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भारतीय जलवायु और मानसून के संदर्भ में, 'एल नीनो-दक्षिणी दोलन' (ENSO) तथा 'भारतीय महासागर द्विध्रुव' (IOD) की अंतःक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जब प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' (El Niño) सक्रिय होता है, तो यह सामान्यतः भारतीय उपमहाद्वीप में ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा को कमजोर करता है, क्योंकि यह दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत की ओर बहने वाली नमीयुक्त हवाओं के मार्ग को बाधित कर देता है।
  2. 2. 'धनात्मक भारतीय महासागर द्विध्रुव' (Positive IOD) की स्थिति में पश्चिमी हिंद महासागर (अफ़्रीका के तट के पास) असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जबकि पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया के पास) ठंडा हो जाता है, जो भारत में अल नीनो के नकारात्मक प्रभावों को आंशिक रूप से संतुलित या कमजोर कर सकता है।
  3. 3. 'मैडन-जूलियन दोलन' (MJO) एक वैश्विक स्तर पर पूर्व की ओर बढ़ने वाली बादलों और वर्षा की पखवाड़े भर की तरंग है, और जब यह हिंद महासागर क्षेत्र के ऊपर से गुजरती है, तो यह भारतीय मानसून की सक्रियता (Active Phase) को तीव्र करती है।
  4. 4. दक्षिणी दोलन सूचकांक (SOI) का ऋणात्मक मान ताहिती (प्रशांत महासागर) और डार्विन (ऑस्टेलिया) के बीच उच्च दाब अंतर को दर्शाता है, जो भारत में सामान्य से अधिक भारी मानसूनी वर्षा का सूचक होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में तापमान बढ़ने से भारतीय मानसून की हवाएं कमजोर हो जाती हैं। कथन 2 सही है क्योंकि धनात्मक IOD भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा के अनुकूल परिस्थितियां पैदा करता है। कथन 3 सही है क्योंकि मैडन-जूलियन दोलन (MJO) का हिंद महासागर चरण मानसून को बढ़ावा देता है। कथन 4 गलत है, क्योंकि SOI का ऋणात्मक मान कमजोर मानसून और कम वर्षा को दर्शाता है, न कि अधिक वर्षा को। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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