त्वरित लिंक्स
Geography
9 views
भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र के अंतर्गत सबसे बड़ा हिस्सा कुओं और नलकूपों (Tube wells) का है, जिसके माध्यम से देश की कुल सिंचित भूमि का लगभग 60% से अधिक भाग सिंचित होता है, और इसमें उत्तर प्रदेश राज्य प्रथम स्थान पर है।
- 2. 'जीन क्रांति' (Gene Revolution) का संबंध कृषि क्षेत्र में आनुवंशिक रूप से संवर्धित (GM) फसलों के विकास से है, और भारत में वाणिज्यिक स्तर पर खेती के लिए अनुमति प्राप्त एकमात्र जीएम फसल 'बीटी कपास' (Bt Cotton) है।
- 3. चावल एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है जिसके लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा और चिकनी दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है, लेकिन भारत के पूर्वी तट (जैसे डेल्टाई ओडिशा और पश्चिम बंगाल) में इसे 'आउस' और 'अमन' के साथ 'बोरो' (गर्मी के मौसम में) के रूप में वर्ष में तीन बार उगाया जाता है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'माइक्रoirrigation' (सूक्ष्म सिंचाई) पद्धतियों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाने में राजस्थान और महाराष्ट्र राज्य अग्रणी हैं, जो जल की बचत के साथ-साथ उर्वरक दक्षता को भी बढ़ाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सत्य हैं। भारत में सिंचाई का मुख्य स्रोत नलकूप और कुएँ हैं, जिनसे सबसे बड़ा सिंचित क्षेत्र कवर होता है। आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसलों में भारत में केवल बीटी कपास को ही व्यावसायिक खेती की अनुमति दी गई है। चावल की खेती भारत के विभिन्न हिस्सों में मौसम के आधार पर अमन, आउस और बोरो तीन संस्कृतियों के रूप में की जाती है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत सरकार और राज्य सरकारें जल संकट से निपटने के लिए ड्रिप और फव्वारा सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को व्यापक रूप से बढ़ावा दे रही हैं।
Related Questions
→
भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण तथा उनके निष्कर्षण क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पेट्रोलियम के कुल भंडारों का सबसे बड़ा हिस्सा टर्शरी युग की अवसादी (Sedimentary) चट्टानों में संकेंद्रित है, जिसमें पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र का 'बॉम्बे हाई' देश का सबसे बड़ा अपतटीय उत्पादक क्षेत्र है, जबकि डिगबोई असम का सबसे पुराना चालू तेल उत्पादक क्षेत्र है।
2. भारत में 'लिग्नाइट' कोयले का सबसे बड़ा भंडार तमिलनाडु के 'नेवेली' बेसिन में पाया जाता है, इसके अलावा राजस्थान के बाड़मेर, गुजरात के कच्छ और पुडुचेरी के पलूर बेसिन में भी इसके निक्षेप मौजूद हैं।
3. भारत में थोरियम का मुख्य स्रोत 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) है, जो मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों की प्लेसर बालू में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक 'यूरेनियम' का सबसे विशाल भंडार और उत्पादन झारखंड के सिंहभूम जिले के 'जादुगुड़ा' खदान से ही संपूर्ण देश की 100 प्रतिशत घरेलू मांग को पूरा करते हुए निर्यात भी किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वायुमंडल की विभिन्न परतों, उनके तापमान संबंधी विशेषताओं और वैश्विक वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षोभमंडल (Troposphere) में ऊँचाई में वृद्धि के साथ तापमान में सामान्य ह्रास दर (Normal Lapse Rate) के अनुसार कमी आती है, जबकि इसके ठीक ऊपर स्थित समताप मंडल (Stratosphere) के ऊपरी हिस्से में ओजोन गैस द्वारा पराबैंगनी किरणों के अवशोषण के कारण ऊँचाई बढ़ने पर तापमान में वृद्धि होने लगती है।
2. मध्यमंडल (Mesosphere) वायुमंडल की तीसरी परत है जो समताप सीमा के ऊपर लगभग 50 से 80 किमी की ऊँचाई तक फैली हुई है, और इस परत में अंतरिक्ष से आने वाले उल्कापिंड (Meteorites) प्रवेश करने पर जल जाते हैं तथा इस परत की ऊपरी सीमा पर वायुमंडल का न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है।
3. उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High-Pressure Belts) गतिजन्य (Dynamic) रूप से उत्पन्न होती हैं, जो पृथ्वी के घूर्णन और विषुवत वृत्त से उठने वाली हवाओं के 30° से 35° अक्षांशों के बीच नीचे बैठने (Subsidence) के फलस्वरूप निर्मित होती हैं, न कि तापीय कारणों से।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low Pressure Belt) को 'डोलड्रम' (Doldrums) कहा जाता है, जो एक गतिजन्य रूप से प्रेरित पेटी है जहाँ पृथ्वी के कोरिओलिस बल के प्रभाव से हवाएँ आपस में टकराकर नीचे बैठ जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति का मुख्य कारण ग्रीष्मकाल में भारतीय उपमहाद्वीप पर अत्यधिक ताप के कारण तीव्र निम्न वायुदाब (Low Pressure) का विकास है, जिससे मेडागास्कर के पूर्व में हिंद महासागर पर उच्च वायुदाब से हवाएँ दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों के रूप में भूमध्य रेखा को पार करके दक्षिण-पश्चिम मानसून में परिवर्तित हो जाती हैं।
2. 'मानसून प्रस्फोट' (Monsoon Burst) मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी की शाखा द्वारा असम और मेघालय की पहाड़ियों पर अचानक होने वाली मूसलाधार वर्षा को कहा जाता है, जो पूर्वोत्तर भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून के प्रवेश का प्रतीक है।
3. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) शीतकाल के दौरान भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होने वाली शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातीय प्रणालियाँ हैं, जो जेट स्ट्रीम के प्रभाव से भारत के उत्तर-पश्चिम भागों में वर्षा (महावत) लाती हैं, जो रबी फसलों (विशेषकर गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभदायक होती हैं।
4. मानसून का निवर्तन (Retreating Monsoon) मुख्य रूप से अक्टूबर और नवंबर के महीनों में होता है, जिसके दौरान आसमान साफ हो जाता है और उच्च तापमान तथा आर्द्रता के संयोजन से 'अक्टूबर की गर्मी' (October Heat) जैसी असहज स्थिति उत्पन्न होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वायुमंडल की संरचना, विभिन्न परतों की विशेषताओं और वैश्विक वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समताप मंडल (Stratosphere) की ऊपरी सीमा पर तापमान लगभग -60°C तक गिर जाता है, और इसी परत के निचले हिस्से में ओज़ोन गैस की अधिकता पाई जाती है जो पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है, तथा यह परत वाणिज्यिक विमानों की उड़ान के लिए आदर्श मानी जाती है क्योंकि यहाँ मौसम संबंधी उथल-पुथल (जैसे बादल, आंधी-तूफान) नहीं होती है।
2. आयनमंडल (Ionosphere) में स्थित 'डी' (D) और 'ई' (E) परतें रेडियो तरंगों को पृथ्वी की सतह पर परावर्तित करती हैं, जिससे लंबी दूरी के बेतार संचार (Wireless Communication) संभव होते हैं, तथा इन परतों का निर्माण उच्च ऊर्जा वाले सौर विकिरण और पराबैंगनी किरणों द्वारा गैसों के आयनीकरण के कारण होता है।
3. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी (Subtropical High-Pressure Belt) का निर्माण मुख्य रूप से तापीय (Thermal) कारणों से होता है, जहाँ भूमध्य रेखा से उठने वाली गर्म हवाएं ठंडी होकर उत्तर और दक्षिण की ओर उतरती हैं, जिसके कारण यहाँ शांत वायु का क्षेत्र (Horse Latitudes) पाया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार क्षوبमंडल (Troposphere) वायुमंडल की सबसे निचली परत है, जिसमें ऊंचाई में वृद्धि के साथ प्रति 165 मीटर की दर से तापमान में 1°C की गिरावट होती है, जिसे सामान्य ताप पतन दर (Normal Lapse Rate) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों और वर्षा के प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'फेरेल का नियम' (Ferrel's Law) के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में पवनें अपनी मूल दिशा से दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण पृथ्वी का घूर्णन और उत्पन्न होने वाला कोरियोलिस बल है।
2. 'पर्वतीय वर्षा' (Orographic Rainfall) तब होती है जब आर्द्र हवाओं का मार्ग कोई पर्वत या उच्च पठार अवरुद्ध करता है, जिससे हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है और पर्वत के पवनेतर (Leeward) ढाल पर सर्वाधिक वर्षा होती है।
3. भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में वर्ष भर संवहन धाराओं (Convectional Currents) के कारण प्रतिदिन दोपहर के बाद मूसलाधार 'संवहनीय वर्षा' (Convectional Rainfall) होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.