त्वरित लिंक्स
Geography
9 views
भूकंपीय तरंगों की गतिकी, ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार और सुनामी तरंगों के संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों के समान चट्टानों में संपीडन और विरलन (Compression and Rarefaction) पैदा करती हैं, और ये ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, हालांकि तरल माध्यम में इनकी गति मंद हो जाती है।
- 2. 'शिल्ड ज्वालामुखी' (Shield Volcanoes) मुख्य रूप से कम श्यानता (Low viscosity) वाले बेसिक या बेसाल्टिक लावा के शांत और लावलेय उद्गार से निर्मित होते हैं, जो ढालू शंकु के बजाय चौड़े और कम ढलान वाले गुंबद का निर्माण करते हैं, जैसे हवाई द्वीप के मौना लोआ (Mauna Loa)।
- 3. महासागरीय नितल पर उत्पन्न होने वाली सुनामी तरंगें गहरे समुद्र में अत्यधिक विनाशकारी और ऊंची होती हैं, क्योंकि महासागरीय बेसिन की अपार गहराई में जलकणों का क्षैतिज विस्थापन बहुत तीव्र होता है और तटों के समीप पहुँचने पर घर्षण के कारण इनकी गति अचानक बढ़ जाती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रिक्टर पैमाना (Richter Scale) भूकंप की ऊर्जा या परिमाण (Magnitude) को मापता है जो एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है, जिसका अर्थ है कि पैमाने पर प्रत्येक 1 अंक की वृद्धि भूकंप द्वारा मुक्त की जाने वाली ऊर्जा में लगभग 32 गुना की वृद्धि को दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि P-तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं और ध्वनि तरंगों की भाँति ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों में संचरण कर सकती हैं। कथन 2 सही है क्योंकि शिल्ड ज्वालामुखी कम श्यानता वाले बेसाल्टिक अलावा के प्रवाह से बनते हैं और चौड़े गुंबद का रूप लेते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि गहरे समुद्र में सुनामी तरंगों की ऊँचाई बहुत कम (लगभग 1 मीटर से कम) होती है और उनकी तरंगदैर्ध्य बहुत लंबी होती है; तटों के समीप उथले पानी में आने पर घर्षण के कारण इनकी गति कम होती है लेकिन इनकी ऊँचाई (Amplitude) में विस्फोटक वृद्धि हो जाती है। कथन 4 सही है क्योंकि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रिक्टर पैमाना एक लघुगणकीय पैमाना है जो प्रति 1 अंक वृद्धि पर लगभग 32 गुना ऊर्जा वृद्धि दर्शाता है।
Related Questions
→
भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) और नदियों के उद्गम तथा मार्ग विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट चेमायुंगडुंग ग्लेशियर से निकलती है, जहाँ इसे 'त्संगपो' (Tsangpo) कहा जाता है, और यह असम घाटी में प्रवेश करने से पहले नामचा बारवा पर्वत के निकट एक गहरे महाखड्ड (Gorge) का निर्माण करते हुए यू-टर्न (U-turn) लेती है।
2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, क्योंकि ये नदियाँ प्राचीन पठार के धंसने और उत्थान के साथ-साथ विकसित हुई हैं और अपने पुराने मार्ग पर प्रवाहित होते हुए अत्यधिक विसर्पण (Meandering) करती हैं।
3. गोदावरी नदी महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर से निकलती है और यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसे इसकी विशालता और सांस्कृतिक महत्व के कारण 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' कहा जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदी 'सतलुज' मानसरोवर के पास राक्षस ताल से निकलती है और यह एक पूर्ववर्ती नदी है जो शिपकी ला दर्रे से भारत में प्रवेश करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सौर मंडल के क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt), बौने ग्रहों (Dwarf Planets) और ओर्ट मेघ (Oort Cloud) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षुद्रग्रह पेटी मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के मध्य स्थित है, जिसमें पाए जाने वाले अधिकांश क्षुद्रग्रहों में 'सेरेस' (Ceres) सबसे बड़ा पिंड है जिसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा बौना ग्रह घोषित किया गया है।
2. 'काइपर बेल्ट' (Kuiper Belt) नेपच्यून की कक्षा से परे सूर्य से लगभग 30 से 50 खगोलीय इकाई की दूरी तक फैली हुई एक तश्तरीनुमा डिस्क है, जहाँ से दीर्घकालिक पुच्छल तारा (Comets) उत्पन्न होते हैं।
3. 'ओर्ट मेघ' सौर मंडल की सबसे बाहरी सीमा पर स्थित एक काल्पनिक गोलाकार खोल (Spherical Shell) है, जो सूर्य से लगभग 2,000 से 100,000 खगोलीय इकाई की दूरी तक फैला हुआ माना जाता है और यह दीर्घकालिक धूमकेतुओं का प्रमुख भंडार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
भारत के प्रमुख उद्योगों और परिवहन बुनियादी ढांचे (राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल और जलमार्ग) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का पहला नियोजित और आधुनिक सूती वस्त्र उद्योग वर्ष 1854 में बॉम्बे (मुंबई) में कावसजी डाबर द्वारा स्थापित किया गया था, और यह उद्योग मुख्य रूप से कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता, नम जलवायु और आर्द्र परिस्थितियों के कारण महाराष्ट्र और गुजरात तक सीमित रहा।
2. 'राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1' (NW-1) हल्दिया से प्रयागराज तक गंगा-भागीरथी-हूगली नदी प्रणाली पर स्थित है, जो देश का सबसे लंबा आंतरिक जलमार्ग है और इसकी कुल लंबाई लगभग 1,620 किलोमीटर है।
3. कोंकण रेलवे (Konkan Railway) परियोजना एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो महाराष्ट्र के रोहा को कर्नाटक के मंगलुरु तक जोड़ती है और पश्चिमी घाट (सह्याद्री पर्वतमाला) के दुर्गम भूभाग से गुजरते हुए कई सुरंगों और पुलों का निर्माण करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
भारतीय मृदाओं की आनुवंशिक विशेषताओं, रासायनिक संरचना और उनके भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'क्षारीय और लवणीय मृदा' (Saline and Alkaline Soils), जिसे स्थानीय भाषा में 'रेह', 'कल्लर' या 'ऊसर' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों तथा नहरों द्वारा सिंचित अधिक जल-भराव वाले क्षेत्रों में विकसित होती है, जिसमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के लवणों की अधिकता पाई जाती है।
2. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soils) का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और तीव्र वर्षा के कारण 'निक्षालन' (Leaching) की तीव्र प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका जैसे घुलਨशील तत्व बह जाते हैं और आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ और गेहूँ की खेती के लिए सर्वोत्तम होती है।
3. 'काली मृदा' (Black Soils), जिसे रेगुर या उष्णकटिबंधीय चेर्नोज़म भी कहा जाता है, में लोहे, चूने, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम की अधिकता होती है, तथा इसमें स्व-जुताई (Self-ploughing) का गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी हो जाती है और सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं।
4. 'लाल और पीली मृदा' (Red and Yellow Soils) का विकास प्राचीन रवेदार (Crystalline) और कायांतरित चट्टानों पर होता है, जहाँ फेरिक ऑक्साइड्स की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है, जबकि जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है, और यह मृदा सामान्यतः नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा ह्यूमस की कमी दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों—पर्वतों, पठारों, मैदानों और मरुस्थलों की उत्पत्ति एवं विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अटाकामा मरुस्थल' (Atacama Desert) दक्षिण अमेरिका में एंडीज पर्वतमाला के पूर्वी वृष्टिच्छाया (Rain shadow) क्षेत्र में स्थित विश्व के सबसे शुष्क मरुस्थलों में से एक है, जहाँ प्रशांत महासागर की गर्म जलधारा के प्रभाव से अत्यधिक वर्षा नहीं हो पाती है।
2. 'तिब्बत का पठार' (Tibetan Plateau) विश्व का सबसे ऊँचा और सबसे बड़ा अंतःपर्वतीय (Intermontane) पठार है, जो भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के अभिसरण के परिणामस्वरूप निर्मित हुआ है।
3. 'ग्रेट बेसिन मरुस्थल' संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा मरुस्थल है, जो एक शीत-शीतशीतोष्ण (Cold/Temperate) मरुस्थल का उदाहरण है और यह रॉकी पर्वत तथा सिएरा नेवादा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है।
4. 'ब्लैक फॉरेस्ट' (Black Forest) पर्वत जर्मनी में स्थित एक प्रमुख वलित (Fold) पर्वत का उदाहरण है, जो राइन नदी घाटी के समानांतर फैला हुआ है और इसके निर्माण में विवर्तनिक संपीडन बलों की मुख्य भूमिका रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.