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Geography
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में गोंडवाना क्रम का कोयला मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, गोदावरी और सोन नदी घाटियों में पाया जाता है, और देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 98% हिस्सा इसी क्रम से प्राप्त होता है, जो धातु कर्म (Metallurgical) और ताप विद्युत उत्पादन में प्रयुक्त होता है।
- 2. 'किरकिरी' और 'लोहरदगा' क्षेत्र झारखंड में मुख्य रूप से बॉक्साइट के प्रमुख खनन केंद्र हैं, जो एल्युमिनियम उद्योग के लिए कच्चा माल प्रदान करते हैं, जबकि देश में बॉक्साइट का सर्वाधिक भंडार ओडिशा राज्य में स्थित है।
- 3. 'राक्षस ताल' और 'लद्दाख' क्षेत्र में यूरेनियम के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं, तथा भारत में यूरेनियम का खनन मुख्य रूप से झारखंड के 'जादूगोड़ा' खदान से किया जाता है, जो सिंहभूम खनिज पट्टी का एक भाग है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में टर्शरी क्रम का कोयला मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड तथा जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु (नेवेली लिग्नाइट) के क्षेत्रों में मिलता है, जिसमें सल्फर की मात्रा अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारत में कोयले के दो प्रमुख भू-वैज्ञानिक क्रम पाए जाते हैं: गोंडवाना क्रम (जिससे देश का लगभग 98% कोयला प्राप्त होता है और यह दामोदर, महानदी, सोन व गोदावरी घाटियों में संकेंद्रित है) तथा टर्शरी क्रम (जो असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु में पाया जाता है)। झारखंड का जादूगोड़ा यूरेनियम खनन के लिए विश्व प्रसिद्ध है और सिंहभूम खनिज पट्टी का हिस्सा है। बॉक्साइट उत्पादन और भंडार के मामले में ओडिशा देश में शीर्ष पर है, जबकि झारखंड के लोहरदगा और गुमला क्षेत्र इसके प्रमुख उत्पादक हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में ऊर्जा सुरक्षा के लिए ये संसाधन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
Related Questions
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भूकंपीय तरंगों, ज्वालामुखी उद्गार की क्रियाओं और सुनामी की उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'प्राथमिक तरंगें' (Primary Waves या P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, किंतु तरल माध्यम से गुजरने पर इनका वेग कम हो जाता है तथा ये ध्वनि तरंगों की भाँति व्यवहार करती हैं।
2. 'द्वितीयक तरंगें' (Secondary Waves या S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं, जो केवल ठोस माध्यमों के माध्यम से ही संचरित हो सकती हैं और यही तरंगें पृथ्वी के बाह्य क्रोड (Outer Core) के तरल होने की पुष्टि करती हैं क्योंकि ये वहाँ विलुप्त हो जाती हैं।
3. 'सुनामी' (Tsunami) शब्द जापानी भाषा से लिया गया है, जिसकी उत्पत्ति सामान्यतः समुद्र के नीचे विवर्तनिक प्लेटों के अचानक अभिसरण या विस्थापन के परिणामस्वरूप उत्पन्न ऊर्ध्वाधर समुद्री जल के विस्थापन से होती है, और महासागरीय गहरे भागों में इसकी गति अत्यधिक तथा तरंग दैर्ध्य (Wavelength) बहुत अधिक होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रशांत महासागर की परिधि को 'अग्नि वलय' (Ring of Fire) कहा जाता है, जहाँ दुनिया के कुल सक्रिय ज्वालामुखियों का लगभग 75% हिस्सा पाया जाता है और यह क्षेत्र विश्व के सबसे बड़े भूकंपीय व विवर्तनिक रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, चट्टानों (शैल) और उनके कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्पर्श कायांतरण (Contact Metamorphism) तब होता है जब पिघला हुआ मैग्मा या लावा ठंडी और पुरानी चट्टानों के संपर्क में आता है, जिससे अत्यधिक उच्च तापमान के कारण स्थानीय स्तर पर चट्टानों के खनिज संगठन और उनकी बनावट में परिवर्तन हो जाता है।
2. स्लेट (Slate), जो कि शेल (Shale) या मडस्टोन के क्षेत्रीय कायांतरण (Regional Metamorphism) का परिणाम है, एक स्पष्ट पत्रित या शल्कित (Foliated) संरचना प्रदर्शित करती है, जिसके कारण इसका उपयोग छतों और ब्लैकबोर्ड बनाने में किया जाता है।
3. संगमरमर (Marble) और क्वार्ट्ज़ाइट (Quartzite) गैर-पत्रित (Non-foliated) कायांतरित चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं, जहाँ संगमरमर का निर्माण मूल चूना पत्थर (Limestone) के पुन:क्रिस्टलीकरण (Recrystallization) से होता है।
4. पृथ्वी की पपड़ी (Crust) में सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली आग्नेय चट्टान ग्रेनाइट है, जिसका कायांतरण होने पर वह गनीस (Gneiss) नामक कायांतरित चट्टान में परिवर्तित हो जाती है, जिसमें हल्के और गहरे रंग के खनिज पट्टियों या बैंड के रूप में व्यवस्थित हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के प्रमुख पर्वतीय दरों (Mountain Passes) और उनकी अवस्थिति तथा संयोजकता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'काराताग दर्रा' (Karatag Pass) काराकोरम श्रेणी के उत्तर में स्थित है, जो लद्दाख क्षेत्र को सीधे ताजिकिस्तान से जोड़ता है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'अग्ल दर्रा' (Aghil Pass) लद्दाख को चीन के शिनजियांग क्षेत्र से जोड़ता है और यह काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में के-2 चोटी के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
3. 'थिप्सू दर्रा' (Thipsu Pass) और 'मला दर्रा' हिमाचल प्रदेश में स्थित प्रमुख दर्रे हैं जो स्पीति घाटी को लद्दाख से जोड़ते हैं।
4. 'तुजू दर्रा' (Tuiu Pass) मणिपुर राज्य में स्थित है, जो इम्फाल को म्यांमार के ताम्मू क्षेत्र से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) अपवाह का प्रमुख उदाहरण हैं, जो हिमालय के उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों और गार्ज का निर्माण करती हैं, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ अनुगामी (Consequent) और पुनरुज्जीवित (Rejuvenated) अपवाह का प्रतिनिधित्व करती हैं।
2. नर्मदा और ताप्ती नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की उन विशिष्ट नदियों में शामिल हैं जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, और ये दोनों नदियाँ प्राचीन भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर गुजरती हैं।
3. 'सिंधु नदी तंत्र' की सहायक नदी सतलुज तथा 'ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र' की सहायक नदी यारलोंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) दोनों ही तिब्बत क्षेत्र में मानसरोवर झील के निकटवर्ती स्थानों से उद्गम प्राप्त करती हैं।
4. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ ग्रीष्मकाल में भी पिघलने वाले विशाल हिमनदों (Glaciers) पर निर्भर होने के कारण बारहमासी (Perennial) प्रवाह प्रदर्शित करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, आर्द्रता के प्रकार और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रोज़बी तरंगे' (Rossby Waves) ऊपरी क्षोभमंडल में प्रवाहित होने वाली लंबी वायुमंडलीय तरंगे हैं, जो पृथ्वी के घूर्णन (कोरिolis प्रभाव) के कारण उत्पन्न होती हैं और यह जेट स्ट्रीम की गति तथा शीतोष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विकास को नियंत्रित करती हैं।
2. 'निरपेक्ष आर्द्रता' (Absolute Humidity) किसी निश्चित तापमान पर वायु के प्रति इकाई आयतन में मौजूद जलवाष्प के वास्तविक भार को दर्शाती है, जिसे सामान्यतः ग्राम प्रति घन मीटर में मापा जाता है, और तापमान में परिवर्तन होने पर भी यह मान पूरी तरह स्थिर रहता है।
3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के केंद्र में स्थित 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) एक ऐसा क्षेत्र होता है जहाँ वायुदाब न्यूनतम होता है, आसमान बिल्कुल साफ होता है, हल्की हवाएँ चलती हैं और तापमान उच्च होता है, जबकि इसके चारों ओर दीवार बादलों (Eye Wall) में भारी वर्षा और तीव्रतम पवनें चलती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार चक्रवातों को ऊर्जा मुख्य रूप से महासागरीय सतह से मिलने वाली गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Condensation) के संघनन से प्राप्त होती है, जिसके लिए समुद्र की सतह का न्यूनतम तापमान 26.5°C या उससे अधिक होना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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