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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सिंधु घाटी सभ्यता के लगभग सभी प्रमुख नगरों (जैसे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो) में घर पकी हुई ईटों के बनाए जाते थे, किंतु समकालीन मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के विपरीत यहाँ की अधिकांश ईटों का मानक अनुपात 4:2:1 (लंबाई:चौड़ाई:मोटाई) था और सुरक्षा की दृष्टि से घरों के मुख्य द्वार मुख्य सड़कों की ओर खुलते थे।
  2. 2. लोथल से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य यह प्रमाणित करते हैं कि यह सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख बंदरगाह और बाह्य व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था, जहाँ से फारस की खाड़ी की मुहरें भी प्राप्त हुई हैं।
  3. 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नागार' (Great Bath) का उपयोग संभवतः किसी विशेष अनुष्ठानिक या धार्मिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसके उत्तर और दक्षिण दोनों सिरों पर नीचे उतरने के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया था तथा इसके जल के रिसाव को रोकने के लिए बिटुमिन (टार) की परत का उपयोग किया गया था।
  4. 4. सिंधु सभ्यता की लिपि चित्रात्मक (Pictographic) थी, जो 'बूसट्रोफेडन' (Boustrophedon) शैली में लिखी जाती थी—अर्थात पहली पंक्ति दाईं से बाईं ओर और दूसरी पंक्ति बाईं से दाईं ओर, और अभी तक इस लिपि को पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता में सुरक्षा और धूल-शोर से बचने के लिए अधिकांश घरों के मुख्य द्वार मुख्य सड़कों पर न खुलकर गलियों की ओर खुलते थे (अपवाद लोथल है जहाँ द्वार सड़क की ओर खुलते थे)। कथन 2, 3 और 4 बिल्कुल सही हैं। लोथल एक प्रमुख बंदरगाह था, मोहनजोदड़ो के विशाल स्नागार में जल-रोक के लिए बिटुमिन का प्रयोग हुआ था, और हड़प्पा की लिपि 'बूसट्रोफेडन' शैली वाली चित्रात्मक लिपि है। इस सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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