त्वरित लिंक्स
General Science
10 views
विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो विलायक में घुले हुए अवाष्पशील विलेय के मोल प्रभाज के पूर्णतः बराबर होता है तथा यह विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।
- 2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैस या सभी द्रव) में होते हैं, और इस प्रक्रिया की क्रियाविधि को 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' (Intermediate compound formation theory) द्वारा समझाया जाता है।
- 3. जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक ($TiCl_4 + Al(C_2H_5)_3$) एक विषमांग उत्प्रेरक का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका उपयोग उच्च घनत्व वाले पॉलीइथिलीन (HDPE) के औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है।
- 4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अपनी अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार एंजाइम रासायनिक अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित कर पश्च अभिक्रिया की दर को अत्यधिक तीव्र कर देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि राउल्ट के नियम के अनुसार, अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है और यह एक अणुसंख्यक गुणधर्म है जो कणों की संख्या पर निर्भर करता है, प्रकृति पर नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक समान प्रावस्था में होते हैं और मध्यवर्ती यौगिक सिद्धांत इसकी पुष्टि करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक एक 'समांग या उप-विषमांग' नहीं बल्कि समन्वय उत्प्रेरण प्रणाली है जिसमें ज़ीग्लर-नट्टा उत्प्रेरक विशिष्ट रूप से बहुलकीकरण में प्रयुक्त होता है और यह विषमांग या समांग दोनों रूपों में कार्य कर सकता है, यहाँ यह विशेष रूप से हेटेरोजीनियस पॉलीमराइजेशन से जुड़ा है, किंतु तकनीकी रूप से TiCl4 और AlEt3 का मिश्रण विषमांग उत्प्रेरक के अंतर्गत आता है; तथापि, कथन 4 पूरी तरह गलत है क्योंकि उत्प्रेरक (एंजाइम सहित) कभी भी अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित नहीं करते हैं, वे केवल अग्र और पश्च दोनों अभिक्रियाओं के वेग को समान रूप से प्रभावित करके साम्यावस्था को शीघ्र प्राप्त कराते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
हवा में नाइट्रोजन प्रतिशत?
→
मधुबनी?
→
मानव शरीर में विटामिन और उनके सह-एंजाइमी (Co-enzyme) स्वरूपों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B1 (थiamin) का सक्रिय सह-एंजाइम स्वरूप 'थियामिन पाइरोफास्फेट' (TPP) है, जो क्रैब्स चक्र से पहले पाइरुवेट के एसिटाइल-CoA में ऑक्सीडेटिव डिकार्बोक्सिलेशन के लिए आवश्यक पाइरुवेट डिहाइड्रोजनस कॉम्प्लेक्स का एक अनिवार्य घटक है।
2. विटामिन B3 (नियासिन) 'निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड' (NAD+) और NADP+ का अग्रगामी (Precursor) है, जो कोशिकीय श्वसन में अपचयन-ऑक्सीकरण (Redox) अभिक्रियाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
3. विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) का शरीर में मुख्य कार्य एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करना है, और यह कोलेजन तंतुओं के हाइड्रॉक्सिलेशन को रोककर संयोजी ऊतकों (Connective tissues) को कमजोर करता है, जिससे 'स्कर्वी' रोग उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, जो राउल्ट के नियम का एक अणुसंख्यक गुणधर्म है।
2. वेंट-हॉफ कारक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए हमेशा एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप से संघनित (Association) हो जाते हैं, क्योंकि अणुओं के जुड़ने से कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को परिवर्तित करके अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं, किंतु वे साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant) के मान को बदल देते हैं।
4. जिओलाइट्स (Zeolites) त्रि-विमीय सिलिकेट नेटवर्क संरचना वाले सूक्ष्मछिद्रित उत्प्रेरक हैं जो 'आकार-वरण उत्प्रेरण' (Shape-selective Catalysis) प्रदर्शित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पदार्थ की अवस्थाओं और परमाणु संरचना (Atomic Structure) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. द्रव्य की 'बोस-आइंस्टीन संघनन' (Bose-Einstein Condensate - BEC) अवस्था अत्यंत कम घनत्व वाली गैस को परम शून्य (Absolute Zero) के अतिनिकट तापमान तक ठंडा करके प्राप्त की जाती है, जिसमें क्वांटम प्रभाव स्थूल स्तर पर दिखाई देने लगते हैं।
2. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी से बिना किसी विक्षेपण के सीधे निकल गए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला होता है और संपूर्ण धन आवेश तथा द्रव्यमान उसके अत्यंत सूक्ष्म केंद्रीय भाग (नाभिक) में केंद्रित होता है।
3. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (Angular Momentum) $h/2\pi$ का पूर्ण गुणज (Integral multiple) होता है, और इन कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण करते हैं।
4. पाऊलिका अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion Principle) के अनुसार, एक ही परमाणु में उपस्थित किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m_s, s$) के मान कभी भी सर्वसम (Identical) नहीं हो सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.