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Geography
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों और प्रमुख फसलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) के अंतर्गत 'ड्रिप' और 'स्प्रिंकलर' प्रणालियों को शामिल किया जाता है, जो जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को पारंपरिक बाढ़ सिंचाई की तुलना में काफी बढ़ा देती हैं और इससे वाष्पीकरण द्वारा जल की हानि न्यूनतम होती है।
  2. 2. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत शुरू की गई 'परम्परागत कृषि विकास योजना' (PKVK) का मुख्य उद्देश्य सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करके रासायनिक मुक्त खेती और जैविक कृषि (Organic Farming) को बढ़ावा देना है।
  3. 3. भारत में 'धान' की खेती के लिए न्यूनतम 100 सेमी से अधिक वर्षा और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है, और यह केवल उन्हीं राज्यों में उगाई जा सकती है जहाँ सिंचित नहरों का जाल बिछा हुआ है, क्योंकि यह वर्षा आधारित फसल बिल्कुल नहीं है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जल के अपव्यय को रोकती हैं और पौधों की जड़ों तक सीधे जल पहुँचाकर दक्षता को अधिकतम करती हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि 'परम्परागत कृषि विकास योजना' देश में मृदा स्वास्थ्य और रासायनिक मुक्त जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई गई है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत में धान मुख्य रूप से एक खरीफ फसल है, जिसे कृत्रिम सिंचाई के अतिरिक्त देश के पूर्वी और तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वर्षा के जल पर निर्भर रहकर भी उगाया जाता है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारतीय मृदाओं की आनुवंशिक विशेषताओं, रासायनिक संरचना और उनके भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'क्षारीय और लवणीय मृदा' (Saline and Alkaline Soils), जिसे स्थानीय भाषा में 'रेह', 'कल्लर' या 'ऊसर' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों तथा नहरों द्वारा सिंचित अधिक जल-भराव वाले क्षेत्रों में विकसित होती है, जिसमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के लवणों की अधिकता पाई जाती है। 2. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soils) का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और तीव्र वर्षा के कारण 'निक्षालन' (Leaching) की तीव्र प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका जैसे घुलਨशील तत्व बह जाते हैं और आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ और गेहूँ की खेती के लिए सर्वोत्तम होती है। 3. 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'अरावली पर्वतमाला' (Aravalli Range) विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो अब एक 'अवशिष्ट पर्वत' (Residual Mountain) के रूप में गुजरात के पालनपुर से लेकर राजस्थान और हरियाणा होते हुए दिल्ली तक उत्तर-पूर्व दिशा में फैली हुई है। 2. 'सतपुड़ा पर्वतश्रेणी' (Satpura Range) एक 'ब्लॉक पर्वत' (Block Mountain) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो नर्मदा और ताप्ती नदियों के बीच एक जल विभाजक का कार्य करती है और इसके दक्षिण में ताप्ती तथा उत्तर में नर्मदा घाटी स्थित है। 3. 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'अल नीनो' (El Nino) घटना के दौरान दक्षिण अमेरिका के पेरू तट के पास ठंडी जलधारा के स्थान पर गर्म जलधारा के प्रकट होने से प्रशांत महासागर के पूर्वी और पश्चिमी भागों के बीच वायुदाब में ऐसा परिवर्तन होता है जिससे भारत में मानसूनी हवाओं की तीव्रता बढ़ जाती है और सामान्य से अधिक वर्षा होती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में होने वाली कुल वर्षा का अधिकांश भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होता है, और पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढालों तथा उत्तर-पूर्व के पहाड़ी राज्यों में 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की जाती है, जबकि लद्दाख और पश्चिमी राजस्थान वृष्टिछाया क्षेत्र के कारण शुष्क रहते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी की आंतरिक संरचना, मोहरोविक (Moho) असंभाव्यता और शैल चक्र (Rock Cycle) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'मोहरोविक असंभाव्यता' (Mohorovičić Discontinuity) भूपर्पटी (Crust) और ऊपरी मेंटल के बीच की सीमा रेखा है, जहाँ से प्राथमिक भूकंपीय तरंगों (P-waves) की गति में अचानक तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है। 2. 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