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Geography
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भूकंपीय तरंगों, ज्वालामुखी उद्गार की क्रियाप्रणाली और हॉटस्पॉट (Hotspot) विवर्तनिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गमन कर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं और ये केवल ठोस माध्यमों में ही यात्रा कर सकती हैं।
- 2. 'हॉटस्पॉट' सिद्धांत के अनुसार, मेंटल प्लूम (Mantle Plumes) अत्यधिक गहराई से ऊपर उठने वाले गर्म मैग्मा के स्तंभ होते हैं जो प्लेटों की गति से स्वतंत्र रूप से स्थिर रहते हैं, और इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण हवाई द्वीप श्रृंखला का निर्माण है।
- 3. विस्फोटी या विस्फोटक प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार (जैसे स्ट्रॉम्बोलियन या वल्कैनियन) मुख्य रूप से कम सिलिका वाले और अत्यधिक तरल 'बेसाल्टिक मैग्मा' के शांत प्रवाह के कारण उत्पन्न होते हैं।
- 4. प्रशांत महासागर की परिधि पर स्थित 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) और अपसारी (Divergent) प्लेट किनारों के मिलने के कारण दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखी क्षेत्र बनता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि प्राथमिक तरंगें (P-waves) ध्वनि तरंगों की भाँति संपीड़न और विरलन के माध्यम से सभी अवस्थाओं (ठोस, तरल, गैस) में चल सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) केवल ठोस माध्यम से ही गुजरती हैं और तरल क्रोड में लुप्त हो जाती हैं। कथन 2 सही है क्योंकि हॉटस्पॉट और मेंटल प्लूम विवर्तनिक प्लेटों के आंतरिक भाग या सीमाओं से परे स्थिर स्रोत के रूप में कार्य करते हैं, जिससे हवाई द्वीप जैसे ज्वालामुखी द्वीप बनते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि अत्यधिक विस्फोटक प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार उच्च सिलिका और गाढ़े (Viscous) 'एंड्रिसिटिक या रियोलाइटिक मैग्मा' के कारण होते हैं, न कि बेसाल्टिक मैग्मा के कारण। कथन 4 गलत है क्योंकि रिंग ऑफ फायर मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) और रूपांतरित प्लेट किनारों पर सक्रिय है, न कि अपसारी किनारों पर। इस विषय पर अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ अपने उद्गम से लेकर मुहाने तक विसर्पण (Meandering) जैसी युवावस्था की स्थलाकृतियों का निर्माण करती हुई मैदानों में विशाल डेल्टा बनाती हैं, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ परिपक्व अवस्था में पहुँचकर अपने मार्ग में केवल ऐश्वरी (Estuary) का निर्माण करती हैं।
2. 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का एक उत्कृष्ट उदाहरण हिमालयी नदियाँ (जैसे- सिंधु, सतलज और ब्रह्मपुत्र) हैं, जो हिमालय के उत्थान से पहले से बह रही थीं और उन्होंने पहाड़ों को काटकर गार्ज (Gorges) का निर्माण किया है।
3. प्रायद्वीपीय नदियों का प्रवाह मुख्य रूप से ढाल की दिशा (पश्चिम से पूर्व की ओर, नर्मदा और ताप्ती को छोड़कर) पर निर्भर करता है, और ये नदियाँ अपनी घाटियों की 'आधार तल' (Base Level) को प्राप्त कर चुकी हैं, जिसके कारण ये मौसमी (Non-perennial) होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के परिवहन नेटवर्क, प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर और बंदरगाहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पूर्वी समर्पित माल गलियारा' (Eastern Dedicated Freight Corridor - EDFC) लुधियाना (पंजाब) से शुरू होकर अंबाला, दिल्ली, कानपुर और प्रयागराज होते हुए पश्चिम बंगाल के दनकुनी तक जाता है, जो पूरी तरह से कोयला और विद्युत आपूर्ति के लिए कोयला खदानों को जोड़ता है।
2. 'सागरमाला परियोजना' (Sagarmala Project) भारत सरकार की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य देश की विशाल तटरेखा का दोहन करके बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, तटीय नौवहन को बढ़ावा देना और तटीय क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति देना है।
3. 'विशाखापत्तनम बंदरगाह' देश का सबसे गहरा भूमि-आबद्ध (Land-locked) और सुरक्षित बंदरगाह है, जो मुख्य रूप से जापान को लौह अयस्क के निर्यात के लिए जाना जाता है और इसके सामने 'डॉल्फिन नोज' पहाड़ी प्राकृतिक रक्षक का काम करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-44 (National Highway 44) है, जो उत्तर में श्रीनगर से शुरू होकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक लगभग 3,745 किलोमीटर की दूरी तय करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय मृदा के वर्गीकरण और उनकी रासायनिक एवं भौतिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का लाल रंग मुख्य रूप से रवेदार और कायांतरित चट्टानों में लोहे के व्यापक विसरण (Diffusion) के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलयोजन (Hydration) की स्थिति उत्पन्न होने के बाद दिखाई देता है।
2. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) का परिणाम है, जिसमें ह्यूमस की मात्रा प्रचुर होती है, किंतु सिलिका और चूने का निक्षालन हो जाने के कारण यह मृदा कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है और इसमें उर्वरकों की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।
3. क्षारीय एवं लवणीय मृदा (Saline and Alkaline Soils), जिन्हें 'रेर', 'उह्र', 'कल्लर' या 'चोपन' भी कहा जाता है, में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अधिक होता है, और यह शुष्क तथा अर्ध-शुष्क जलवायु वाले उन क्षेत्रों में विकसित होती है जहाँ जल निकास (Drainage) की उचित व्यवस्था नहीं होती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण, आर्द्रता और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ट्रोपोस्फेयर (क्षोभमंडल) में दाब प्रवणता बल (Pressure Gradient Force) और कोरिओलिस बल (Coriolis Force) के पूर्ण संतुलन से जब पवनें समदाब रेखाओं के बिल्कुल समानांतर बहने लगती हैं, तो उन्हें 'भूविक्षेपी पवन' (Geostrophic Wind) कहा जाता है।
2. 'उष्णकटिबंधीय चक्रवातों' (Tropical Cyclones) के विपरीत, 'शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात' (Temperate Cyclones) केवल उष्णकटिबंधीय महासागरीय सतह पर ही विकसित होते हैं और इनके निर्माण के लिए समुद्री सतह का तापमान न्यूनतम 27°C होना अनिवार्य होता है।
3. वायुमंडल में संतृप्ति (Saturation) की स्थिति प्राप्त होने पर सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) 100% हो जाती है, और जिस तापमान पर वायु संतृप्त हो जाती है, उसे 'ओसांक' (Dew Point) कहा जाता है।
4. फेरल का नियम (Ferrel's Law) यह स्पष्ट करता है कि पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न कोरिओलिस बल उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों और प्रमुख फसलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) के अंतर्गत 'ड्रिप' और 'स्प्रिंकलर' प्रणालियों को शामिल किया जाता है, जो जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को पारंपरिक बाढ़ सिंचाई की तुलना में काफी बढ़ा देती हैं और इससे वाष्पीकरण द्वारा जल की हानि न्यूनतम होती है।
2. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत शुरू की गई 'परम्परागत कृषि विकास योजना' (PKVK) का मुख्य उद्देश्य सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करके रासायनिक मुक्त खेती और जैविक कृषि (Organic Farming) को बढ़ावा देना है।
3. भारत में 'धान' की खेती के लिए न्यूनतम 100 सेमी से अधिक वर्षा और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है, और यह केवल उन्हीं राज्यों में उगाई जा सकती है जहाँ सिंचित नहरों का जाल बिछा हुआ है, क्योंकि यह वर्षा आधारित फसल बिल्कुल नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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