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Geography
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) के वितरण, उनकी उत्पत्ति के कारकों और उनके क्षेत्रीय प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'फोकलैंड जलधारा' (Falkland Current) दक्षिण अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली एक ठंडी जलधारा है, जो अंटार्कटिका के ठंडे जल को उत्तर की ओर लाते हुए दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट (अर्जेन्टीना के तट) के सहारे प्रवाहित होती है।
- 2. उत्तरी गोलार्ध के उच्च अक्षांशों में 'अलास्का जलधारा' (Alaska Current) एक ठंडी जलधारा का प्रमुख उदाहरण है, जो उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर उत्तर की ओर बहते हुए वहाँ के तटीय तापमान को अत्यधिक हिमाच्छादित कर देती है।
- 3. 'पश्चिमी ऑस्ट्रेलेई जलधारा' (West Australian Current) हिंद महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट के सहारे दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और इस क्षेत्र में शुष्क जलवायु तथा मरुस्थलीकरण के विकास में सहायक होती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय जलधाराओं की दिशा में मौصमी परिवर्तन (Seasonal Reversal) मुख्य रूप से उत्तरी हिंद महासागर में मानसूनी हवाओं के प्रभाव के कारण स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि फोकलैंड जलधारा अटलांटिक महासागर में दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे बहने वाली एक ठंडी जलधारा है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'अलास्का जलधारा' एक **गर्म जलधारा** है, जो अलास्का के तट के पास प्रवाहित होकर वहाँ के बंदरगाहों को सर्दियों में भी जमने नहीं देती। कथन 3 सही है क्योंकि पश्चिमी ऑस्ट्रेलेई जलधारा हिंद महासागर की एक ठंडी जलधारा है जो पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मरुस्थलों (जैसे ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल) के निर्माण में योगदान देती है। कथन 4 सही है क्योंकि मानसूनी हवाओं की दिशा बदलने के कारण उत्तरी हिंद महासागर की जलधाराओं की दिशा गर्मियों और सर्दियों में बदल जाती है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय धाराएं पृथ्वी पर ऊष्मा के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Related Questions
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भारत की जलवायु और मानसून की उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानों में अत्यधिक ताप के कारण 'मानसूनी गर्त' (Monsoon Trough) का विकास होता है, जो अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का ही ग्रीष्मकालीन उत्तर की ओर खिसका हुआ रूप है।
2. तिब्बत का पठार ग्रीष्मकाल में एक विशाल 'उष्ण उच्चावच' (Thermal High) के रूप में कार्य करता है, जो जेट स्ट्रीम को अपने उत्तर और दक्षिण की शाखाओं में विभाजित कर देता है और भारतीय मानसून को आकर्षित करने में सहायक होता है।
3. 'मैडन-जूलियन दोलन' (MJO - Madden-Julian Oscillation) एक पूर्व की ओर बढ़ने वाली बादलों और वर्षा की महासागरीय प्रणाली है, जिसका प्रभाव भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की सक्रियता और अंतराधन (Break in Monsoon) की अवधि को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण होता है।
4. दक्षिणी गोलार्ध की दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ जब विषुवत रेखा को पार करती हैं, तो कोरियॉलििस बल (Coriolis Force) के प्रभाव से इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम हो जाती है, जिससे ये हवाएँ भारतीय उपमहाद्वीप में 'दक्षिण-पश्चिम मानसून' के रूप में प्रवेश करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पवन प्रणालियों, आर्द्रता, वर्षा के प्रकार और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भूमध्यरेखीय शांत पेटी' (Doldrums) निम्न वायुदाब का एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ व्यापारिक पवनें (Trade winds) आकर मिलती हैं और इस अभिसरण (Convergence) के कारण यहाँ गर्म हवाएँ ऊपर उठती हैं, जिससे संवहन धाराओं (Convection currents) का निर्माण होता है और प्रतिदिन दोपहर के बाद मूसलाधार संवहनी वर्षा (Convectional rainfall) होती है।
2. 'चिनूक' (Chinook) और 'फॉहन' (Foehn) स्थानीय पवनें क्रमशः रॉकी पर्वत और अल्प्स पर्वत के पवन-विमुखी ढलान पर नीचे उतरने वाली शुष्क और गर्म पवनें हैं, जिन्हें 'हिम-भक्षक' (Snow-eaters) भी कहा जाता है क्योंकि ये सर्दियों में बर्फ को जल्दी पिघला देती हैं।
3. 'सापेक्ष आर्द्रता' (Relative Humidity) किसी निश्चित तापमान पर हवा में मौजूद जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर हवा की जलवाष्प धारण करने की अधिकतम क्षमता का अनुपात होती है, और तापमान बढ़ने पर सापेक्ष आर्द्रता का मान सामान्यतः कम हो जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) की ऊर्जा का मुख्य स्रोत संघनन की गुप्त उष्मा (Latent heat of condensation) होती है, जिसके कारण ये चक्रवात जमीन पर पहुँचने के बाद नमी की आपूर्ति रुकने से कमजोर पड़कर समाप्त हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय मृदाओं की आनुवंशिक विशेषताओं, रासायनिक संरचना और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'नवीन जलोढ़ मृदा' को खादर (Khadar) कहा जाता है, जिसमें पोटेशियम और चूने की प्रचुरता होती है लेकिन नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी पाई जाती है, और यह मृदा बाढ़ के मैदानों में प्रतिवर्ष नई मिट्टी के निक्षेपण से बनती है।
2. 'काली मृदा' मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप के बेसाल्ट चट्टानों के अपक्षय से बनी है, जिसमें नमी धारण करने की अपार क्षमता होती है, तथा इसमें लोहे, चूने, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम की अधिकता होती है लेकिन फॉस्फोरस, नाइट्रोजन और जैविक पदार्थों की कमी पाई जाती है।
3. 'लैटेराइट मृदा' का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और तीव्र वर्षा के कारण 'निक्षालन' (Leaching) प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ और धान की खेती के लिए सर्वोत्तम बन जाती है।
4. 'शुष्क और मरुस्थलीय मृदा' में घुलनशील लवणों और फास्फेट की मात्रा अधिक होती है, जबकि इसमें नाइट्रोजन और ह्यूमस नगण्य होते हैं, और इसकी निचली परतों में कैल्सियम कार्बोनेट की अधिकता के कारण 'कंकड़' की परत पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत की पर्वत प्रणालियों, उनकी संरचनात्मक विशेषताओं और प्रमुख घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लद्दाख श्रेणी' (Ladakh Range) ट्रांस-हिमालय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो ज़ांस्कर श्रेणी के उत्तर में और काराकोरम श्रेणी के दक्षिण में सिंधु नदी के समानांतर फैली हुई है।
2. 'धौलाधार श्रेणी' (Dhauladhar Range) लघु हिमालय (Lesser Himalayas) का एक प्रमुख भाग है, जो मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश में स्थित है और इसके दक्षिणी ढलानों पर प्रसिद्ध पर्यटक स्थल 'शिमला' स्थित है, जबकि शिमला स्वयं धौलाधार पर न होकर एक अन्य रिज पर है, परंतु कुल्लू घाटी इसी श्रेणी के उत्तर में स्थित है।
3. 'न्युम्ब्रा घाटी' (Nubra Valley) काराकोरम और लद्दाख श्रेणियों के मध्य प्रवाहित होने वाली श्योक नदी की सहायक नदियों द्वारा निर्मित एक उच्च-तुंगता वाली ठंडी मरुस्थलीय घाटी है, जिसे सियाचिन ग्लेशियर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।
4. 'पालघाट दर्रा' (Palghat Gap) पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग में स्थित एक प्रमुख विखंडन या गैप है, जो नीलगिरी पहाड़ियों को अन्नामलाई और पालनी पहाड़ियों से अलग करता है और केरल को तमिलनाडु से जोड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वायुमंडल की विभिन्न परतों, उनके तापीय गुणों और वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समताप मंडल (Stratosphere) की निचली सीमा में ओजोन गैस की प्रचुरता पाई जाती है, जो पराबैंगनी किरणों का अवशोषण कर इस परत में ऊंचाई के साथ तापमान में वृद्धि करती है, और यहीं जेट विमानों की उड़ान के लिए आदर्श दशाएं मिलती हैं।
2. क्षोभमंडल (Troposphere) में ऊंचाई के साथ तापमान में होने वाली गिरावट की सामान्य दर (Normal Lapse Rate) लगभग 6.5 डिग्री सेल्सियस प्रति 1,000 मीटर होती है, जिसका मुख्य कारण पृथ्वी के धरातल से निकलने वाली पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) द्वारा इस परत का गर्म होना है।
3. भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low Pressure Belt), जिसे 'डोलड्रम' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से गतिकीय रूप से प्रेरित (Dynamically Induced) होती है, जहाँ पृथ्वी के घूर्णन के कारण हवाएं नीचे बैठती हैं।
4. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High Pressure Belts) थर्मल कारणों से उत्पन्न होती हैं, जो वर्ष भर अत्यधिक सूर्यताप के कारण हवाओं के गर्म होकर ऊपर उठने से निर्मित होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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