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Geography
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत का अधिकांश कोयला भंडार 'गोंडवाना युग' का है जो देश के कुल कोयला भंडार का लगभग 98 प्रतिशत है, और इसमें उच्च कोटि का कोकिंग कोयला मुख्य रूप से दामोदर घाटी बेसिन के झरिया, रानीगंज और बोकारो क्षेत्रों में पाया जाता है।
  2. 2. देश में 'टर्शियरी कोयला' (Tertiary Coal) के प्रमुख भंडार मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में पाए जाते हैं, जिनमें सल्फर की मात्रा अधिक और कार्बन की मात्रा गोंडवाना कोयले की तुलना में कम होती है।
  3. 3. 'रतनगढ़ और केशनदेसर' (Rajasthan) क्षेत्र भारत में पोटाश के प्रमुख भंडारों के लिए जाने जाते हैं, जबकि देश का अधिकांश 'लिग्नाइट कोयला' (Lignite Coal) भंडार तमिलनाडु के नेवेली बेसिन में केंद्रित है।
  4. 4. भारत में पेट्रोलियम का सबसे पहला कुआँ वर्ष 1867 में असम के 'माकुम' क्षेत्र में खोदा गया था, जो डिगबोई तेल क्षेत्र के अत्यंत निकट स्थित है और यह एशिया का भी सबसे पहला उत्पादक तेल कुआँ था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारत का लगभग 98% कोयला भंडार गोंडवाना क्रम की चट्टानों में पाया जाता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी घाटियों में स्थित है। झरिया और रानीगंज इसके प्रमुख क्षेत्र हैं। कथन 2 सही है: टर्शियरी कोयला मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों में मिलता है, जिसमें नमी और सल्फर की मात्रा अधिक होती है। कथन 3 सही है: राजस्थान में पोटाश के अपार भंडार मिले हैं और तमिलनाडु का नेवेली क्षेत्र उच्च कोटि के लिग्नाइट (भूरा कोयला) उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। कथन 4 गलत है: भारत में पेट्रोलियम का सबसे पहला सफल कुआँ वर्ष 1889 में असम के 'डिगबोई' (Digboi) में खोदा गया था, न कि 1867 में माकुम में (यद्यपि माकुम में भी कार्य आरंभ हुआ था पर डिगबोई एशिया का सबसे पुराना निरंतर कार्यरत तेल क्षेत्र है)। इस विषय के अधिक विवरण के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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