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Geography
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सौर मंडल के ग्रहों, उनकी गतिशीलता और खगोलीय विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'रोशे सीमा' (Roche Limit) वह न्यूनतम दूरी है जिसके भीतर यदि कोई उपग्रह किसी ग्रह के अत्यधिक ज्वारीय बलों के प्रभाव में आता है, तो वह ग्रह के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण टूटकर छल्ले (Rings) में परिवर्तित हो जाता है।
- 2. अरुण (Uranus) और शुक्र (Venus) दोनों ग्रह सौर मंडल के अन्य ग्रहों के विपरीत दिशा में (अर्थात पूर्व से पश्चिम की ओर) अपनी धुरी पर घूर्णन करते हैं, जिसके कारण इन दोनों ग्रहों पर सूर्य पश्चिम में उगता है और पूर्व में अस्त होता है।
- 3. उल्कापिंड (Meteorites) मूल रूप से क्षुद्रग्रहों के टूटने या धूमकेतुओं के अवशेष होते हैं, जो अंतरिक्ष से उच्च वेग के साथ पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर तीव्र घर्षण के कारण दीप्तमान हो जाते हैं, तथा इनमें से जो पिंड वायुमंडल में पूरी तरह जलने से बचकर धरातल पर गिरते हैं, उन्हें उल्काश्म कहा जाता है।
- 4. बृहस्पति का उपग्रह 'आयो' (Io) सौर मंडल का सबसे अधिक ज्वालामुखी सक्रिय पिंड है, जिसका मुख्य कारण बृहस्पति और उसके अन्य बड़े Galilean उपग्रहों के बीच उत्पन्न होने वाले शक्तिशाली ज्वारीय घर्षण (Tidal Heating) बल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। रोशे सीमा (Roche Limit) वह क्रांतिक दूरी है जहाँ ग्रह के ज्वारीय बल उपग्रह के आंतरिक गुरुत्वाकर्षण से अधिक हो जाते हैं, जिससे उपग्रह विखंडित होकर वलय का निर्माण करता है। अरुण और शुक्र अपनी विपरीत घूर्णन दिशा (Retrograde rotation) के लिए जाने जाते हैं। अंतरिक्ष में घूमने वाले धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों के अवशेष जब वायुमंडल से गुजरते हैं तो उन्हें उल्का (Meteor) और भूतल पर पहुँचने पर उल्कापिंड (Meteorite) कहते हैं। बृहस्पति का उपग्रह आयो (Io) अत्यधिक ज्वारीय तापन (Tidal heating) के कारण सौर मंडल का सबसे अधिक ज्वालामुखी सक्रिय क्षेत्र है।
Related Questions
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भारत में कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण और विशेषीकृत कृषि प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जीरो बजट प्राकृतिक खेती' (ZBNF), जिसे वर्तमान में 'भारतीय प्राकृत पद्धतिक कृषि' कहा जाता है, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के पूर्णतः बहिष्कार पर बल देती है और इसमें 'जीवामृत' तथा 'बीजामृत' जैसे स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक घटकों का उपयोग कर मृदा की सूक्ष्मजीवीय सक्रियता को पुनर्जीवित किया जाता है।
2. देश में 'सिल्वाकल्चर' (Silviculture) और 'एग्रोफॉरेस्ट्री' (Agroforestry) का संयोजन बंजर और क्षरित भूमियों के पुनरुद्धार के लिए किया जाता है, जिसमें काष्ठीय बारहमासी वृक्षों को कृषि फसलों के साथ एक ही भूमि के टुकड़े पर क्रमिक या समवर्ती रूप से उगाया जाता है।
3. 'मल्टी-टियर क्रॉपिंग' (Multi-tier Cropping) या बहु-स्तरीय फसल प्रणाली मुख्य रूप से कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाने वाली एक पारंपरिक पद्धति है, जिसमें एक ही खेत में समान ऊँचाई और एक जैसी जड़ गहराई वाली केवल एक ही फसल को बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।
4. भारत में उगाई जाने वाली 'बीटी कपास' (Bt Cotton) एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified) फसल है, जिसमें जीवाणु 'बैसिलस थुरिंजिएंसिस' के जीन का उपयोग करके बॉलवर्म (कपास के कीट) के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सुनामी (Tsunami) और समुद्री भूकंपीय तरंगों की गतिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सुनामी तरंगें महासागरों के गहरे समुद्र में अत्यंत उच्च आयाम (Amplitude) और कम तरंग दैर्ध्य (Wavelength) वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र में गुजरने वाले जहाजों को इनका तीव्र आभास हो जाता है।
2. जब सुनामी तरंगें उथले तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करती हैं, तो उनकी गति में घर्षण के कारण तीव्र वृद्धि हो जाती है, जबकि उनके तरंग दैर्ध्य और आयाम में भारी कमी आ जाती है।
3. प्रशांत महासागर में 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) क्षेत्र अभिसारी प्लेट किनारों और सबडक्शन जोन (Subduction Zone) के कारण विश्व का सबसे अधिक सक्रिय सुनामी और भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख उच्चावच स्वरूपों (पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल) तथा उनके निर्माणकारी प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कॉन्टिनेंटल ड्रिफ्ट' और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांतों के अनुसार, विश्व के अधिकांश नवीन मोड़दार पर्वत (जैसे रॉकीज, एंडीज और हिमालय) अभिसारी प्लेट सीमाओं (Convergent Plate Boundaries) पर महाद्वीपीय-महाद्वीपीय या महाद्वीपीय-महासागरीय टक्कर के परिणामस्वरूप संपीड़न बलों द्वारा निर्मित हुए हैं।
2. 'तिब्बत का पठार' और 'कोलंबिया का पठार' दोनों ही अंतःपर्वतीय (Intermontane) पठारों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनका निर्माण विवर्तनिक उत्थान के साथ-साथ भारी मात्रा में बेसाल्टिक लावा के अतिप्रवाह (Flood Basalt) से हुआ है।
3. 'ग्रेट ऑस्ट्रेलियन मरुस्थल' और 'कालाहारी मरुस्थल' दोनों ही मुख्य रूप से उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियों (Horse Latitudes) के अंतर्गत महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर स्थित हैं, जहाँ ठंडी महासागरीय जलधाराओं के प्रभाव और अवरोही हवाओं के कारण वर्षा का अभाव पाया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन अपरदन द्वारा निर्मित 'इंसर्बर्ग' (Inselbergs) और 'यारडंग' (Yardangs) विशिष्ट भू-आकृतियाँ हैं, जबकि लोएस (Loess) के मैदान मुख्य रूप से रेगिस्तानी क्षेत्रों से दूर पवन द्वारा उड़ाई गई बारीक सिल्ट के निक्षेपण से बनते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के प्रमुख पर्वतीय क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों और घाटियों की संरचना और उनकी अवस्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीर पंजाल श्रेणी (Pir Panjal Range) लघु हिमालय (Lesser Himalayas) की सबसे लंबी और सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी है, जो कश्मीर घाटी को दक्षिण में जम्मू क्षेत्र से अलग करती है और इसी श्रेणी में बनिहाल दर्रा स्थित है जिसके माध्यम से जम्मू और श्रीनगर के बीच सड़क संपर्क स्थापित होता है।
2. 'मर्खा घाटी' (Markha Valley) लद्दाख क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध ट्रेकिंग घाटी है, जो हेमिस राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आती है और इसके उत्तर में जास्कर श्रेणी तथा दक्षिण में लद्दाख श्रेणी का विस्तार पाया जाता है।
3. 'कुल्लू घाटी' (Kullu Valley) धौलाधार और पीर पंजाल श्रेणियों के बीच रावी नदी द्वारा निर्मित एक अनुप्रस्थ (Transverse) घाटी है, जिसे 'देवों की घाटी' (Valley of Gods) भी कहा जाता है और यह अपने सेब के बागानों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शांत घाटी (Silent Valley), जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के लिए जानी जाती है, नीलगिरी पहाड़ियों के दक्षिण-पश्चिम भाग में केरल के पलक्कड़ जिले में कुंथीपुझा नदी के बेसिन में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के प्रमुख पर्वत, पर्वत श्रेणियाँ और घाटियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पीर पंजाल श्रेणी' लघु हिमालय (Himachal/Lesser Himalaya) की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण श्रेणी है, जो कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र से अलग करती है और इसी श्रेणी में प्रसिद्ध 'बनिहाल दर्रा' स्थित है।
2. 'ज़ांसकर श्रेणी' ट्रांस-हिमालय (तिब्बत हिमालय) का एक हिस्सा है, जो मुख्य महान हिमालय के उत्तर में समानांतर रूप से फैली हुई है और इसके उत्तरी ढाल से सिंधु नदी प्रवाहित होती है।
3. 'कुल्लू घाटी' (Kullu Valley), जिसे 'देवों की घाटी' भी कहा जाता है, धौलाधार और पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य रावी नदी द्वारा निर्मित एक अनुदैर्ध्य (Longitudinal) घाटी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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