त्वरित लिंक्स
History of India
5 views
यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की प्रारंभिक स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत आने वाला प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्को डी गामा वर्ष 1498 में कालीकट पहुँचा था, जहाँ स्थानीय शासक 'जमोरिन' ने उसका स्वागत किया था, जबकि इस समुद्री मार्ग की खोज से व्यापारिक एकाधिकार स्थापित करने में पुर्तगालियों को शुरुआती बढ़त मिली।
- 2. पुर्तगाली गवर्नर फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने भारत में 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल की नीति) लागू की थी, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर में पुर्तगाली आधिपत्य स्थापित करना और अन्य व्यापारियों से 'कार्टेज' (कार्तज) प्रणाली के तहत कर वसूलना था।
- 3. अल्फोंसू डी अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा छीनकर पुर्तगालियों का मुख्य प्रशासनिक और सामरिक केंद्र बनाया।
- 4. पुर्तगालियों ने भारत में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करने के साथ-साथ केवल ईसाई महिलाओं के साथ विवाह करने की नीति अपनाई, जिससे स्थानीय भारतीय समाज में उनके प्रति व्यापक स्वीकृति और धार्मिक सद्भाव उत्पन्न हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। वास्को डी गामा 1498 में कालीकट आया था। फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' शुरू की थी। अल्बुकर्क ने 1510 में गोवा पर अधिकार किया था। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि पुर्तगालियों ने स्थानीय भारतीय महिलाओं के साथ विवाह की नीति (अल्बुकर्क की विवाह नीति) को बढ़ावा दिया था, न कि केवल ईसाई महिलाओं के साथ, ताकि भारत में पुर्तगाली आबादी को बढ़ाया जा सके। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
→
तालिकोटा के युद्ध (1565) के बाद विजयनगर साम्राज्य का केंद्र हम्पी से बदलकर कहाँ चला गया?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और इसके वैचारिक आधार के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों द्वारा दिए गए कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था" — वी.डी. सावरकर
2. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" — आर.सी. मजूमदार
3. "यह सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष था" — टी.आर. होम्स
4. "यह राष्ट्रीय विद्रोह न होकर एक सैनिक विद्रोह (सिपाही म्यूटिनी) मात्र था" — सर जॉन सीले
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व करने वाली बेगम हजरत महल तथा 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा लखनऊ पर पुनः अधिकार करने के पश्चात बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था और उन्हें पेंशन के साथ कोलकाता में रहने की अनुमति दे दी गई थी।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के एक स्थानीय जागीरदार के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों ने उनकी हत्या कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की क्रांतिकारी गतिविधियों तथा ब्रिटिश सेना के साथ संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने 5 जून 1857 को कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी पेंशन और उपाधि रोके जाने के प्रतिशोध में अंग्रेजों के विरुद्ध शस्त्र उठाए।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने कूटनीतिक और वैचारिक पक्ष संभालते हुए लंदन में पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर कानपुर की सैन्य रणनीति को अमलीजामा पहनाया।
3. कानपुर में पराजय और ब्रिटिश सेना के पुनरधिकार के पश्चात तात्या टोपे ने अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ की सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिलाकर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी।
4. कानपुर में अंतिम पराजय के पश्चात नाना साहब अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष जारी रखने के बजाय जीवित अवस्था में ब्रिटिश सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और आजीवन नजरबंद रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
19वीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. तत्त्वबोधिनी सभा - देवेंद्रनाथ ठाकुर
2. सोशल सर्विस लीग - नारायण मल्हार जोशी
3. सेवा सदन - बहरामजी एम. मलबारी
4. देव समाज - शिवनारायण अग्निहोत्री
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.