए हैं।
4. चोल प्रशासन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी स्थानीय स्वशासन प्रणाली थी, जिसका जीवंत प्रमाण 'उत्तरामेरूर अभिलेख' (परान्तक प्रथम के शासनकाल से संबंधित) से मिलता है, जिसमें ग्राम सभा (सभा या महासभा) के सदस्यों के निर्वाचन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान व्यवस्था (Land Grants) और प्रशासनिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में ब्राह्मणों, मंदिरों और बौद्ध विहारों को दिए जाने वाले कर-मुक्त भूमि अनुदान की प्रथा में भारी वृद्धि हुई, जिसे 'अग्रहार' अनुदान कहा जाता था, और इस प्रकार के अनुदानों से स्थानीय किसानों के अधिकार सुरक्षित रहते थे तथा उन्हें भूमि से बेदखल करने का अधिकार अनुदान प्राप्तकर्ताओं को नहीं था।
2. इस काल में स्वर्ण सिक्कों (जिसे 'दीनार' कहा जाता था) का प्रचलन बड़े पैमाने पर हुआ, किंतु गुप्त सम्राटों के उत्तरवर्ती काल में, विशेषकर स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद, स्वर्ण सिक्कों में सोने की शुद्धता में निरंतर गिरावट आई और तांबे व रजत सिक्कों का प्रयोग स्थानीय व्यापार में बढ़ गया।
3. गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था में 'विषय' (जिला) के प्रशासनिक प्रमुख को 'विषयपति' कहा जाता था, जो नगर श्रेष्ठियों, सार्थवाहों, प्रथम कुलिक और प्रथम कायस्थ जैसे स्थानीय व्यापारियों व अधिकारियों के निकाय की सहायता से शासन संचालित करता था।
4. गुप्त काल में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य द्वारा सिंचाई के साधनों पर विशेष ध्यान दिया गया था, जिसका सबसे प्रसिद्ध प्रमाण सौराष्ट्र प्रांत में स्थित 'सुदर्शन झील' का पुनर्निर्माण था, जिसे पुष्यगुप्त और तुषास्प के बाद गुप्त शासक स्कंदगुप्त के शासनकाल में पर्णदत्त और उसके पुत्र चक्रपालित द्वारा जीर्णोद्धार करवाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों में लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धान्त' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, जिससे शासक वर्ग और उनके आश्रितों में गहरा असंतोष व्याप्त हुआ।
2. आर्थिक कारणों के अंतर्गत ब्रिटिश भू-राजस्व प्रणालियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी) और ब्रिटेन से सस्ते मशीनी कपड़ों के आयात ने भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे किसान और कारीगर दोनों अत्यधिक कर्ज के बोझ तले दब गए।
3. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के तहत ब्रिटिश सरकार द्वारा 1856 का 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' और ईसाई मिशनरियों की बढ़ती गतिविधियों ने रूढ़िवादी भारतीय समाज में यह भय उत्पन्न कर दिया कि अंग्रेज उनकी पारंपरिक सामाजिक संरचना और धर्म को नष्ट करना चाहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और उसके सामाजिक-आर्थिक पहलुओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश बस्तियों में नगर दो भागों में विभाजित थे - पश्चिमी भाग जो छोटा किंतु ऊँचा (दुर्ग या गढ़ी) होता था, और पूर्वी भाग जो बड़ा किंतु सामान्य धरातल पर बसा आवासीय क्षेत्र होता था, अपितु 'धोलावीरा' इसका एक अपवाद है जो त्रि-स्तरीय (तीन भागों) विभाजित था।
2. सिंधु घाटी सभ्यता की ईंटों का सामान्य अनुपात मानक रूप से 1:2:4 (मोटाई : चौड़ाई : लंबाई) था और अधिकांश बस्तियों में अलंकृत ईंटों का प्रयोग केवल मंदिरों और सार्वजनिक स्नागारों के फर्श निर्माण में किया जाता था।
3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नागार' (Great Bath) के निर्माण में जल रिसाव को रोकने के लिए ईंटों के जोड़ों के बीच बिटुमिन (डामर) की परत का उपयोग किया गया था, और इसके उत्तर तथा दक्षिण में सीढ़ियाँ बनी हुई थीं।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे (अयस) और तांबे दोनों धातुओं से पूर्णतः परिचित थे, और उन्होंने रक्षात्मक हथियारों के बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए लोहे का ही सबसे अधिक उपयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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