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अतिचालकता की खोज किसने की थी?

Detailed Explanation

ओन्स ने 1911 में इसकी खोज की थी।
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धातुकर्म (Metallurgy) और धातुओं के निष्कर्षण के प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रगलन (Smelting) एक ऐसी ताप-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर वायु की अधिकता में गर्म किया जाता है ताकि वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो सकें। 2. झाग उत्प्लवन विधि (Froth Flotation Method) मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए प्रयुक्त की जाती है, जिसमें पाइन तेल और चीड़ के तेल का उपयोग फेन (Froth) बनाने के लिए किया जाता है, और यह विधि गीले करने के गुणों (Wetting properties) के अंतर पर आधारित है। 3. बेसेमरीकरण (Bessemerisation) प्रक्रम का उपयोग कच्चे लोहे (Pig Iron) से ढलवां लोहा (Cast Iron) बनाने के लिए किया जाता है, जिसमें गलित धातु में गर्म वायु का झोंका प्रवाहित करके अवांछित कार्बन, सिलिकॉन और मैंगनीज का ऑक्सीकरण किया जाता है। 4. एल्युमीनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult Process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर उसका विद्युत अपघटन किया जाता है, जिससे क्रायोलाइट विलायक के गलनांक को कम करने और विद्युत चालकता बढ़ाने का कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और ऊष्मागतिकीय चरों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे। 2. किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा ($U$) एक अवस्था फलन (State function) है, जिसका अर्थ है कि इसका परिवर्तन पथ पर निर्भर नहीं करता है, जबकि ऊष्मा ($Q$) और कार्य ($W$) पथ फलन (Path functions) हैं जो निकाय द्वारा अपनाए गए प्रक्रम पर निर्भर करते हैं। 3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है ($Q = 0$), जिसके कारण यदि किसी गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घट जाती है और परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट आती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. पारsec (पारसेक) - यह खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी इकाई है, जो लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है। 2. पास्कल (Pascal) - यह दाब की एसआई (SI) व्युत्पन्न इकाई है, जिसे $1 \text{ N/m}^2$ के रूप में परिभाषित किया जाता है। 3. कैंडिला (Candela) - यह सात मूल भौतिक राशियों में से एक है, जो ज्योति तीव्रता (Luminous intensity) को मापती है और यह किसी विशेष दिशा में प्रकाश स्रोत के विकिरण की तीव्रता पर आधारित होती है। 4. फर्मी (Fermi) - यह लंबाई मापने की एक अत्यंत छोटी इकाई है, जिसका मान $10^{-9}$ मीटर के बराबर होता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से परमाणु की त्रिज्या मापने के लिए किया जाता है। उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की सूक्ष्म क्रियात्मक प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय की भित्ति में स्थित पैराइटल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) स्रावित करती हैं, जो क्षुद्रांत के शोषी अंगों द्वारा विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है। 2. फेफड़ों में गैसीय विनिमय के समय, जब रक्त सक्रिय ऊतकों से गुजरता है जहाँ उच्च $CO_2$ सांद्रता और कम $pH$ होता है, तो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता घट जाती है, जिससे ऑक्सीजन का विमोचन आसान हो जाता है, जिसे 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) कहा जाता है। 3. मानव हृदय के संवहन तंत्र में 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) प्राकृतिक पेसमेकर के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह स्वतः क्रियाविभव उत्पन्न करने की उच्चतम क्षमता रखता है, जबकि 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) आवेगों में थोड़ा विलंब उत्पन्न करता है ताकि आलिंदों का संकुचन निलयों के संकुचन से पूर्णतः पहले हो सके। 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में तंत्रिका तंतुओं पर माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण 'शवान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा किया जाता है, जो नमक-मेड़ संचरण (Saltatory conduction) के माध्यम से आवेगों के संचरण की गति को धीमा कर देती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट (Collisions) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किया गया कार्य मार्ग पर निर्भर नहीं करता बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस प्रकार के बल के अंतर्गत बंद पथ में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है। 2. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है, असंरक्षी बलों (जैसे घर्षण) के लिए लागू नहीं होती। 3. एकविमीय पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट (Perfectriz inelastic collision) में गतिज ऊर्जा का पूर्ण संरक्षण होता है, किंतु संवेग का संरक्षण नहीं होता है, और संघट्ट के पश्चात दोनों वस्तुएं एक साथ मिलकर एक ही वेग से गति करती हैं। 4. यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण (External torque) शून्य हो, तो उस निकाय का कुल कोणीय संवेग (Angular momentum) संरक्षित रहता है, जो कि कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत को दर्शाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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