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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सिंधु घाटी सभ्यता एक मात्रकात्मक समाज थी, जिसका प्रमाण खुदाई में बड़ी संख्या में मिली मृण्मूर्तियों (नारी मृण्मूर्तियां) से मिलता है, तथा यहाँ के समाजों में युद्ध हथियारों का अत्यधिक विकास होने के कारण यह स्पष्ट है कि यह एक प्रबल सैन्यवादी (Militaristic) साम्राज्य था।
  2. 2. लोथल और चान्हूदरो से मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) मिले हैं, जहाँ से कार्नेलियन, जैस्पर, शंख और तांबे के मनके तैयार किए जाते थे, और मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग व्यापारिक संदर्भ में किया गया है।
  3. 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रसिद्ध 'पशुपति मुहर' (Proto-Shiva seal) में एक त्रिमुख देवता को योगमुद्रा में बैठा हुआ दिखाया गया है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा तथा नीचे दो हिरण विराजमान हैं, जो यह दर्शाता है कि सिंधुवासी प्रकृति और पशुओं की पूजा करते थे।
  4. 4. हड़प्पा सभ्यता के लोग लोहे से पूरी तरह परिचित थे और उन्होंने अपने कृषि उपकरणों तथा महलों के निर्माण में बड़े पैमाने पर लोहे की कुल्हाड़ियों और तलवारों का प्रयोग किया था, जो उनकी तकनीकी उन्नतता का परिचायक था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता का समाज संभवतः मातृसत्तात्मक (Matriarchal) प्रकृति का था, किंतु यह एक सैन्यवादी साम्राज्य नहीं था; यहाँ से तलवार या आक्रामक हथियारों के बहुत कम साक्ष्य मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि यह एक शांतिप्रिय व्यापारी वर्ग की सभ्यता थी। कथन 2 सत्य है क्योंकि लोथल और चान्हूदरो मनके निर्माण के प्रमुख केंद्र थे और मेसोपोटामिया के स्रोतों में सिंधु क्षेत्र को 'मेलुहा' कहा गया है। कथन 3 सत्य है, मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपति मुहर पर आद्य-शिव (Proto-Shiva) का अंकन है जिसके चारों ओर पशुओं (हाथी, बाघ, गैंडा, भैंसा और दो हिरण) की आकृतियाँ हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग **लोहे से पूरी तरह अपरिचित** थे (लोहे की खोज भारत में उत्तर वैदिक काल के आसपास लगभग 1000 ईसा पूर्व हुई थी)। इस सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वैदिक साहित्य और उसके संकलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वेद के दो सबसे प्राचीन मंडल (द्वितीय और सप्तम मंडल) हैं, जिन्हें 'वंश मंडल' भी कहा जाता है क्योंकि इनकी रचना विभिन्न ऋषियों के वंशजों द्वारा की गई थी। 2. सामवेद में मुख्य रूप से यज्ञों के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रों (स्तोत्रों) का संकलन है, और इसे भारतीय संगीत का जनक माना जाता है। 3. यजुर्वेद एक ऐसा वेद है जो गद्य और पद्य दोनों में लिखा गया है, और इसके दो प्रमुख भाग 'कृष्ण यजुर्वेद' और 'शुक्ल यजुर्वेद' हैं। 4. अथर्ववेद में जादू-टोना, वशीकरण, औषधियाँ और रोगों के निवारण से संबंधित मंत्रों का उल्लेख है, तथा इसमें वैदिक सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले, किंतु पटना के मजिस्ट्रेट विलियम टेलर ने समय रहते दानापुर के विद्रोह को पूरी तरह कुचल दिया था। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में स्थानीय जमींदारों के साथ-साथ दानापुर से आए विद्रोही सैनिकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तथा छपरा में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रशासनिक मशीनरी को चुनौती दी गई थी। 4. दानापुर के सैनिकों के विद्रोह के तुरंत बाद ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना में संभावित खतरे को भांपते हुए तीन प्रमुख मुस्लिम वकीलों—मोहम्मद हुसैन, अहमद अली और उल हक—को नजरबंद कर लिया था, जिससे शहर में अंग्रेजों के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अकबर के काल में मुगल चित्रकला की नींव किसने रखी थी? मराठा साम्राज्य का अंतिम पेशवा कौन था जिसने अंग्रेजों की "सहायक संधि" स्वीकार की थी? यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की प्रारंभिक स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत आने वाला प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्को डी गामा वर्ष 1498 में कालीकट पहुँचा था, जहाँ स्थानीय शासक 'जमोरिन' ने उसका स्वागत किया था, जबकि इस समुद्री मार्ग की खोज से व्यापारिक एकाधिकार स्थापित करने में पुर्तगालियों को शुरुआती बढ़त मिली। 2. पुर्तगाली गवर्नर फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने भारत में 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल की नीति) लागू की थी, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर में पुर्तगाली आधिपत्य स्थापित करना और अन्य व्यापारियों से 'कार्टेज' (कार्तज) प्रणाली के तहत कर वसूलना था। 3. अल्फोंसू डी अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा छीनकर पुर्तगालियों का मुख्य प्रशासनिक और सामरिक केंद्र बनाया। 4. पुर्तगालियों ने भारत में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करने के साथ-साथ केवल ईसाई महिलाओं के साथ विवाह करने की नीति अपनाई, जिससे स्थानीय भारतीय समाज में उनके प्रति व्यापक स्वीकृति और धार्मिक सद्भाव उत्पन्न हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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