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History of India
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महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके शुरुआती सत्याग्रह आंदोलनों और उनसे जुड़ी प्रमुख घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के आम्रण पर गांधीजी ने चंपारण का दौरा किया और यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर जबरन थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के विरोध में सफलतापूर्वक नेतृत्व किया, जिसके बाद सरकार ने जाँच के लिए 'चंपारण अग्रैरियन कमेटी' का गठन किया।
  2. 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान माफी से इनकार किए जाने पर गांधीजी ने किसानों को 'लगान न दो' (No-Tax Campaign) का स्पष्ट निर्देश दिया, जिसमें वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक ने प्रमुख सहयोग किया।
  3. 3. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) के दौरान गांधीजी ने पहली बार भारत में किसी भूख हड़ताल का प्रयोग 'प्लैग बोनस' को लेकर मिल मालिकों के खिलाफ किया था, जिसके परिणामस्वरूप मजदूरों को 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि प्राप्त हुई।
  4. 4. असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान चौरी-चौरा की हिंसक घटना से आहत होकर गांधीजी ने फरवरी 1922 में बारडोली प्रस्ताव के माध्यम से आंदोलन को अचानक स्थगित कर दिया, जिससे क्षुब्ध होकर सुभाष चंद्र बोस ने इस निर्णय को 'राष्ट्रीय आपदा' करार दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। चंपारण सत्याग्रह (1917) में 'तीनकठिया पद्धति' के खिलाफ संघर्ष सफल रहा और चंपारण अग्रैरियन कमेटी बनी। खेड़ा सत्याग्रह (1918) में किसानों को 'लगान न दो' का आह्वान किया गया था। अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) में गांधीजी ने पहली बार भूख हड़ताल का सफल प्रयोग किया जिससे 35% बोनस मिला। किंतु कथन 4 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि चौरी-चौरा कांड के बाद आंदोलन स्थगन के निर्णय को 'राष्ट्रीय आपदा' सुभाष चंद्र बोस ने नहीं बल्कि चित्ररंजन दास या अन्य नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में देखा जाता है, जबकि सुभाष चंद्र बोस ने इसे 'राष्ट्रीय संकट' माना था, और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार बारडोली में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में आंदोलन वापस लिया गया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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