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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 17 times

19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद का समर्थन किया और वेदों की अचूकता या अपौरुषेयता (Infallibility) के सिद्धांत को कभी स्वीकार नहीं किया।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को समस्त ज्ञान का स्रोत मानते हुए उनकी अपौरुषेयता को प्रतिपादित किया, किंतु उन्होंने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और अवतारवाद का खंडन किया।
  3. 3. बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने वेदों की सर्वोच्चता को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए सनातन धर्म की रूढ़ियों को मजबूत किया और विधवा पुनर्विवाह का कड़ा विरोध किया।
  4. 4. स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य वेदांत के संदेशों का प्रचार करना और व्यावहारिक वेदांत के माध्यम से मानव सेवा करना था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 सही हैं। राजा राममोहन राय के ब्रह्म समाज ने किसी भी एक ग्रंथ या वेद को अचूक (infallible) नहीं माना। स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों को अपौरुषेय और ज्ञान का आधार माना, लेकिन मूर्तिपूजा और अवतारवाद का तीव्र खंडन किया। स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। कथन 3 गलत है क्योंकि प्रार्थना समाज ने विधवा पुनर्विवाह, अंतर्जातीय विवाह और महिला शिक्षा का समर्थन किया था, न कि रूढ़ियों का समर्थन। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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