BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
6 views

वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक, सांस्कृतिक और सैन्य प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हर्षवर्धन के कन्नौज सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य समारोह आयोजित करना था, जिसमें पल्लव नरेश महेंद्रवर्मन प्रथम ने भी व्यक्तिगत रूप से भाग लिया था।
  2. 2. बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत और प्रामाणिक विवरण हमें महाकवि कालिदास द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' से प्राप्त होता है।
  3. 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण कराया गया था।
  4. 4. चोल प्रशासन की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी स्थानीय स्वशासन प्रणाली थी, जिसका जीवंत प्रमाण उत्तरमेरूर के अभिलेखों से मिलता है, जहाँ ग्राम सभाओं (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (पर्ची प्रणाली) का विस्तृत उल्लेख है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है, क्योंकि कन्नौज सभा (वर्ष 643 ई.) में हर्षवर्धन ने महायान धर्म के प्रचार के लिए सभा बुलाई थी और ह्वेनसांग इसका अध्यक्ष था, किंतु पल्लव नरेश महेंद्रवर्मन प्रथम इस सभा में उपस्थित नहीं थे क्योंकि उनका शासनकाल हर्षवर्धन से पहले समाप्त हो चुका था और वे पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम का समकालीन काल था। कथन 2 असत्य है, क्योंकि 'ऐहोल प्रशस्ति' के रचयिता महाकवि कालिदास नहीं बल्कि पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी कवि रविमुक्त थे, जिन्होंने नर्मदा नदी के युद्ध का वर्णन किया है। कथन 3 सत्य है, पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराفت किया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि ली थी तथा महाबलीपुरम के एकात्मकम (रथ) मंदिरों का निर्माण कराया था। कथन 4 सत्य है, चोल राजवंश के उत्तरमेरूर शिलालेख ग्रामीण स्वशासन और 'कुडवोलाई' (लॉटरी या पर्ची पद्धति) के माध्यम से स्वायत्त ग्राम सभाओं के चुनाव का अनूठा विवरण प्रदान करते हैं।
Share:

Related Questions

जहाँगीर ने "किस्तवार" (Kishtwar) विजय की स्मृति में कौन सा नया सिक्का चलाया था? वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'नियोग' प्रथा और 'विधवा विवाह' का प्रचलन था, तथा इस काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार और वेदों के अध्ययन का अधिकार प्राप्त था, किंतु वे किसी भी राजनीतिक सभा या समिति की बैठकों में भाग नहीं ले सकती थीं। 2. उत्तर वैदिक काल में गोत्र संस्था का पूर्ण विकास हुआ, जिसका मूल अर्थ 'वह गोष्ठ या स्थान जहाँ समूचे कुल का गोधन पाला जाता था' था, और इस काल में अंतर्गोत्र विवाह (Gotra Exogamy) को पूरी तरह वर्जित कर दिया गया। 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इसी ग्रंथ में विदेह माधव की कथा का उल्लेख है, जो आर्यों के उत्तर भारत से सदाानीरा (गंडक) नदी के पार पूर्व दिशा की ओर विस्तार को दर्शाती है। 4. ऋग्वेद में उल्लिखित 'दशराज युद्ध' (दस राजाओं का युद्ध) परूष्णी (रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था, जिसमें भरत कबीले के राजा सुदास ने त्रित्सु और अन्य दस कबीले के संघ को पराजित किया था, और इस युद्ध में विश्वामित्र ने सुदास का पुरोहित के रूप में साथ दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही सिपाहियों के प्रवेश और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने पर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने स्वेच्छा से तुरंत इस विद्रोह का राजनीतिक नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, यद्यपि वे व्यक्तिगत रूप से इस कदम के संभावित परिणामों को लेकर अत्यधिक आश्वस्त और प्रसन्न थे। 2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक प्रशासनिक और सैन्य कमान जनरल बख्त खान के नेतृत्व में गठित एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) के हाथों में थी, जिसमें सैन्य और नागरिक मामलों के निर्णय बहुमत से लिए जाते थे। 3. दिल्ली की पुनर्प्राप्ति के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जॉन निकलसन कश्मीरी गेट पर हुए संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और अंततः उनकी मृत्यु हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों द्वारा दिए गए कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर.सी. मजूमदार 2. "यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था।" — विनायक दामोदर सावरकर 3. "यह धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध एक धर्मयुद्ध (Religious War) था।" — टी.आर. होम्स 4. "यह राष्ट्रीय विद्रोह था, जो सिपाही विद्रोह के रूप में शुरू हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ।" — बेंजामिन डिजरायली उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए घटनाक्रमों तथा बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लखनऊ में विद्रोह की शुरुआत 30 जून 1857 को चिनहट के युद्ध से हुई, जहाँ हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को बेगम हजरत महल के वफादार सैनिकों और विद्रोही सिपाहियों की संयुक्त सेना ने पराजित किया था। 2. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस्स कादिर को अवध का नवाब घोषित कर शासन की बागडोर संभाली तथा ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व करते हुए अंततः नेपाल की तराई में शरण ली, जहाँ उन्होंने ब्रिटिश सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। 3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता था, ने विद्रोह के दौरान फैजाबाद और रोहिलखंड के क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ जबरदस्त जिहाद का आह्वान किया, और ब्रिटिश जनरल कैंपबेल तथा नील की सेना को कई मोर्चों पर कड़ी टक्कर दी। 4. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने मार्च 1858 में भारी गोलाबारी और गोरखा रेजिमेंट की सहायता से लखनऊ पर अंततः पुनः अधिकार कर लिया, जिसके बाद बेगम हजरत महल नेपाल चली गईं और मौलवी अहमदुल्लाह शाह को एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा मार दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.