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Geography
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भारतीय मृदाओं की आनुवंशिक विशेषताओं, रासायनिक संरचना और उनके भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'क्षारीय और लवणीय मृदा' (Saline and Alkaline Soils), जिसे स्थानीय भाषा में 'रेह', 'कल्लर' या 'ऊसर' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों तथा नहरों द्वारा सिंचित अधिक जल-भराव वाले क्षेत्रों में विकसित होती है, जिसमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के लवणों की अधिकता पाई जाती है।
- 2. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soils) का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और तीव्र वर्षा के कारण 'निक्षालन' (Leaching) की तीव्र प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका जैसे घुलਨशील तत्व बह जाते हैं और आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ और गेहूँ की खेती के लिए सर्वोत्तम होती है।
- 3. 'काली मृदा' (Black Soils), जिसे रेगुर या उष्णकटिबंधीय चेर्नोज़म भी कहा जाता है, में लोहे, चूने, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम की अधिकता होती है, तथा इसमें स्व-जुताई (Self-ploughing) का गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी हो जाती है और सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं।
- 4. 'लाल और पीली मृदा' (Red and Yellow Soils) का विकास प्राचीन रवेदार (Crystalline) और कायांतरित चट्टानों पर होता है, जहाँ फेरिक ऑक्साइड्स की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है, जबकि जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है, और यह मृदा सामान्यतः नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा ह्यूमस की कमी दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि लवणीय और क्षारीय मृदाओं में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों की अधिकता होती है जो इन्हें अनुजाऊ बनाते हैं और इन्हें 'रेह' या 'ऊसर' भी कहा जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि लैटेराइट मृदा अत्यधिक निक्षालन के कारण पोषक तत्वों से विहीन होती है और यह उपजाऊ नहीं होती, बल्कि यह मुख्य रूप से काजू, चाय और कॉफी की खेती के लिए उपयुक्त होती है (गेहूँ के लिए नहीं)। कथन 3 सही है क्योंकि काली मृदा में स्व-जुताई का अनोखा गुण पाया जाता है। कथन 4 सही है क्योंकि लाल और पीली मृदाएं क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों पर विकसित होती हैं और इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस व ह्यूमस की कमी होती है। भारतीय मृदा विज्ञान से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारत के भौगोलिक विस्तार, सीमाई बिंदुओं और देशांतर-अक्षांशीय रेखाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांशों के मध्य है, जबकि इसके सुदूर दक्षिणतम बिंदु 'इंदिरा पॉइंट' का अक्षांश 6°45' उत्तर है जो ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है।
2. भारत का देशांतर विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व तक है, जिसके कारण देश के सबसे पश्चिमी छोर (गुजरात के गुहारामती) और सबसे पूर्वी छोर (अरुणाचल प्रदेश के किबिथु) के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर पाया जाता है।
3. 82°30' पूर्वी देशांतर रेखा को भारत की 'मानक याम्योत्तर' (Standard Meridian) माना गया है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गुजरती है और यह रेखा कुल पाँच राज्यों — उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर जाती है।
4. भारत की स्थलीय सीमा की कुल लंबाई लगभग 15,200 किमी है, जो उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान, उत्तर में चीन (तिब्बत), पूर्व में नेपाल और भूटान, तथा सुदूर पूर्व में म्यांमार एवं बांग्लादेश के साथ साझा होती है, जिसमें सर्वाधिक लंबी सीमा म्यांमार के साथ लगती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत में सिंचाई प्रणालियों, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. देश के कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र में 'नहर सिंचाई' का हिस्सा सबसे अधिक है, जिसके बाद दूसरा स्थान नलकूपों और अन्य कुओं का आता है, और उत्तर प्रदेश राज्य में कुल सिंचित क्षेत्र के अंतर्गत नलकूपों द्वारा सिंचाई का प्रतिशत सर्वाधिक पाया जाता है।
2. 'शून्य जुताई' (Zero Tillage) या न्यूनतम जुताई एक संरक्षण कृषि तकनीक है, जो पिछले फसल अवशेषों को मिट्टी की सतह पर बिना जलाए सीधे बुवाई करने में मदद करती है, जिससे मृदा की नमी बनी रहती है और मृदा अपरदन में कमी आती है।
3. 'धान' (Oryza sativa) एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है जिसके लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), प्रचुर मात्रा में जल और चिकनी दोमट या मटियार चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है, और यह पंजाब तथा हरियाणा जैसे पारंपरिक रूप से कम वर्षा वाले राज्यों में नहरों के व्यापक विस्तार के कारण बड़े पैमाने पर उगाई जाती है।
4. 'सफेद सोना' के रूप में प्रसिद्ध कपास की फसल के विकास के लिए कम से कम 210 पाला-रहित दिन, तेज धूप और गहरी काली मिट्टी (रेगुर) का होना अनिवार्य है, तथा यह मुख्य रूप से दक्कन के पठार के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के प्रमुख पर्वतीय क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों और उनमें स्थित प्रसिद्ध घाटियों (Valleys) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मरखा घाटी' (Markha Valley) लद्दाख श्रेणी और जास्कर श्रेणी के मध्य स्थित एक प्रसिद्ध घाटी है, जो अपने विषम भू-दृश्य और ट्रेकिंग मार्गों के लिए जानी जाती है तथा हेमिस राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आती है।
2. 'संगला घाटी' (Sangla Valley), जिसे बास्पा घाटी भी कहा जाता है, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है और यह धौलाधार श्रेणी के उत्तर में ग्रेटर हिमालय तथा तिब्बत की सीमा के मध्य स्थित है।
3. 'जुहू घाटी' या 'चुम्बी घाटी' (Chumbi Valley) सिक्किम, भूटान और तिब्बत की त्रि-संधि (Tri-junction) पर स्थित है, जो एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक गलियारा है और दार्जिलिंग से ल्हासा जाने वाले प्राचीन व्यापारिक मार्ग पर पड़ती है।
4. उत्तराखंड में स्थित 'नीति घाटी' और 'माना घाटी' क्रमशः महान हिमालय (Greater Himalayas) क्षेत्र में स्थित हैं, जो तिब्बत के साथ प्राचीन काल से व्यापारिक द्वारों के रूप में उपयोग होती रही हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति तथा वर्षा के स्थानिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानों में अत्यधिक ताप के कारण 'मानसून गर्त' (Monsoon Trough) का निर्माण होता है, जो अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का ही ग्रीष्मकालीन विस्थापन रूप है और यह दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाओं को आकर्षित करता है जो भूमध्य रेखा पार करने के बाद फेरेल के नियम के कारण दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुड़ जाती हैं।
2. भारतीय मानसून की 'अरब सागर शाखा' पश्चिमी घाट से टकराकर भारी वर्षा करती है, जिसके कारण पश्चिमी घाट के पवन-विमुख ढाल (Leeward Side) पर स्थित क्षेत्र 'वृष्टि-छाया क्षेत्र' के अंतर्गत आते हैं जहाँ अपेक्षाकृत बहुत कम वर्षा होती है, जैसे कि पुणे और बेंगलुरु का क्षेत्र।
3. 'अल नीनो' (El Nino) घटना के दौरान प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से (पेरू तट के पास) में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में वायुदाब और पवन तंत्र कमजोर पड़ जाता है और सामान्यतः भारत में सूखे या मानसूनी वर्षा में भारी कमी की स्थिति उत्पन्न होती है।
4. तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन दक्षिण-पश्चिम मानसून से सबसे अधिक वर्षा प्राप्त होती है, क्योंकि यह राज्य पश्चिमी घाट के ठीक पीछे वृष्टि-छाया क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद बंगाल की खाड़ी की शाखा के समानांतर स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत की मृदा प्रणालियों और उनके विशिष्ट रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मिट्टियाँ (Red and Yellow Soils) मुख्य रूप से प्राचीन रवेदार और रूपांतरित चट्टानों पर लौह धातु के व्यापक विसरण (Diffusion) के कारण बनती हैं, और ये ऊपरी भागों में लाल रंग की तथा निचले गहरे गड्ढों में जलयोजन (Hydration) के कारण पीले रंग की दिखाई देती हैं।
2. काली मृदा (Black Soil), जिसे स्थानीय रूप से 'रेगुर मृदा' कहा जाता है, अत्यधिक आर्द्रता की स्थिति में चिपचिपी हो जाती है और सूखने पर इसमें चौड़ी व गहरी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे इसमें स्वतः जुताई (Self-ploughing) का गुण पाया जाता है।
3. लेटराइट मृदा (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) की प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें चूना और सिलिका का बड़े पैमाने पर क्षालन हो जाता है तथा लौह एवं एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष रह जाते हैं।
4. लवणीय और क्षारीय मृदाओं (Saline and Alkaline Soils), जिन्हें 'रेर', 'उह्र', और 'कल्लर' भी कहा जाता है, में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों की अधिकता होती है, और ये मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ होने के कारण धान की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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