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Geography
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा वर्गीकृत भारतीय मृदाओं, उनकी रासायनिक संरचना और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 40% भाग पर पाई जाती है, जो मुख्य रूप से उत्तर के विशाल मैदानों और नदी घाटियों में विस्तृत है, तथा इसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता पाई जाती है जबकि फॉस्फोरस और नाइट्रोजन की कमी होती है।
  2. 2. लाल और पीली मृदा का लाल रंग क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों में लौह ऑक्साइड के व्यापक विसरण के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलीय योजन (Hydration) की स्थिति उत्पन्न होने के कारण प्रकट होता है।
  3. 3. लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और लोहे तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जिससे यह मिट्टी नाइट्रोजन और पोटाश से भरपूर होती है और कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार काली मृदा (Black Soil) में 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का विशेष गुण पाया जाता है, क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और फूल जाती है तथा सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि जलोढ़ मृदा भारत के कुल क्षेत्रफल के लगभग 43% भाग पर पाई जाती है, जो देश का सबसे बड़ा मृदा समूह है और इसमें पोटाश व चूने की अधिकता तथा नाइट्रोजन व फॉस्फोरस की कमी होती है। कथन 2 सही है क्योंकि लाल मृदा का लाल रंग लौह ऑक्साइड के विसरण के कारण तथा पीला रंग जलीय योजन (Hydration) के कारण होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि लैटेराइट मृदा में निक्षालन के कारण पोषक तत्वों (विशेषकर नाइट्रोजन, पोटाश, चूना और फास्फोरस) की भारी कमी होती है और यह सामान्यतः कृषि के लिए कम उपजाऊ होती है (यद्यपि उर्वरक और सिंचाई के बाद इस पर चाय, कॉफी और काजू उगाए जाते हैं)। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार काली मृदा में 'स्वतः जुताई' का गुण होता है, अतः कथन 4 भी सही है। इसलिए सही विकल्प (a) है।
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