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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (पल्लव, चालुक्य और चोल) की प्रशासनिक, सैन्य और स्थापत्य प्रणालियों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराजित करके 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी और मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) में एकाश्म (मोनोलिथिक) रथ मंदिरों का निर्माण करवाया था।
- 2. हर्ष के शासनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय की यात्रा करने वाले चीनी यात्री ह्वेनसांग (यूएनस्वांग) के अनुसार, साम्राज्य की आय चार भागों में विभाजित थी; जिसमें एक भाग राजा के खर्च के लिए, दूसरा मंत्रियों व अधिकारियों के वेतन के लिए, तीसरा राजकीय कर्मचारियों के लिए और चौथा धार्मिक तथा बौद्ध विहारों के दान के लिए निर्धारित था।
- 3. चोल राजवंश की प्रसिद्ध स्थानीय स्वशासन प्रणाली, जो 'उत्तरमेरूर शिलालेखों' से ज्ञात होती है, में ग्राम सभा (सभा या महासभा) के सदस्यों का चयन 'कुरावै' नामक गुप्त मतदान (लॉटरी या पर्ची पद्धति) प्रणाली द्वारा किया जाता था।
- 4. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय और हर्षवर्धन के बीच नर्मदा नदी के तट पर हुए निर्णायक युद्ध का विवरण जैन कवि रविकीर्ति द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' में प्राप्त होता है, जिसमें हर्षवर्धन की पराजय का स्पष्ट उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं। पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को हराकर 'वातापीकोंड' की उपाधि ली थी और महाबलीपुरम के रथ मंदिर बनवाए। चीनी यात्री ह्वेनसांग के विवरण के अनुसार हर्ष की राजकीय आय चार भागों में बंटी थी। पुलकेशिन द्वितीय और हर्षवर्धन के बीच नर्मदा नदी के तट पर युद्ध का उल्लेख रविकीर्ति रचित ऐहोल प्रशस्ति में मिलता है जिसमें हर्ष की हार हुई थी। कथन 3 गलत है क्योंकि चोल स्थानीय स्वशासन में ग्राम सभा के सदस्यों का चयन 'कुडवोलाई' (Kudavolai) नामक पर्ची पद्धति (लॉटरी सिस्टम) से होता था, न कि 'कुरावै' से। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक, सांस्कृतिक और सैन्य प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के कन्नौज सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य समारोह आयोजित करना था, जिसमें पल्लव नरेश महेंद्रवर्मन प्रथम ने भी व्यक्तिगत रूप से भाग लिया था।
2. बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत और प्रामाणिक विवरण हमें महाकवि कालिदास द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' से प्राप्त होता है।
3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण कराया गया था।
4. चोल प्रशासन की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी स्थानीय स्वशासन प्रणाली थी, जिसका जीवंत प्रमाण उत्तरमेरूर के अभिलेखों से मिलता है, जहाँ ग्राम सभाओं (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (पर्ची प्रणाली) का विस्तृत उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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जहाँगीर के दरबार का वह कौन सा चित्रकार था जो पक्षियों और जानवरों के चित्र बनाने में विश्व प्रसिद्ध था?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और इसके फलस्वरूप प्रारंभ हुए 'स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन' के विभिन्न आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय को औपचारिक रूप से लागू करने की घोषणा से पूर्व, लॉर्ड कर्जन ने फरवरी 1905 में भारतीय विश्वविद्यालयों अधिनियम (Indian Universities Act) पारित किया था, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण को कड़ा करना और कलकत्ता विश्वविद्यालय को सरकारी उपक्रम के अधीन लाना था।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जब बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, तो उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे की कलाइयों पर एकता के प्रतीक के रूप में 'राखी' बांधी और प्रसिद्ध गीत 'आमार सोनार बांग्ला' गाया गया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (constructive swadeshi) पर भी बल दिया गया, जिसके अंतर्गत कलकत्ता में पी.सी. रे (प्रफुल्ल चंद्र रॉय) द्वारा 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' जैसी स्वदेशी उद्योगों की स्थापना की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था और आर्थिक नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के 'सप्तांग सिद्धांत' का उल्लेख है, जिसके अनुसार राजा (स्वामी), आमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, सेना और मित्र राज्य के सात आवश्यक अंग हैं।
2. मौर्य प्रशासन में 'समाहर्ता' साम्राज्य के आय-व्यय (राजस्व संग्रहण) का मुख्य अधिकारी होता था, जबकि 'सन्निदाता' राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का संरक्षक था।
3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, और प्रत्येक समिति में सात सदस्य होते थे जो विदेशी पर्यटकों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, व्यापार और शिल्प का नियमन करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप, कारणों और उसके विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इतिहासकार टी. आर. होम्स ने वर्ष 1857 के विद्रोह को 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' (Conflict between civilization and barbarism) करार दिया था।
2. बेंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश संसद में दिए गए अपने भाषण में इस घटना को केवल एक 'सिपाही विद्रोह' न कहकर इसे एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National revolt) की संज्ञा दी थी।
3. वी. डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में चित्रित किया था।
4. सर जॉन सीले और चाल्र्स रीस जैसे इतिहासकारों का यह मानना था कि यह विद्रोह पूरी तरह से एक देशभक्तिपूर्ण जन-आंदोलन था, जिसमें जनता की स्वतःस्फूर्त भागीदारी थी और इसका अंग्रेजों के विरुद्ध कोई धार्मिक या नस्लीय पूर्वाग्रह नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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