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General Science
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ओक?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ऑस्ट्रेलिया।
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मानव शरीर की शारीरिक क्रिया-विज्ञान (Physiology) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. छोटी आंत के अग्रभाग (ड्योडिनम) में अग्न्याशय द्वारा स्रावित 'ट्रिप्सिनोजेन' निष्क्रिय एंजाइम आंत की श्लेष्मला (Mucosa) द्वारा स्रावित 'एंटेरोकाइनेज' एंजाइम की उपस्थिति में सक्रिय ट्रिप्सिन में बदलता है, जो प्रोटीन के पाचन में सहायक होता है।
2. मानव श्वसन तंत्र में, कूपिकाओं (Alveoli) की सतह पर 'सर्फेक्टेंट' (Surfactant) नामक फॉस्फोलिपिड यौगिक का स्रावण होता है, जो सतही तनाव को कम करके कूपिकाओं को पिचकने (Collapse) से बचाता है।
3. परिसंचरण तंत्र के अंतर्गत, 'प्रथम हृदय ध्वनि' (Lub) का उत्पन्न होना द्विवलनी और त्रिवलनी कपाटों के खुलने के कारण होता है, जबकि 'द्वितीय हृदय ध्वनि' (Dub) अर्धचंद्रकार कपाटों के बंद होने से संबंधित है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) का संचालन रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) द्वारा किया जाता है, जिसमें संवेदी न्यूरॉन से आने वाले संकेत सीधे मोटर न्यूरॉन तक पहुँचते हैं, और इस मार्ग को प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनका कोणीय संवेग $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, और इन कक्षाओं को स्थायी कक्षाएँ या ऊर्जा स्तर कहा जाता है।
2. डी ब्रॉग्ली की परिकल्पना के अनुसार, प्रत्येक गतिमान द्रव्य कण तरंग और कण दोनों प्रकार के द्वैत (Dual) स्वभाव को प्रदर्शित करता है, और कण की तरंगदैर्ध्य उसके संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
3. पाउली के अपवर्जन नियम के अनुसार, एक ही परमाणु में उपस्थित किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m$ और $s$) के मान सर्वथा समान हो सकते हैं, बशर्ते वे भिन्न उपकोशों में स्थित हों।
4. हुंड के अधिकतम बहुलकता नियम के अनुसार, किसी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता, जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ भर न जाए, जैसा कि विकिपीडिया संदर्भ में वर्णित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी रूढ़ पिंड (Rigid Body) पर बाहरी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, तो इसे कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) कहा जाता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों (Conservative forces) के लिए ही मान्य है।
2. किसी संरक्षी बल क्षेत्र (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत बंद पथ में किए गए कार्य का मान शून्य होता है, तथा इस प्रकार के बल के विरुद्ध किया गया कार्य निकाय में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
3. जब कोई पिंड किसी खुरदरी सतह पर गति करता है, तो घर्षण बल जैसे असंरक्षी बलों (Non-conservative forces) द्वारा किया गया कार्य पथ की लंबाई पर निर्भर करता है और इसके कारण यांत्रिक ऊर्जा का ह्रास ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में होता है।
4. प्रक्षेप्य गति (Projectile Motion) के दौरान हवा के प्रतिरोध को नगण्य मानने पर, प्रक्षेप्य की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) उसके संपूर्ण गमन पथ के दौरान संरक्षित (अपरिवर्तित) रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और तापमान मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की संकल्पना को परिभाषित करता है, जिसके अनुसार यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्यावस्था में होंगे।
2. कार्नोट इंजन (Carnot Engine) एक आदर्श ऊष्मा इंजन है जिसकी दक्षता (Efficiency) कार्यकारी पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है, और यह इस बात से स्वतंत्र होती है कि इंजन किन तापमान सीमाओं के बीच कार्य कर रहा है।
3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process) के दौरान निकाय और परिवेश के मध्य ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है, जिसके परिणामस्वरूप गैस के प्रसार से उसकी आंतरिक ऊर्जा में कमी आती है और उसका ताप घट जाता है।
4. त्रिगुण बिंदु (Triple Point) वह विशिष्ट तापमान और दाब है जिस पर किसी पदार्थ की तीनों अवस्थाएँ (ठोस, द्रव और गैस) तापीय साम्यावस्था में सह-अस्तित्व में होती हैं, जैसे शुद्ध जल का त्रिगुण बिंदु 273.16 K और 0.006 atm दाब पर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आवर्त सारणी के तत्वों के विभिन्न गुणों, उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आवर्तिता (Periodicity) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की 'द्वितीय आयनन एन्थैल्पी' (Second Ionization Enthalpy) का मान हमेशा उसकी 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' से अधिक होता है, क्योंकि उदासीन परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाने के बाद बचे हुए इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और आकार छोटा हो जाता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी हैलोजन तत्वों में फ्लोरीन के लिए सर्वाधिक ऋणात्मक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है और यह अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को अत्यंत प्रबलता से आकर्षित करता है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के प्रभावस्वरूप, छठी अवधि के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पाँचवीं अवधि के उनके ठीक ऊपर वाले तत्वों (जैसे Zirconium) की तुलना में लगभग समान हो जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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