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General Science
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ऊष्मागतिकी के शून्यवें नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) और विभिन्न तापमापीय पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य (Thermal equilibrium) में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
  2. 2. परम शून्य ताप (Absolute Zero) वह सैद्धांतिक तापमान है जिस पर किसी आदर्श गैस की गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है, और सेल्सियस पैमाने पर इसका मान -273.15 °C होता है।
  3. 3. फारेनहाइट और सेल्सियस पैमाने एक विशिष्ट तापमान पर बिल्कुल समान पाठ्यांक (Reading) दर्शाते हैं, और यह तापमान -40 डिग्री होता है।
  4. 4. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant volume gas thermometer) में पारे का उपयोग किया जाता है क्योंकि पारा सभी तापमानों पर एकसमान प्रसार गुणांक प्रदर्शित करता है और काँच को नहीं भिगोता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम तापमान के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है। फारेनहाइट और सेल्सियस पैमाने पर -40 डिग्री पर मान समान होते हैं। परम शून्य ताप -273.15 °C होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि स्थिर आयतन गैस तापमापी में पारे के स्थान पर हाइड्रोजन या हीलियम गैस का उपयोग किया जाता है, जबकि पारे का तापमापी अलग होता है और उच्च ताप पर पारा वाष्पीकृत हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और तापमान मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की संकल्पना को परिभाषित करता है और यह स्पष्ट करता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे। 2. कार्नोट इंजन (Carnot Engine) की दक्षता केवल ऊष्मा स्रोत और सिंक के तापमान पर निर्भर करती है, और यह इस बात पर निर्भर करती है कि कार्यकारी पदार्थ (Working substance) कौन सा गैस या द्रव उपयोग किया जा रहा है। 3. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point) वह विशिष्ट तापमान और दाब की स्थिति है जिस पर शुद्ध जल, बर्फ और जलवाष्प तीनों सह-अस्तित्व में तापीय साम्य में रहते हैं, और इसका उपयोग केल्विन ताप पैमाने के निर्धारण में मानक संदर्भ बिंदु के रूप में किया जाता है। 4. रुष्म प्रक्रम (Adiabatic Process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है, जिसके परिणामस्वरूप गैस के प्रसार से आंतरिक ऊर्जा में कमी आती है और तापमान घट जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रम के दौरान अयस्क को वायु की नियमित या सीमित आपूर्ति में उसके गलनांक से कम तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है। 2. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे भारी धातु ऑक्साइडों को अपचयित कर पिघली हुई अवस्था में धातु प्राप्त करने में सहायता करता है। 3. 'जोन परिष्करण' (Zone Refining) विधि का उपयोग मुख्य रूप से अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम) के अत्यधिक उच्च शुद्धिकरण के लिए किया जाता है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि अशुद्धियाँ ठोस अवस्था की तुलना में गलित अवस्था (Molten state) में अधिक विलेय होती हैं। 4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण की 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) विधि में अमोनिया का पुनर्चक्रण किया जाता है, और इस प्रक्रिया में उपोत्पाद के रूप में कैल्शियम क्लोराइड ($CaCl_2$) प्राप्त होता है, जिससे अमोनिया की कोई बड़ी हानि नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मिश्रधातुओं (Alloys) और उनके संगठन (Composition) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'पीतल' (Brass) तांबे और जस्ते की एक मिश्रधातु है, जिसमें तांबे की मात्रा अधिक होती है, और यह संक्षारण के प्रति प्रतिरोधी होती है। 2. 'कांस्य' (Bronze) तांबे और टिन का एक मिश्र धातु है, जिसका उपयोग मूर्तियाँ, सिक्के और बर्तन बनाने में किया जाता है। 3. 'जर्मन सिल्वर' (German Silver) नामक मिश्रधातु में चांदी (Silver) का प्रतिशत लगभग 50% होता है, जिसके कारण इसका नाम जर्मन सिल्वर पड़ा है। 4. 'अल्निकोस' (Alnico) एक ऐसी मिश्रधातु है जिसमें लोहा, निकेल, कोबाल्ट और एल्यूमीनियम होते हैं, और इसका उपयोग शक्तिशाली स्थायी चुंबक (Permanent Magnets) बनाने के लिए किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? किसी प्रथम कोटि (First Order) की अभिक्रिया का अर्द्ध-आयु काल (Half-life) किसके समानुपाती होता है? कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन के नामकरण, समवयस्कता (Isomerism) और उनकी रासायनिक अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल्काइन्स (Alkynes) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक त्रिक बंध (Triple bond) होता है, और इनका सामान्य सूत्र $C_n{H}_{2n-2}$ होता है। 2. 'ब्यूटेन' ($C_4{H}_{10}$) के दो संरचनात्मक समवयस्क (Structural isomers) संभव हैं—सामान्य ब्यूटेन (n-butane) और आइसोब्यूटेन (2-methylpropane), जो श्रृंखला समवयस्कता (Chain isomerism) प्रदर्शित करते हैं। 3. जब एल्केन्स को वायु की अधिकता में पूर्ण रूप से जलाया जाता है, तो यह दहन अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड भी सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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