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Geography
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भारत में 'नर्मदा और तापी' नदियाँ पश्चिम की ओर बहती हैं और ज्वारनदमुख (Estuary) का निर्माण करती हैं, इसके विपरीत प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश अन्य बड़ी नदियाँ पूर्व की ओर बहकर डेल्टा बनाती हैं। इस भौगोलिक भिन्नता का मुख्य कारण क्या है?
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Detailed Explanation
भारतीय प्रायद्वीप की अधिकांश नदियाँ (जैसे महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं क्योंकि दक्कन के पठार का सामान्य ढलान पश्चिम से पूर्व की ओर है। इसके विपरीत, नर्मदा और तापी नदियाँ विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर गुजरती हैं और ढलान के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर अरब सागर में गिरती हैं। भ्रंश घाटी में बहने के कारण ये अपने साथ मलबे या तलछट का पर्याप्त निक्षेप नहीं कर पातीं, जिससे ये डेल्टा के बजाय ज्वारनदमुख (Estuary) का निर्माण करती हैं। यह प्रश्न BPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैदान और पठार की भू-आकृति को समझने के लिए यह कॉन्सेप्ट आवश्यक है।
Related Questions
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गुल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) उत्तरी अटलांटिक महासागर की एक प्रमुख गर्म जलधारा है, जो फ्लोरिडा जलडमरूमध्य से निकलकर उत्तर-पूर्व की ओर प्रवाहित होती है और यूरोपीय देशों के पश्चिमी तटों पर शीतकाल में भी बंदरगाहों को बर्फमुक्त रखने में मदद करती है।
2. 'पेरू जलधारा' या 'हम्बोल्ट जलधारा' (Humboldt Current) प्रशांत महासागर में दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर की ओर बहने वाली एक ठंडी जलधारा है, जिसके कारण अटकामा मरुस्थल के निर्माण में अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा होती हैं और यह क्षेत्र दुनिया के सबसे अमीर मत्स्यन क्षेत्रों में से एक है।
3. 'लैब्राडोर जलधारा' (Labrador Current) आर्कटिक महासागर से दक्षिण की ओर बहने वाली एक गर्म जलधारा है, जो न्यूफाउंडलैंड के तट के पास गल्फ स्ट्रीम से मिलती है और इस मिलन स्थल पर घने कोहरे का निर्माण करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ओशियो या कुरील जलधारा (Oyashio Current) उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में बहने वाली एक ठंडी जलधारा है, जो जापान के उत्तर-पूर्वी तट के पास क्यूरोशियो जलधारा से मिलकर प्लवक (Plankton) की प्रचुरता के कारण उत्तम मत्स्यन मैदान का निर्माण करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) प्रकृति की होती हैं क्योंकि इन्हें वर्षा के जल के अतिरिक्त हिमनदों (Glaciers) के पिघलने से भी निरंतर जल प्राप्त होता है, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ अनित्य (Seasonal) होती हैं और उनकी प्रवाह मात्रा मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है।
2. प्रायद्वीपीय नदियों की घाटियाँ चौड़ी, उथली और परिपक्व (Mature) अवस्था में होती हैं क्योंकि ये अत्यधिक पुरानी कठोर चट्टानी संरचनाओं के बीच से बहती हैं और इनकी प्रवणता (Gradient) बहुत कम होती है, जबकि हिमालयी नदियाँ अपने युवा चरण में गहरी गॉर्ज (Gorges) और महाखड्डों का निर्माण करती हैं।
3. कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जो नेपाल से निकलकर गंगा में मिलने से पहले अपने मार्ग परिवर्तन और भारी मात्रा में अवसाद (Silt) निक्षेपण के लिए कुख्यात है, और यह प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा है।
4. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और अपने मुहानों पर बड़े-बड़े डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और तापी जैसी नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होते हुए अरब सागर में गिरती हैं और एश्चুয়ারি (Estuary) बनाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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'श्वेत क्रांति' (White Revolution) किससे संबंधित है?
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भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग में उनकी गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं और ये ध्वनि तरंगों के समान केवल ठोस पदार्थों से ही गुजर सकती हैं, जबकि तरल या गैसीय माध्यमों में प्रवेश करते ही ये पूरी तरह विलुप्त हो जाती हैं।
2. द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जो केवल ठोस माध्यम में ही संचरण कर सकती हैं और इनका तरल माध्यम (जैसे बाहरी कोर) से गुजरने में असमर्थ होना इस बात का मुख्य प्रमाण है कि पृथ्वी का बाहरी क्रोड तरल अवस्था में है।
3. धरातलीय तरंगें (Surface Waves जैसे रेले और लव तरंगें), शरीर तरंगों (Body Waves) की तुलना में अधिक समय तक यात्रा करती हैं और भूकंप के केंद्र से दूर जाने पर सबसे अधिक विनाशकारी क्षति इन्हीं के द्वारा पहुंचाई जाती है।
4. छाया क्षेत्र (Shadow Zone) वह विशिष्ट क्षेत्र होता है जहाँ किसी भी प्रकार की भूकंपीय तरंगें (न तो P और न ही S तरंगें) दर्ज की जाती हैं, और P-तरंगों का छाया क्षेत्र S-तरंगों की तुलना में काफी छोटा होता है क्योंकि यह पृथ्वी के आंतरिक भागों में अपवर्तन के कारण निर्मित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भौगोलिक अवस्थिति, प्रकार तथा भंडार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का अधिकांश कोयला भंडार 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों में पाया जाता है, जिसमें उच्च कोटि का कोकिंग कोयला मुख्य रूप से दामोदर घाटी बेसिन (जैसे झरिया और बोकारो) में संकेंद्रित है, जबकि 'टर्शरी कोयला' मुख्य रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड के क्षेत्रों में मिलता है।
2. 'मुंबई हाई' (Mumbai High) क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा अपतटीय पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र है, जहाँ खनिज तेल की प्राप्ति मुख्य रूप से मियोसीन युग की चूना पत्थर (Limestone) संरचनाओं से होती है, और यह खंभात की खाड़ी के अंतर्गत स्थित है।
3. भारत में थोरियम का मुख्य स्रोत 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) है, जो केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, और यह 'एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च' के नियंत्रण में है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में एंथ्रेसाइट (Anthracite) कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक और भंडारित राज्य 'झारखंड' है, जहाँ देश का कुल 80% से अधिक एंथ्रेसाइट कोयला पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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